Monday, December 23, 2024
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अलवारा झील में परिंदों का कुंभ:विदेशी परिंदों का स्वागत करता अलवारा झील, 25 हजार पक्षियों का कलरव




प्रयागराज के संगम से 80 किलोमीटर दूर कौशांबी जिले की अलवारा झील इन दिनों परिंदों के कुंभ का केंद्र बनी हुई है। यहां देश-विदेश से आए करीब 25,000 पक्षी चार महीने तक अपनी मनमोहक छटा बिखेरते हैं। झील के शांत वातावरण और वेटलैंड के बीच परिंदों का कलरव पक्षी प्रेमियों को बरबस खींच लाता है। वेटलैंड में 18 विदेशी प्रजातियां
अलवारा झील में 18 विदेशी और 8 देशी प्रजातियों के पक्षी ठहरते हैं। इनमें साइबेरियन स्टोनचेट, पिनटेल, शावलर, ब्राह्मणी डक, स्पॉट-बिल और पर्पल हेरोन जैसे पक्षी शामिल हैं। ये पक्षी रूस, मंगोलिया, साइबेरिया और उत्तरी गोलार्ध से भारत में आते हैं, जब वहां सर्दियों में बर्फबारी शुरू होती है। सुबह और शाम की अठखेलियां
सूरज निकलने और डूबने का समय इन पक्षियों के सक्रिय रहने का होता है। इस दौरान ये झुंड में उड़ान भरते हैं, अठखेलियां करते हैं और भोजन तलाशते हैं। दिन में धूप तेज होने पर ये झुंड में बैठकर सुस्ताते हैं, जबकि रात में पेड़ों और झाड़ियों में आराम करते हैं। झील की घटती सुंदरता
पर्यावरणविद नीरज सिंह ने बताया कि झील क्षेत्र में परिंदों की संख्या घट रही है। शिकार और जलकुंभी जैसी समस्याएं पक्षियों के लिए खतरा बन रही हैं। सरकारी भूमि का क्षेत्र भी घटकर केवल 2,250 बीघा रह गया है। बेपरवाह इंसानी दखल और जलकुंभी का फैलाव इन पक्षियों के लिए चुनौती बन गया है। सुरक्षा और जागरूकता के प्रयास
वन विभाग ने परिंदों की सुरक्षा के लिए टीम तैनात की है। वन रेंजर, स्थानीय दारोगा और ग्रामीणों को सक्रिय किया गया है। डीएफओ राम सिंह यादव के मुताबिक, लोगों को जागरूक कर इन विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ईको-टूरिज्म का प्रस्ताव
डीएम मधुसूदन हुल्गी ने बताया कि अलवारा झील को ईको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रमुख सचिव पर्यटन ने इस पर सहमति व्यक्त करते हुए बजट मंजूरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थानीय बजट से वेटलैंड क्षेत्र में विकास कार्य जारी हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए खास आकर्षण
झील के किनारे पक्षियों के झुंड में उड़ने का वी आकार, उनकी अद्भुत कलाबाजी और कलरव का रस पक्षी प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है। हर कोई यहां आकर कहता है, “वाह, क्या नजारा है!” अगर सुरक्षा और संरक्षण पर ध्यान दिया जाए, तो यह झील पक्षी पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकती है।



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