उज्जैन स्मार्ट सिटी सीईओ डॉ. नेहा जैन ने बताया विकास का रोडमैप, 2027 तक पूरे होंगे वीर भारत संग्रहालय और रेप्टाइल पार्क; महिलाओं की सुविधा के लिए शी-लाउंज का अपडेट वर्जन होगा तैयार

उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरी उज्जैन में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को लेकर तेजी से काम चल रहा है। उज्जैन स्मार्ट सिटी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और अपर आयुक्त नगर पालिक निगम डॉ. नेहा जैन ने शहर के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स, आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों और महिलाओं की सुविधाओं को लेकर विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीर भारत संग्रहालय और रेप्टाइल पार्क जैसे अहम प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2027 तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व में बनाए गए शी-लाउंज के अपडेट वर्जन पर काम करने और उनकी संख्या बढ़ाने की भी बात कही है।
डॉ. नेहा जैन ने अपनी शिक्षा और प्रशासनिक सफर के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने एनके बगरोडिया पब्लिक स्कूल, नई दिल्ली से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से उच्च शिक्षा ग्रहण की। चिकित्सा क्षेत्र में काम करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें नीति निर्माण की भूमिका में होना चाहिए। यही उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इसी सोच के साथ उन्होंने तैयारी की और वर्ष 2018 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में चयनित हुईं।
आईएएस बनने के बाद डॉ. जैन की पहली जिम्मेदारी कर्नाटक राज्य में मिली। उन्होंने कोप्पल (कर्नाटक) में बतौर प्रोबेशनरी अधिकारी जिला प्रशासन और आंगनवाड़ी को उन्नत करने का कार्य देखा। इसके बाद मांडिया (कर्नाटक) में उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पद पर उनकी पहली पोस्टिंग हुई। इसी दौरान उनका विवाह संपन्न हुआ। बाद में कैडर स्थानांतरण के माध्यम से उन्हें मध्य प्रदेश का आवंटन मिला। मध्य प्रदेश में उन्होंने अशोकनगर में एसडीएम और जिला पंचायत सीईओ के रूप में कार्यभार संभाला। इसके पश्चात सीहोर में जिला पंचायत सीईओ और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में अतिरिक्त संचालक (एडिशनल डायरेक्टर) के पद पर रहकर उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। वर्तमान में वे उज्जैन स्मार्ट सिटी की सीईओ और अपर आयुक्त नगर पालिक निगम के पद पर कार्यरत हैं।
अपनी अब तक की आईएएस यात्रा की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए डॉ. नेहा जैन ने बताया कि अशोकनगर में पदस्थ रहते हुए उन्होंने स्वच्छता मित्रों को ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत डिग्निटी कार्ड बनवाए थे। इस सराहनीय कार्य का प्रतिनिधित्व लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय शिविर (नेशनल कैंप) में भी किया गया। उनके इस प्रयास की संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने भी सराहना की और इसे प्रकाशित किया।
उज्जैन में चल रहे प्रमुख प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर डॉ. जैन ने कहा कि वीर भारत संग्रहालय और रेप्टाइल पार्क अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं। इन दोनों प्रोजेक्ट्स को लेकर लगातार निरीक्षण किया जा रहा है, नियमित बैठकें हो रही हैं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि पूरी कोशिश की जा रही है कि गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना ये दोनों कार्य वर्ष 2027 तक हर हाल में मूर्त रूप ले लें।
आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर डॉ. जैन ने बताया कि कई ऐसे प्रोजेक्ट्स हैं जो सीधे तौर पर सिंहस्थ से जुड़े हुए हैं। सिंहस्थ में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए स्मार्ट सिटी द्वारा विशेष योजना बनाई गई है। उनका प्रयास है कि सिंहस्थ से जुड़े सभी निर्माण और विकास कार्यों को मई-जून 2027 तक पूर्ण करवा लिया जाए, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सिंहस्थ मेले के लिए बनाए जाने वाले आईसीसीसी (एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र) के बारे में उन्होंने बताया कि यह केंद्र सिंहस्थ के दौरान शहर की आंख, नाक और कान की भूमिका निभाएगा। वर्तमान में इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। इस अत्याधुनिक केंद्र के माध्यम से शहर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।
महाकालेश्वर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भारत माता मंदिर से चौबीस खंभा माता मंदिर मार्ग तक के सड़क निर्माण कार्य पर उन्होंने कहा कि यह मार्ग श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनकी आस्था से सीधे जुड़ा हुआ है। इस कार्य के लिए उन्होंने अपनी टीम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण में कहीं कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।
पूर्व में बनाए गए शी-लाउंज के बंद होने के सवाल पर डॉ. जैन ने स्वीकार किया कि महिलाओं की सुविधा के लिए इनके अपडेट वर्जन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसमें बदलाव दिखाई देंगे और शहर में इन लाउंज की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। पूर्व में जो शी-लाउंज बनाए गए थे, उनमें क्या कमियां रहीं, इसका भी गहन विश्लेषण किया जा रहा है ताकि नए वर्जन में वे दोहराई न जाएं।
अपनी कार्यशैली और लीडरशिप को परिभाषित करते हुए डॉ. नेहा जैन ने कहा कि एक अच्छे प्रशासक में सुनने की क्षमता होनी चाहिए और हर जगह की तासीर को समझना जरूरी है। वे ऐसे काम करने में जुटी हैं जिनकी उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे पूरी तरह से टीम वर्क की भावना से कार्य कर रही हैं।




