ओबीसी आरक्षण को लेकर बहस के बीच चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। प्रदेश की कुल आबादी में सबसे ज्यादा 48% हिस्सेदारी रखने वाले पिछड़े वर्ग की सरकारी नौकरियों में मौजूदगी महज 16.80% है। वहीं, सामान्य वर्ग के 21.64%, एससी के 10.49%, और एसटी के 10.73% कर्मचारी
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यह रिपोर्ट प्रदेश में ओबीसी की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का आकलन करने के लिए तैयार की गई थी, पर हैरत की बात यह है कि यह एक साल से सार्वजनिक नहीं हुई। आयोग ने ओबीसी को 35% आरक्षण देने समेत कई अनुशंसाएं की हैं। रिपोर्ट डॉ. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी ऑफ सोशल साइंस, महू की मदद से तैयार हुई, जिसमें 69 सरकारी विभागों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। एक साल पहले आयोग को यह रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है।
इसमें सिफारिश कई गई थी कि एससी-एसटी एक्ट की तर्ज पर ओबीसी के लिए विशेष अधिनियम बने। जिन जिलों में ओबीसी की आबादी अधिक है, उन्हें पिछड़ा वर्ग बहुल घोषित किया जाए। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में 40% से अधिक पद अभी भी रिक्त हैं।
प्रदेश में ऑल इंडिया सर्विस, क्लास वन, क्लास टू, क्लास थ्री और क्लास फोर के कुल 1209321 स्वीकृत पदों में से महज 721412 पद ही भरे हैं। इन भरे गए पदों की बात करें तो 261666 (36.27%) पर सामान्य वर्ग तो 203144 (28.16%) पदों पर पिछड़ा वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी हैं।
क्या बोली ओबीसी महासभा : हाईकोर्ट वकील और ओबीसी महासभा की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य धर्मेंद्र सिंह कुशवाह के मुताबिक आरक्षण सीमा 50 फीसदी से अधिक नहीं होने का मामला उन राज्यों के लिए है जहां सर्वे नहीं हुआ है। जिन राज्यों में आबादी का सर्वे हो गया है, वहां आरक्षण की सीमा बढ़ाई जा सकती है। हाल में हाईकोर्ट ने ओबीसी को 27% आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका को निरस्त किया है।
रिपोर्ट में की गई सिफारिशों को जल्द लागू करे सरकार प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को उसकी आबादी के लिहाज से हक नहीं मिला है। सरकार रिपोर्ट को जल्द से जल्द सार्वजनिक करे और इसकी अनुशंसाओं का पालन कराए। –वरुण ठाकुर, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट और लीगल एडवाइजर ओबीसी महासभा
बगैर अध्यक्ष के चल रहा मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग दो सितंबर 2021 को राज्य सरकार ने मप्र पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया था। इसका अध्यक्ष पूर्व विधायक गौरीशंकर बिसेन को बनाया गया था। अध्यक्ष के बाद चार सदस्य बन चुके हैं। अभी आयोग में दो सदस्य हैं। 2023 के बाद से आयोग में कोई अध्यक्ष नहीं है।
ये तो हद है… आयोग के सचिव बोले- रिपोर्ट अभी तैयार नहीं, पर सदस्य ने कहा- रिपोर्ट तो तैयार है
हिंदुओं की 93 तो मुस्लिमों की 38 जातियां मप्र में हिंदुओं की 93 जातियों और उपजातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया है। वहीं मुस्लिमों की 38 जाति-उपजातियों को इस सूची में जगह दी गई है। कुछ जातियों को कई जिलों में अन्य पिछड़ा वर्ग में तो कुछ जिलों में अनुसूचित जाति और जनजाति की श्रेणी में रखा है।
विवि ने कहा- एक साल पहले दे चुके रिपोर्ट पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के सचिव नीलेश देसाई का कहना है कि रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हुई है। डॉ. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी की ओर से उन्हें जानकारी नहीं मिली हैं, वहीं यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का कहना है कि हमने एक साल पहले ही रिपोर्ट दे दी है। इधर, आयोग के सदस्य ऋषि यादव ने भी स्वीकार किया है कि रिपोर्ट तैयार है।
अखिल भारतीय सेवा के पदों पर 13.7%
- पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग द्वारा तैयार कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में क्लास वन के पदों पर पिछड़ा वर्ग के अफसरों की पदस्थापना महज 9.5 फीसदी है, इन पदों पर सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व 64.08 % है।
- प्रदेश में क्लास वन के 16,846 पद स्वीकृत हैं, लेकिन नियुक्ति 7840 पदों पर ही है। इनमें से 5024 पदों पर सामान्य वर्ग तो 749 पदों पर पिछड़ा वर्ग के अधिकारियों की तैनाती है।
- कमोबेश यही स्थिति आल इंडिया सर्विस (एआईएस) के प्रदेश में स्वीकृत पदों में भी हैं। कुल स्वीकृत 1258 पदों में से 625 पर ही तैनाती है।
- इनमें से 61.12 प्रतिशत पदों यानी 382 पर सामान्य वर्ग के अफसर हैं। जबकि ओबीसी प्रतिनिधत्व सिर्फ 13.76 फीसदी यानी 86 है।
15 विभाग जहां ओबीसी कर्मचारी 20% से कम
मप्र के कुल 69 सरकारी विभागों में से सभी में पिछड़ा वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों की संख्या आबादी के हिसाब से सामान्य वर्ग की तुलना में कम है। 15 विभाग ऐसे हैं जहां भरे हुए पदों पर पिछड़ा वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी 20 फीसदी से कम हैं।

रिपोर्ट तैयार है, सीएम से चर्चा का समय मांगा है
सरकारी नौकरियों समेत अन्य रोजगारों में पिछड़े वर्ग की मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट तैयार है। इस पर चर्चा के लिए सीएम से समय मांगा है। अभी पिछड़ा वर्ग की मौजूदगी बेहतर नहीं है। -ऋषि यादव, सदस्य, मप्र पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग
रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, सरकार रोककर बैठी है
कमलनाथ सरकार ने ओबीसी के 27% आरक्षण की व्यवस्था की थी। भाजपा सरकार ने अमल में नहीं आने दिया। आयोग ने जो रिपोर्ट तैयार की है, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। -जेपी धनोपिया, पूर्व अध्यक्ष मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग