गांधी जयंती पर उज्जैन के कलाकार ने दाल-चावल के दानों से बनाया बापू का पोर्ट्रेट, 4 से 5 घंटे में तैयार की अनोखी कलाकृति

उज्जैन। महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर के एक कलाकार ने राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देने का एक बेहद अनोखा और प्रेरणादायक तरीका अपनाया है। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, उज्जैन निवासी कलाकार रवि आकोदिया ने दाल, चावल और विभिन्न प्रकार के अनाज के दानों का उपयोग करके कैनवास पर महात्मा गांधी का एक शानदार पोर्ट्रेट तैयार किया है। इस विशेष कलाकृति के माध्यम से उन्होंने न केवल बापू के आदर्शों को याद किया, बल्कि समाज को अन्न के सम्मान और उसकी महत्ता का भी एक सशक्त संदेश दिया।
रवि आकोदिया ने इस पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने सबसे पहले कैनवास पर पेंसिल की मदद से महात्मा गांधी की एक ड्राइंग यानी स्केच तैयार किया। इसके बाद उन्होंने तस्वीर के अलग-अलग हिस्सों में गोंद की सहायता से दाल, चावल और अन्य अनाज के दानों को बहुत ही सावधानीपूर्वक चिपकाना शुरू किया। यह काम अत्यंत धैर्य और एकाग्रता की मांग करता था। रवि ने बताया कि इस पोर्ट्रेट को पूरी तरह से तैयार करने में उन्हें लगभग 4 से 5 घंटे का समय लगा। इस कलाकृति को बनाने में उन्होंने करीब 5 से 6 प्रकार की अलग-अलग दालों, चावल और अन्य अनाज का इस्तेमाल किया। पूरी कलाकृति में कुल मिलाकर लगभग 1 से 1.5 किलोग्राम अनाज का उपयोग हुआ है।
इस कलाकृति की सबसे खास बात यह है कि रवि ने इसे बनाने के लिए कोई महंगा या विशेष सामान नहीं खरीदा। उन्होंने अपने घर में रोज़मर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली दाल, चावल और अन्य अनाज का ही उपयोग किया। मुख्य रूप से कैनवास पर इन दानों को मजबूती से चिपकाने के लिए फेविकोल का इस्तेमाल किया गया। रवि ने बताया कि इस साल मध्य प्रदेश में बारिश कम हुई है, जिसके कारण किसानों और आम लोगों के सामने कई चुनौतियां हैं। ऐसे में उन्होंने गांधी जी को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ लोगों को अन्न की महत्ता का संदेश देने का विचार किया। उनका स्पष्ट मानना है कि जिस तरह से हम महात्मा गांधी के विचारों और उनके बताए रास्तों का सम्मान करते हैं, ठीक उसी तरह हमें अन्न का भी सम्मान करना चाहिए और इसे कभी बर्बाद नहीं करना चाहिए।
रवि आकोदिया का यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने गांधी जयंती पर अपनी कला के जरिए बापू को नमन किया हो। वे पिछले करीब 10 वर्षों से लगातार हर साल गांधी जयंती के अवसर पर अलग-अलग माध्यमों से महात्मा गांधी की तस्वीर बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि देते आ रहे हैं। इस एक दशक के दौरान उन्होंने ड्राइंग, स्केचिंग, पेंटिंग और कैनवास पर बापू के कई पोर्ट्रेट बनाए हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने जमीन पर बालू और रेत का उपयोग करके महात्मा गांधी की एक विशाल तस्वीर तैयार की थी, जिसे लोगों ने काफी सराहा था। हर साल वे एक नया माध्यम चुनते हैं ताकि उनकी श्रद्धांजलि में कुछ नयापन और संदेश शामिल हो सके। इस बार उन्होंने दाल और अनाज को अपना माध्यम चुना, जो सीधे तौर पर आम जनजीवन और किसानों से जुड़ा हुआ है।
रवि आकोदिया पेशे से बैंककर्मी हैं। वे पंजाब नेशनल बैंक में नौकरी करते हैं। बैंक की व्यस्त नौकरी के कारण उन्हें अपनी कला के लिए ज्यादा समय नहीं मिल पाता है, लेकिन वे अपने इस शौक और जुनून के लिए हमेशा समय निकाल लेते हैं। उनका कहना है कि वे किसी भी प्रकार के पुरस्कार, सम्मान या लोकप्रियता के लिए ऐसी कलाकृतियां नहीं बनाते हैं। वे इसे केवल अपनी आत्मसंतुष्टि और गांधी जी के प्रति अपने अनूठे तरीके से श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से करते हैं।
रवि ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि गांधी जी को केवल नाम से याद करना या साल में एक दिन उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, गांधी जी के सत्य और अहिंसा के विचारों को अपने दैनिक जीवन में अपनाना और उनके सिद्धांतों पर चलना ही उन्हें दी जाने वाली सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने अपनी इस कलाकृति के जरिए समाज से अपील की है कि लोग गांधी जी के आदर्शों को समझें और अन्न का सम्मान करें, क्योंकि अन्न ही जीवन का आधार है। उज्जैन के इस कलाकार की इस पहल ने स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है और गांधी जयंती के दिन एक सार्थक संदेश देने का काम किया है।




