गृह मंत्रालय द्वारा ए.जी.एम.यू.टी. कैडर 1997 बैच के चंडीगढ़ डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव का ट्रांसफर अचानक होना पूरे पुलिस फोर्स में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि उन्होंने फरवरी 2024 में चंडीगढ़ पुलिस विभाग में ज्वाइन किया था। डी.जी.पी. सुरेंद्र याद
.
राजकुमार, आईजी चंडीगढ।
2 साल का था कार्यकाल
डी.जी.पी. सुरेंद्र सिंह यादव ने चंडीगढ़ पुलिस में सिर्फ 13 महीने ही बिताए थे। वे 2 साल के लिए नियुक्त हुए थे, लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया। उनके ट्रांसफर पर पुलिस विभाग में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों में उनके कड़े अनुशासन के कारण राहत की भावना देखी गई, जबकि कुछ उनके कार्यकाल को प्रभावी बता रहे हैं।

कांस्टेबल से लेकर डीएसपी तक पर केस दर्ज
जब डी.जी.पी. सुरेंद्र यादव ने चंडीगढ़ में कार्यभार संभाला था, तभी से भ्रष्टाचार को लेकर उनका सख्त रवैया देखने को मिला। जिसके चलते क्राइम ब्रांच ने कांस्टेबल युद्धबीर, शहर के पूर्व मेयर कुलदीप पर केस दर्ज किया, हालांकि केस दर्ज होने के समय वे मेयर थे। डी.एस.पी. एस.पी.एस. सोंधी, इंस्पेक्टर जसमिंदर, सीनियर कांस्टेबल समुंदर और हेड कांस्टेबल सतीश, सीनियर कांस्टेबल प्रदीप और कांस्टेबल सुरिंदर, पर भी केस दर्ज किया गया। साथ ही एएसआई सेवा सिंह, एएसआई रणजीत सिंह और कॉन्स्टेबल दीपक, एएसआई संजीव कुमार, कांस्टेबल नीरज ,एएसआई गुरदेव सिंह को सस्पेंड कर दिया गया।
डीजीपी को बदनाम करने की साजिश
डीजीपी यादव को बदनाम करने की साजिश रचने के आरोप में क्राइम ब्रांच ने तीन पुलिसकर्मियों ओमप्रकाश, जसपाल और महिला पुलिसकर्मी जसविंदर के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप है कि सोशल मीडिया और वॉट्सऐप के जरिए उनके खिलाफ फर्जी पत्र और ईमेल वायरल किए गए थे।