तीन दिवसीय गणगौर मेले का धूमधाम से समापन
सुबात कचहरी चौक पर आयोजित गणगौर महोत्सव का समापन गुरुवार रात को भजन संध्या के साथ हुआ। मेले के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शहर के पांच प्रमुख मोहल्लों-पंचरंग पाड़ा, भूरीपाड़ा, किला, टोड़ी बाजार और चौपड़ मोहल्ला की गणगौर मंडलियों ने अपनी
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परंपरागत वाद्ययंत्रों की धुन पर लकड़ी से बनी आदमकद ईसर-पार्वती की प्रतिमाएं जुलूस में निकलीं। रात साढ़े नौ बजे प्रतिमाएं सुबात कचहरी चौक पर पहुंचीं। सुबात कचहरी से कचहरी चौक तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
पवन मेवाड़ा के भजनों पर झूमे श्रोता
समापन समारोह में रानू सेन और पवन मेवाड़ा ने भजन प्रस्तुत किए। ‘चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है’ और ‘गोर गोर मुखड़ा पे काला काला काजल’ जैसे भजनों पर श्रोता झूम उठे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना से हुई।
रात 12 बजे तक लोग मेले का आनंद लेते रहे। पारंपरिक गणगौर गीतों और ढोल-नगाड़ों की गूंज से माहौल भक्तिमय बना रहा। यह मेला शहर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसने आस्था और नारी शक्ति का संदेश भी दिया। गणगौर केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और भक्ति का संगम है।