Sunday, April 6, 2025
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नरवाई जलाने पर किसानों को देना होगा जुर्माना: इंदौर में 16 अप्रैल तक चलेगा जागरूकता अभियान, 2 से 15 हजार तक का दंड – Indore News


कलेक्टर आशीष सिंह ने प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इंदौर जिले में गेहूं की कटाई के बाद फसल अवशेष (नरवाई) को जलाने से रोकने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। कलेक्टर आशीष सिंह ने प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ जिले के सभी विकासखंडों की ग्राम पंचायतों में जाएगा।

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कृषि विभाग के अनुसार, नरवाई जलाने से पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है। साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम होती है। इसलिए 5 से 16 अप्रैल तक हर ग्राम पंचायत में किसान संवाद कार्यक्रम होंगे। इनमें कृषि विभाग के अधिकारी, पटवारी और पंचायत सचिव मौजूद रहेंगे।

मध्य प्रदेश सरकार ने नरवाई जलाने पर दंड का प्रावधान किया है। 2 एकड़ तक की जमीन वाले किसानों को 2,500 रुपए प्रति घटना जुर्माना देना होगा। 2 से 5 एकड़ तक की जमीन वालों को 5,000 रुपए और 5 एकड़ से अधिक जमीन वालों को 15,000 रुपए प्रति घटना का दंड भरना होगा।

कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की तकनीकी जानकारी भी देगा। अधिकारियों का कहना है कि नरवाई को खेत में ही गलने देना या अन्य तरीकों से इसका प्रबंधन करना खेती के लिए फायदेमंद है।

5 से 16 अप्रैल तक हर ग्राम पंचायत में किसान संवाद कार्यक्रम होंगे।

नरवाई जलाने से होती है हानियां उप संचालक कृषि सीएल केवड़ा ने बताया- खेत में गेहूं एवं अन्य फसलों के अवशेषों को जलाने से अनेक हानियां होती है। जमीन में उपस्थित लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु केंचुए नष्ट हो जाते हैं, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति कम होती है।

भूमि कठोर हो जाती है, जिसके कारण भूमि की जल धारण क्षमता कम हो जाती है। नरवाई में आग लगाने से आसपास की खड़ी फसलों में आग लगने से एवं जन/धन हानि की आशंका रहती है। पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है। वातावरण के तापमान में वृद्धि होती है, जिससे धरती गर्म होती है।

नरवाई प्रबंधन के उपाय स्ट्रॉरीपर (भूसा मशीन) से भूसा बनाया जा सकता है। वेलर मशीन द्वारा बेल बनाकर कागज उद्योग, बायो मॉस डेयरी में भूसा की पूर्ति की जा सकती है।मल्चर मशीन द्वारा फसल अवशेषों को बारीक काट कर खेत में जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम वाले हार्वेस्टर का प्रयोग करें।

खेत में कल्टीवेटर, रोटावेटर या डिस्क हेरो की सहायता से फसल अवशेषों को भूमि में मिलाने से आने वाली फसलों में जीवांश खाद की बचत की जा सकती है। पशुओं के लिए भूसा और खेत के लिए बहुमूल्य पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ने के साथ मिट्टी की संरचना को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। नरवाई में आग लगाने पर पुलिस द्वारा प्रकरण भी कायम किया जा सकता है।

नरवाई के उचित प्रबंधन से मिलेगी अतिरिक्त आय किसानों से जिला प्रशासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने आग्रह किया है कि फसल कटाई के बाद फसल अवशेष में आग नहीं लगाए, नरवाई का उचित प्रबंधन कर भूमि वातावरण को नुकसान न पहुंचाते हुए पशुओं के लिये भूसा, जैविक खाद तैयार करे। जिससे फसल उत्पादन के अतिरिक्त भी आय प्राप्त की जा सकती है।



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