बस आपरेटर्स और परिवहन विभाग के कर्मचारी कमिश्नर कार्यालय में शाम तक मौजूद रहे।
नर्मदापुरम संभाग की सड़कों पर चलने वाली बसों को स्थाई परमिट देने की प्रक्रिया गुरुवार को पूरी की गई। नर्मदापुरम संभाग आयुक्त कार्यालय में कमिश्नर केजी तिवारी ने बसों के स्थाई परमिट के लिए आए 166 आवेदनों पर सुनवाई की। यह सुनवाई दोपहर 2 बजे से शाम 6 बज
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28 अप्रैल तक दावे-आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी
कमिश्नर (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी-आरटीए) ने सभी आवेदनों पर एक-एक करके सुनवाई की। अब इन आवेदनों पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 28 अप्रैल तय की गई है। इस तिथि तक आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं, जिसके बाद स्थाई परमिट जारी किए जाएंगे।
2019 के बाद पहली बार जारी होंगे स्थाई परमिट
गौरतलब है कि वर्ष 2015 से 2019 तक परिवहन विभाग के डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को बसों के स्थाई परमिट जारी करने का अधिकार था। लेकिन 2019 में हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद यह अधिकार डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से वापस ले लिए गए, जिसके चलते तब से स्थाई परमिट जारी नहीं किए जा रहे थे। बीते दो वर्षों से बस ऑपरेटर्स को अस्थायी परमिट या शादी के परमिट के आधार पर बसों का संचालन करना पड़ रहा था।
राज्य सरकार ने स्थाई परमिट की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के लिए रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) का गठन किया है। अब संभागायुक्त को इस अथॉरिटी का प्रमुख नियुक्त किया गया है। इसी आधार पर 2019 से लंबित पड़े 166 आवेदनों पर सुनवाई की गई। इस प्रक्रिया के दौरान आरटीओ निशा चौहान भी मौजूद रहीं।
नर्मदापुरम और देवास का कार्यभार संभाल रहीं आरटीओ निशा चौहान
आरटीओ निशा चौहान का 21 मार्च को देवास तबादला हो गया था। उनकी जगह देवास से परिवहन अधिकारी जया बसावा का नर्मदापुरम स्थानांतरण किया गया था। निशा चौहान ने देवास आरटीओ का कार्यभार संभाल लिया है, लेकिन नर्मदापुरम में अब तक नई आरटीओ ने जॉइनिंग नहीं की है। इस कारण निशा चौहान ही फिलहाल नर्मदापुरम आरटीओ का पद भी संभाल रही हैं।
