पुस्तक मेले में पुस्तक कॉपियां खरीदने पहुंचे अभिभावक।
नर्मदापुरम में आयोजित पुस्तक मेला पुस्तक विक्रेताओं के पास सभी किताबें नहीं मिल सकीं। न ही अभिभावकों को कोई बड़ा डिस्काउंट मिला। उन्हें 5 से 7 प्रतिशत डिस्काउंट ही मिल सका। मेले में एक-दो दुकानों के पास ही स्कूलों की सारी किताबें मिल रही। बाकी दुकानदा
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इन बातों से पेरेंट्स ज्यादा खुश नहीं आए। उन्होंने कहा इससे अच्छा डिस्काउंट तो दुकानों पर ही मिल जाता है।
स्कूली बच्चों की महंगी पुस्तकों का बोझ कम और मोनोपॉली खत्म करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने नर्मदापुरम में पुस्तक मेला आयोजित हुआ। लेकिन इसके सफल परिणाम नहीं दिख रहे।शिक्षा विभाग कुछ पेरेंट्स के फीडबैक और दो दिन के मेले में 700 से ज्यादा विद्यार्थियों द्वारा किताबें और कॉपी खरीदने पर मेले के सफल होने की बात कर रहा है।
जिला मुख्यालय पर 5 बड़े स्कूलों में ही करी 10 हजार बच्चे हैं। अन्य स्कूलों में भी काफी विद्यार्थी हैं। ऐसे में अगर 700 विद्यार्थी द्वारा किताबें खरीदी जाने को सफल मानना तुलनात्मक रूप से काफी कम है।
अभाविप के पविभाग संगठन मंत्री और जिला संगठन मंत्री ने डीईओ से बातचीत कर जानकारी मांगी।
एनसीआरटी की जगह प्राइवेट पब्लिशर की बुक्स मेले में कक्षा 1 से 8 वीं तक की एनसीआरटी की पुस्तकें 7 में से केवल 3 पुस्तक विक्रेताओं के पास ही मिली। मजबूरन अभिभावकों को पब्लिशर्स की बुक्स खरीदना पड़ा। एनसीआरटी की बुक्स न मिलने पर वह मायूस हुए।
अभाविप के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने जिला शिक्षा अधिकारी एसपीएस बिसेन और पुस्तक विक्रेताओं से भी इस विषय पर चर्चा की।
शिक्षा विभाग से एनसीआरटी की पुस्तकों को लेकर लागू गाइडलाइंस भी मांगी, तो डीईओ बिसेन ने डीईओ जबलपुर से बात करी, फिर डीईओ बिसेन गाइडलाइंस बाद में बताने का कह दिए। प्रांत संगठन ने कहा दो दिन में हमें पूरी जानकारी चाहिए, वर्ना छात्रों के हित में संगठन अपनी राजनीति बनाएगा।

एसपीएस बिसेन जिला शिक्षा अधिकारी।
पुस्तकों पर 5,7 तक डिस्काउंट मेले में जिन तीन दुकानों पर पुस्तकें मिली। वहां पर एनसीआरटी 9 से 12वीं तक की पुस्तकों पर 5 प्रतिशत और बाकी पर 7 प्रतिशत डिसकाउंट दिया गया। कॉपियों की कुछ दुकानों पर 40 तो कुछ पर 10, 20 प्रतिशत डिस्काउंट दिया गया।
डीईओ बोले- हर एक अभिभावक का अपना एक दृष्टिकोण जिला शिक्षा अधिकारी बिसेन का कहना है कि हमारा मेला सफल हुआ है। अभिभावकों के हमारे पास प्रमाण है। सभी संतुष्ट हो या नहीं, इसके लिए हर एक अभिभावक का अपना एक दृष्टिकोण होता है। जिले में जो नवाचार हुआ है, इससे हम कुछ सीख रहे है। इसमें जो कमियां होगी, आगे उसमें सुधार करेंगे। केवल तीन दुकानों पर पुस्तकें होने के सवाल पर डीईओ बोले कि मैंने जब देखा था तब सभी दुकानों पर मिली पुस्तकें थी।

करियर के लिए गाइडेंस किया मेले में डॉ. गणेश पटेल संभागीय मास्टर ट्रेनर और सरिता पाल, सारिका तिवारी, शायना खान कीर्ति तिवारी, दीप्ति दीवान, नीलिमा साहू, अनुभवी शिक्षकों ने छात्रों को प्रेरित करने और उनके सवालों का समाधान करने में अहम भूमिका निभाई। उन छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी रहा जो अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।