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बालाघाट: आंगनवाड़ी से आई मौत की खबर रिकॉर्ड पर नहीं चढ़ी, राहुल गांधी ने जगला गांव में उठाए सरकारी सिस्टम पर सवाल

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बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के जगला गांव में बैगा आदिवासी बच्चों की लगातार हो रही मौतों और सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम दर्ज न होने का गंभीर मामला सामने आया है। एक अक्टूबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस गांव का दौरा किया और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधे तौर पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि गांव में कई आदिवासी बच्चों की बीमारियों से मौतें हुईं, लेकिन इनमें से कई मृतकों के नाम सरकारी रिकॉर्ड में कहीं दर्ज नहीं किए गए। राहुल गांधी से बातचीत के दौरान कुछ पीड़ित परिवारों ने बताया कि उनके बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती रहे, इसके बावजूद उनका नाम प्रशासन की आधिकारिक लिस्ट में शामिल नहीं था।

इस मामले में दैनिक भास्कर ने विस्तृत पड़ताल की। पड़ताल में सामने आया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों की मौत की जानकारी समय रहते स्वास्थ्य विभाग को भेजी थी, लेकिन यह सूचना आधिकारिक रिकॉर्ड में क्यों नहीं चढ़ी, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। राहुल गांधी के दौरे के बाद कांग्रेस पार्टी ने मृतक बच्चों की एक लिस्ट जारी की है, जिसमें 44 नाम दर्ज हैं। वहीं, दूसरी ओर प्रशासन अभी भी केवल 32 मौतों की पुष्टि कर रहा है। इस पूरे मामले में जब बालाघाट के कलेक्टर कुमार सत्यम से जवाब मांगा गया, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

आंगनवाड़ी स्तर पर हुई पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जगला गांव की आंगनवाड़ी सहायिका मीना मरावी ने चार बच्चों के नाम बताए, जिनकी मौत हाल ही में हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन बच्चों की जान खसरा और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों के कारण गई थी। मीना मरावी का दावा है कि उन्होंने इस संबंध में पूरी जानकारी समय पर स्वास्थ्य विभाग को भेज दी थी। वर्तमान में इस आंगनवाड़ी केंद्र में कुल 76 बच्चे रजिस्टर्ड हैं। इसी तरह, आंगनवाड़ी सुपरवाइजर वंदना परते ने भी पुष्टि की कि उन्हें इन बच्चों की मौतों की पूरी जानकारी थी और यह सूचना उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि पीड़ित परिवारों को अब तक मुआवजा क्यों नहीं मिला, तो उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब केवल अफसर ही दे सकते हैं।

भास्कर टीम ने गांव में उन परिवारों से भी बात की जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। चमरू धुर्वे के घर की स्थिति बेहद दर्दनाक है। उनकी दो साल की बेटी नीलम की हाल ही में मौत हो गई। नीलम की मां बमनीन बाई ने बताया कि बेटी के पूरे शरीर पर दाने निकल आए थे और उसे तेज बुखार था। वे सबसे पहले उसे बैहर अस्पताल ले गए, जहां वह एक दिन और एक रात भर्ती रही। इसके बाद उसे बालाघाट जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। पिता चमरू के मुताबिक, नीलम बालाघाट जिला अस्पताल में सात दिन तक भर्ती रही। जब उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो वे उसे घर वापस ले आए और दो दिन बाद उसकी मौत हो गई। अस्पताल में दस दिन तक भर्ती रहने के कारण दंपती की मजदूरी छूट गई और इलाज के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा। चमरू को आज भी सरकार से किसी मदद की उम्मीद है।

जगला गांव नवी पंचायत के अंतर्गत आता है और यहां बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। पंचायत भवन से गांव तक पक्की सड़क से पहुंचने के लिए 17 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि कच्चे रास्ते से यह दूरी पांच किलोमीटर है। गांव में न तो कोई स्कूल है और न ही अस्पताल। ग्रामीणों को इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए 30 किलोमीटर दूर बिठली के हाट बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीण राधा मरावी और संगीता खुसरे ने बताया कि गांव से बिठली के लिए ऑटो केवल साप्ताहिक हाट बाजार वाले दिन ही चलते हैं।

राहुल गांधी का 12 दिन में मध्य प्रदेश का यह दूसरा दौरा था। इससे पहले वे 19 सितंबर को इंदौर गए थे। जगला गांव को उनके दौरे का केंद्र इसलिए चुना गया क्योंकि कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया कुछ दिन पहले यहां पहुंचे थे और उन्होंने गांव की बदहाल स्थिति की जानकारी राहुल गांधी को दी थी। राहुल गांधी ने जमीन पर बैठकर बैगा आदिवासियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की कोई सुविधा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बच्चों की मौत के बावजूद परिवारों को मुआवजा नहीं दिया गया है। साथ ही उन्होंने मांग की कि आदिवासी महिलाओं के लिए चल रही योजनाओं का लाभ लाड़ली बहना योजना के साथ जोड़कर दिया जाए। राहुल गांधी इससे पहले भी इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी, सागर के बंडा में जहरीली शराब और छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले उठा चुके हैं।