छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में अनोखी परंपरा देखने को मिल रही है। यहां के झिंका गांव में परेतिन दाई माता का मंदिर स्थित है, जहां लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। परेतिन माता को विशेष रूप से संतान प्राप्ति के लिए पूजा जाता है।
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स्थानीय सब्जी व्यापारी नारायण सोनकर बताते है कि वे जब भी इस मार्ग से गुजरते हैं, माता को सब्जियां अर्पित करते हैं। उनका मानना है कि इससे माता का आशीर्वाद मिलता है।
नारायण सिंह ने बताया कि गांव के यदुवंशी (यादव और ठेठवार) मंदिर में बिना दूध चढ़ाए निकल जाते हैं तो दूध फट जाता है। ऐसा कई बार हो चुका है। गांव में भी बहुत से ठेठवार हैं, जो रोज दूध बेचने आसपास के इलाकों में जाते हैं।
यहां दूध चढ़ाना ही पड़ता है। जान बूझकर दूध नहीं चढ़ाया तो दूध खराब (फट) हो जाता है तब से यहां चढ़कर जाते हैं, और परेतिन की पूजा हम करते हैं क्योंकि वो मां हमारी रक्षा करती है बच्चों को खुश रखती है।
झिंका गांव में स्थित है परेतिन दाई माता का मंदिर
मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता
मंदिर की स्थापना एक पेड़ से जुड़ी है। आज भी वह पेड़ माता के प्रमाण के रूप में मौजूद है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, इस रास्ते से गुजरने वाले लोग माता को शीश नवाकर ही आगे बढ़ते हैं। यहां मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।
सिकोसा से अर्जुन्दा जाने वाले मार्ग पर स्थित इस मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं। यह मंदिर अब पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध हो चुका है।
नवरात्र के पावन अवसर पर यहां ज्योत जलाई गई है और विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। स्थानीय लोगों की आस्था इस मंदिर को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।

व्यापारी मंदिर में फल सब्जी चढ़ाते है
कुछ हिस्सा मंदिर के पास छोड़ने की मान्यता
दशकों से इस मंदिर की मान्यता है कि इस रास्ते से कोई भी मालवाहक वाहन या लोग गुजरते हैं और किसी तरह का समान लेकर जाते हैं तो उसका कुछ हिस्सा मंदिर के पास छोड़ना पड़ता है।
चाहे खाने-पीने के लिए बेचने वाले सामान या फिर घर बनाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले सामान। आप वाहन में जो भी कुछ सामान ले जा रहे होते हैं उसमें से कुछ हिस्सा यहां चढ़ाना जरूरी है।
ऐसा लोगों का मानना है कि कोई व्यक्ति अगर ऐसा नहीं करता है तो उसके साथ कुछ न कुछ अनहोनी होती है।

चैत्र और क्वार नवरात्रि में परेतिन माता के दरबार में विशेष आयोजन होते है
नवरात्र में विशेष आयोजन
चैत्र और क्वार नवरात्रि में परेतिन माता के दरबार में विशेष आयोजन किए जाते हैं। जहां पर ज्योति कलश की स्थापना की जाती है और नवरात्र के 9 दिन बड़ी संख्या में भक्तों का तांता लगा रहता है।
भले ही मान्यता अनूठी हो लेकिन सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपरा और मान्यता आज भी इस गांव में कायम है। वर्तमान में 100 ज्योति कलश यहां पर प्रज्वलित किए गए हैं।