नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
- कॉपी लिंक
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (26 सितंबर) को बिलकिस बानो केस में गुजरात सरकार की अर्जी खारिज कर दी। अर्जी में गुजरात सरकार ने मांग की थी कि इस केस में दोषियों की रिहाई से जुड़े आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणियां की थीं उन्हें हटा दिया जाए। 8 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ बलात्कार और उसके परिवार की हत्या के दोषी 11 लोगों की समयपूर्व रिहाई को रद्द कर दिया था।
फैसला सुनाते वक्त जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा- सजा अपराध रोकने के लिए दी जाती है। पीड़ित की तकलीफ की भी चिंता करनी होगी। गुजरात सरकार को रिहाई का फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं है। उसने अपनी सत्ता और ताकत का दुरुपयोग किया है। बेंच ने सभी 11 दोषियों को 2 सप्ताह में सरेंडर करने को कहा था।
बिलकिस बानो केस में गुजरात सरकार ने 11 दोषियों को 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया था।

बिलकिस के दोषियों के खिलाफ 30 नवंबर को दाखिल की गई थी याचिका बिलकिस के 11 दोषियों की रिहाई के खिलाफ 30 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की गई थीं। पहली याचिका में 11 दोषियों की रिहाई को चुनौती देते हुए उन्हें तुरंत वापस जेल भेजने की मांग की गई थी। दूसरी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के मई में दिए आदेश पर विचार करने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने कहा था कि दोषियों की रिहाई पर फैसला गुजरात सरकार करेगी। बिलकिस ने कहा कि जब केस का ट्रायल महाराष्ट्र में चला था, फिर गुजरात सरकार फैसला कैसे ले सकती है?


बिलकिस बानो से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
बिलकिस से गैंगरेप के दोषी रिहा: पति बोले- उनकी वजह से हम खौफ में जीते रहे, 15 घर बदले; अब कहां जाएं

‘हमें यकीन ही नहीं हो रहा कि बिलकिस से गैंगरेप करने वाले, मेरी 3 साल की बेटी को पटक-पटककर मार देने वाले, मेरे परिवार के सात लोगों की हत्या करने वालों को सरकार ने कैसे छोड़ दिया। ये सोचकर ही हमें डर लग रहा है। इस फैसले ने बिलकिस को तोड़ दिया है।’ ये बातें बिलकिस बानो के पति याकूब रसूल ने दैनिक भास्कर से कही हैं। पूरा इंटरव्यू पढ़ें…