जीवन में खुशी नहीं तो जीवन व्यर्थ है, और चाहे कुछ भी हो जाए, हम खुश रहेंगे—इसी संदेश के साथ ब्रह्मा कुमारीज सुख शांति भवन, मेडिटेशन रिट्रीट सेंटर, नीलबड़, भोपाल में वर्ल्ड हैप्पीनेस डे 2025 (World Happiness Day 2025) हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
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संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2012 में आधिकारिक मान्यता प्राप्त यह दिवस, वैश्विक स्तर पर खुशी और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को के लिए मनाया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में सकारात्मकता, संतुलन और मानसिक शांति को बढ़ावा देना है।
खुशी का सीधा संबंध मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से
सुख शांति भवन की निदेशिका नीता दीदी जी ने कहा, “खुशी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल व्यक्तिगत जीवन में संतुलन लाती है, बल्कि समाज की समग्र भलाई में भी योगदान देती है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी खुशी और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करें। दीदी ने यह भी बताया कि मेडिटेशन एक कारगर उपाय है, जिससे हम अपने मन को सुख के सागर, सर्वशक्तिमान परमात्मा पिता से जोड़कर असीम आनंद का अनुभव कर सकते हैं। इससे हमारा मन और शरीर दोनों स्वस्थ बने रहते हैं।
खुशी के हार्मोन और मानसिक स्वास्थ्य
इस अवसर पर डॉ. प्रियंका नेगी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि खुशी हमारे मस्तिष्क में सकारात्मक हार्मोन्स जैसे सेरोटोनिन, डोपामिन, एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन का निर्माण करती है, जिससे हमारा शरीर खुद को प्राकृतिक रूप से ठीक करने लगता है। इन हार्मोन्स को बढ़ाने में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का विशेष प्रभाव होता है।
सदा खुश रहने की प्रेरणा और प्रतिज्ञा
कार्यक्रम में बीके हेमा बहन ने सभी को खुश रहने की सुंदर टिप्स दीं और एक अनोखी एक्टिविटी के माध्यम से सभी को खुश रहने की प्रतिज्ञा कराई।
- चाहे कुछ भी हो जाए – मैं खुश रहूंगा।
- चाहे कितना भी थक जाऊं – मैं खुश रहूंगा।
- चाहे अपमान हो जाए – मैं खुश रहूंगा।
- चाहे नुकसान हो जाए – मैं खुश रहूंगा।
- चाहे मोबाइल टूट जाए – मैं खुश रहूंगा।