दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय में रविवार को पार्टी की नेशनल सोशल मीडिया वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी की डिजिटल उपस्थिति को और मजबूत करना और विपक्ष के विचारों का प्रभावी ढंग से जवाब देना था।
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक पार्टी के सूत्रों ने जानकारी दी कि इस वर्कशॉप में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया नैरेटिव का सिस्तम से जवाब देने पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही बैठक में पीएम मोदी के कार्यों को लोगों तक पहुंचाने और सदस्यता अभियान से जुड़े मुद्दों पर भी गहन बातचीत की गई। इस कार्यक्रम में संगठन, संवाद और तकनीक के तालमेल से जनसेवा के संकल्प को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
भाजपा के सोशल मीडिया संयोजक दीपक म्हास्के ने इस वर्कशॉप की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस बैठक से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंच को प्रभावी बनाने में काफी मदद मिली। उन्होंने कहा, “इस बैठक ने संगठन के डिजिटल प्रयासों को नई दिशा दी है।” उनके अनुसार, आगामी समय में डिजिटल रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई और नए विचार तथा नजरिए सामने आए।
वर्कशॉप में भारतीय चुनावों में सोशल मीडिया की भूमिका के विकास पर भी गहन चर्चा हुई। 2014 के सालगिरा चुनावों से ही सोशल मीडिया प्रचार का बड़ा हथियार बनना शुरू हो गया था, जहाँ नेताओं ने भाषणों के साथ-साथ फेसबुक और ट्विटर का जमकर उपयोग किया था। समय के साथ पार्टियाँ सिर्फ बड़े मंचों पर सीमित नहीं रहीं, बल्कि अब व्हाट्सएप और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से सीधे लोगों की जेब तक पहुंच रही हैं। इस तरह की सीधी डिजिटल पहुंच ने राजनीतिक संचार को पूरी तरह बदल दिया है।
हालांकि, डिजिटल प्रचार के बढ़ने के साथ ही झूठी खबरों और डीपफेक की चुनौती भी बढ़ गई है, जो सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। फर्जी खबरें और नकली वीडियो के प्रसार को रोकना आज की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने गलत प्रचार को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर भी सख्त आचार संहिता और कड़े नियम लागू कर दिए हैं।
इस वर्कशॉप में भाजपा के कई प्रमुख कार्यकर्ता और डिजिटल रणनीतिकारों ने भाग लिया। पार्टी के नेतृत्व में इस कार्यक्रम को लेकर बहुत गंभीरता से दृष्टि डाली गई, जिससे यह संकेत मिला कि भाजपा अपने डिजिटल उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए प्रत्यक्ष प्रयास कर रही है।
एक संबंधित विकास के रूप में, राहुल गांधी के इंदौर में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर भी विवाद हो गया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि इस कार्यक्रम में पीएम मोदी की मां का अपमान किया गया। इस विवाद को लेकर शिक्षा मंत्री ने भी अपनी बात रखी, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला किया और कहा कि यह पार्टी जोकरों की पार्टी बन गई है।
इस दृष्टिकोण से, भाजपा की यह सोशल मीडिया वर्कशॉप केवल एक तकनीकी बैठक नहीं बल्कि पार्टी की डिजिटल रणनीति का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है, खासकर जब आगामी चुनावों की दिशा में सोशल मीडिया पर निर्भरता और बढ़ती जा रही है।














