हरदा में रविवार को घट स्थापना के साथ गणगौर महोत्सव की शुरुआत हुई। यह उत्सव 23 से 31 मार्च तक मनाया जाएगा। भुआणा क्षेत्र में यह त्योहार बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।
.
जिला मुख्यालय में पांच स्थानों के अलावा टिमरनी, सिराली, चारुवा, धुरगाड़ा, चारखेड़ा, पोखरनी, जिजगांव, मुहाल, सामरधा और कुकरावद सहित अन्य गांवों में इस उत्सव का आयोजन हो रहा है। आयोजक परिवारों में इसको लेकर भारी उत्साह है।
गांवों में विद्युत सज्जा से भव्य पंडाल सजाए गए हैं। रात में गणगौर मंडलियां भजन और नृत्य प्रस्तुत कर रही हैं। गणगौर माता का पाठ भी किया जा रहा है। नौ दिवसीय इस उत्सव में पुरुष मंडलियां गीतों के साथ झालरे और स्वांग जैसे कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी।

ग्रामीणों ने बताया कि, गणगौर पर्व सामाजिक रिश्तों की मजबूत कड़ी है। यह हिंदू धर्म के मूल आराध्य शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना का त्योहार है। इस पर्व में गोरा मैया रनुबाई और महादेव धनियर राजा के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
मालवा-निमाड़-भुआणा की साझी संस्कृति इस महोत्सव में झलकती है। कन्याएं और महिलाएं परंपरागत नृत्य करती हैं। 31 मार्च को ज्वारों के विसर्जन के साथ गणगौर उत्सव का समापन होगा।जिले में गणगौर महोत्सव का आयोजन 9 दिवसीय महोत्सव होता है। लेकिन कुछ परिवारों में नवमें दिन सजाए जाने वाले रथ को बोडाना (रोका) जाता है।


