मध्य प्रदेश में 103 पंचायत पदों की मतगणना संपन्न: सुसनेर नगर परिषद अध्यक्ष सहित 104 सीटों के नतीजे घोषित, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई वोटों की गिनती

मध्य प्रदेश में शनिवार को पंचायत उपचुनाव के तहत 103 पदों पर हुए मतदान की मतगणना संपन्न हो गई। राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सुबह आठ बजे से काउंटिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। इसके साथ ही आगर-मालवा जिले के सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव की मतगणना भी औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र (आईटीआई कॉलेज) में शुरू हो गई। सभी अभ्यर्थी और उनके द्वारा नियुक्त गणना एजेंट समय रहते मतगणना स्थल पर पहुंच गए थे। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए मतगणना केंद्र के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
कुल 104 पदों के लिए 29 सितंबर को मतदान कराया गया था। इनमें 103 पंचायत पद और एक सुसनेर नगर परिषद अध्यक्ष का पद शामिल था। सुसनेर नगर परिषद अध्यक्ष पद के अलावा नलखेड़ा जनपद के वार्ड 6 और वार्ड 11 के सदस्यों के लिए भी आज नतीजे आए हैं। सुसनेर नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रदीप सोनी को अपना प्रत्याशी बनाया था, जबकि कांग्रेस ने विष्णु पाटीदार को मैदान में उतारा था। दोनों प्रमुख दलों के बीच इस सीट पर सीधी टक्कर देखने को मिली।
सुसनेर नगर परिषद के 15 वार्डों में कुल 17 मतदान केंद्र बनाए गए थे। चुनाव के दौरान 75.96 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सुसनेर में कुल 13,843 मतदाताओं में से 10,515 मतदाताओं ने वोट डाले थे। मतगणना के लिए आईटीआई कॉलेज सुसनेर में 15 वार्डों के लिए 15 टेबल लगाई गईं। दो बड़े वार्डों, वार्ड 7 और वार्ड 10, जिनमें दो-दो पोलिंग बूथ बनाए गए थे, उनकी गिनती दूसरे राउंड में की गई। बाकी सभी वार्डों में एक-एक पोलिंग बूथ होने के कारण उनकी गिनती पहले ही राउंड में पूरी कर ली गई।
मतगणना स्थल पर सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। करीब 50 से भी अधिक विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मतगणना प्रक्रिया में तैनात रहे। मतगणना केंद्र में प्रवेश के लिए सुबह साढ़े सात बजे से साढ़े आठ बजे तक का समय निर्धारित किया गया था। इसके बाद सुबह नौ बजे से ईवीएम मशीनों के माध्यम से वोटों की गिनती शुरू की गई। मतगणना में तैनात किए गए कर्मचारियों को गुरुवार को आगर-मालवा में विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, ताकि गिनती की प्रक्रिया बिना किसी त्रुटि के संपन्न हो सके।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त प्रेक्षक दुर्ग विजय सिंह ने भी मतगणना केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने तैनात कर्मचारियों को पूरी सावधानी और पारदर्शिता के साथ काम करने के सख्त निर्देश दिए। प्रेक्षक ने यह सुनिश्चित किया कि मतगणना प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के सभी नियमों और मानकों के अनुरूप संपन्न हो।
इधर, नलखेड़ा जनपद के वार्ड 6 और वार्ड 11 के सदस्य पद के लिए मतगणना सरदार वल्लभभाई पटेल शासकीय महाविद्यालय में कराई गई। यहां भी प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वोटों की गिनती सुनिश्चित की। नलखेड़ा के मतगणना केंद्र पर भी पुलिस बल तैनात रहा और गणना एजेंटों की मौजूदगी में ईवीएम खोली गईं।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी पंचायत उपचुनाव की मतगणना शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। खातेगांव जनपद की साकट्या पंचायत के सरपंच पद के उपचुनाव में लक्ष्मीनारायण लच्छू पटेल विजयी घोषित किए गए हैं। उनकी जीत के बाद समर्थकों ने खुशी जताई। वहीं, बालाघाट जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली भरवेली पंचायत के सरपंच उपचुनाव प्रत्याशियों की मतगणना भी शुरू हो गई। भरवेली पंचायत में कुल पांच प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। यह सीट पूर्व सरपंच गीता अनिल बिसेन को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाए जाने के बाद रिक्त हुई थी। अविश्वास प्रस्ताव के बाद हुए इस उपचुनाव में पांच उम्मीदवारों के बीच मुकाबला दिलचस्प रहा।
मध्य प्रदेश में पंचायत उपचुनाव के लिए 29 सितंबर को मंगलवार के दिन 103 पदों पर मतदान हुआ था। उसी दिन आगर-मालवा जिले के सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए भी वोटिंग कराई गई थी। इस प्रकार पूरे प्रदेश में कुल 104 पदों के लिए एक साथ मतदान की प्रक्रिया पूरी की गई थी। शनिवार को हुई मतगणना में सभी 104 पदों के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं।
प्रशासन ने पूरे राज्य में मतगणना के दिन शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। सभी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतगणना केंद्रों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मतगणना केंद्रों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। किसी भी प्रकार की अफवाह या असामाजिक तत्वों की गतिविधि पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया की भी निगरानी की गई। मतगणना के बाद विजयी प्रत्याशियों के जुलूस या जश्न पर भी प्रशासन ने नजर रखी, ताकि कानून व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न न हो सके। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों से मतगणना के बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश जारी किए थे, जिसका पालन सुनिश्चित किया गया।




