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Sun, Oct 4, 2026Updated 2:41 PM IST
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मध्य प्रदेश में 4500 संविदा बिजलीकर्मियों का आंदोलन: 5 अक्टूबर तक नियमितीकरण परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी करने की चेतावनी

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भोपाल। मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। राज्य सरकार द्वारा साढ़े छह हजार से अधिक संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित करने का ऐतिहासिक फैसला लिए जाने के बावजूद, ऊर्जा विभाग अभी तक इनकी नियमितीकरण परीक्षा आयोजित कराने के लिए आवश्यक नोटिफिकेशन जारी नहीं कर सका है। इस देरी के चलते बिजली कंपनियों के संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पांच अक्टूबर तक परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया, तो वे दिवाली के पहले बड़ा आंदोलन करेंगे। इस आंदोलन में लगभग 4500 संविदा बिजलीकर्मी शामिल होंगे, जिससे बिजली व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बिजली कंपनियों में कार्यरत साढ़े छह हजार से अधिक संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया था। यह निर्णय संविदा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा था, क्योंकि इसके तहत उन्हें स्थायी सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। हालांकि, फैसले की घोषणा के बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी ऊर्जा विभाग की थी, लेकिन विभाग अभी तक इस दिशा में ठोस कदम उठाने में विफल रहा है। नियमितीकरण की प्रक्रिया के तहत इन कर्मचारियों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है, जिसके लिए औपचारिक अधिसूचना यानी नोटिफिकेशन जारी किया जाना अनिवार्य है। परंतु ऊर्जा विभाग ने अब तक इस परीक्षा के लिए कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है।

नोटिफिकेशन जारी न होने से संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों में गहरा गुस्सा है। उनका कहना है कि सरकार ने नियमितीकरण का फैसला तो ले लिया, लेकिन उसे लागू करने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है। इस देरी से कर्मचारियों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है और उनके मन में असुरक्षा की भावना घर कर गई है। कई कर्मचारी वर्षों से संविदा के आधार पर काम कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद थी कि सरकार के फैसले के बाद उनकी सेवाएं जल्द ही नियमित हो जाएंगी। लेकिन परीक्षा का नोटिफिकेशन न आने से उनकी सभी उम्मीदें टूटती जा रही हैं। इसी आक्रोश के चलते कर्मचारियों ने अब खुलेआम आंदोलन की चेतावनी दे दी है।

संविदा बिजलीकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर एक स्पष्ट डेडलाइन तय की है। उन्होंने ऊर्जा विभाग और राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि पांच अक्टूबर तक नियमितीकरण परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी किया जाए। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर नोटिफिकेशन जारी नहीं होता है, तो कर्मचारी दिवाली के पहले बड़े आंदोलन पर उतर आएंगे। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन में लगभग 4500 संविदा बिजलीकर्मी हिस्सा लेंगे। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि दिवाली का त्योहार नजदीक है और ऐसे में यदि आंदोलन होता है, तो आम जनता को बिजली आपूर्ति से जुड़ी भारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। त्योहारी सीजन में बिजली की मांग वैसे ही अधिक रहती है, और अगर बिजलीकर्मी हड़ताल पर चले गए तो पूरे सिस्टम पर दबाव पड़ना तय है।

मध्य प्रदेश में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन का कार्य विभिन्न बिजली कंपनियों द्वारा संचालित किया जाता है। इन कंपनियों में बड़ी संख्या में संविदा कर्मी तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर कार्यरत हैं। ये कर्मचारी फील्ड वर्क से लेकर कार्यालयीन कार्यों तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बिना इन संविदा कर्मचारियों के सहयोग के बिजली कंपनियों का दैनिक संचालन सुचारू रूप से चल पाना अत्यंत कठिन है। ऐसे में जब 4500 से अधिक कर्मचारी एक साथ आंदोलन की बात कर रहे हैं, तो इसे ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों के प्रबंधन के लिए एक गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

ऊर्जा विभाग की ओर से इस नोटिफिकेशन में देरी के क्या कारण हैं, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी के चयन में देरी हो रही है या फिर किसी अन्य प्रशासनिक कारणों से नोटिफिकेशन जारी करने में रुकावट आ रही है। हालांकि, कर्मचारियों का मानना है कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा उन्हें अपने करियर और भविष्य की अनिश्चितता के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

अब देखना यह होगा कि क्या ऊर्जा विभाग कर्मचारियों की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए पांच अक्टूबर की समय सीमा से पहले परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी करता है या नहीं। यदि ऐसा नहीं होता है, तो दिवाली से पहले बिजली क्षेत्र में बड़ा आंदोलन होना तय माना जा रहा है, जिसका सीधा असर प्रदेश की बिजली व्यवस्था और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही ऊर्जा विभाग या सरकार की तरफ से कोई अपडेट आएगा, उसकी जानकारी दी जाएगी।