मेरठ3 मिनट पहले
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प्रवचन के दौरान भक्तों ने पूर्ण आनंद लिया।
सरधना स्थित सौरभ सागर संत निकेतन में श्री जिनेन्द्र महार्चना का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गणाचार्य श्री पुष्पदन्त सागर जी के शिष्य आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज का विशेष सान्निध्य प्राप्त हुआ।
श्री नवग्रह जिनदेव विधान के दौरान जिनेन्द्र भगवान की आराधना की गई। इस अवसर पर सौधर्म इंद्र का स्वरूप सुरेंद्र जैन और आशीष जैन परिवार को मिला। साथ ही सुकमाल जैन, निखिल जैन और प्रदीप जैन को भी इंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सभी मांगलिक क्रियाएं पंडित संदीप जैन ‘सजल’ ने संपन्न कराईं।

कथा के दौरान बच्चे भी मौजूद रहे।
धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य सौरभ सागर जी ने क्रोध और क्षमा पर महत्वपूर्ण प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि क्रोध अग्नि के समान है और क्षमा जल के समान। क्षमा रूपी जल क्रोध की अग्नि को शांत कर देता है। उन्होंने बताया कि जिस तरह कड़वी नीम मुख का स्वाद बिगाड़ देती है, उसी तरह क्रोध जीवन को नष्ट कर देता है।
आचार्य जी ने समझाया कि मनुष्य के शरीर में क्रोध ऐसे ही भरा है जैसे रक्त। छोटी सी विपरीत बात पर क्रोध उभर आता है। यह क्रोध रूपी आंधी दया, ज्ञान और मित्रता के दीपक को बुझा देती है। क्रोध एक क्षणिक पागलपन है जो आत्मा को मलिन करता है।
कार्यक्रम में सरधना के सी.ओ. संजय कुमार जायसवाल ने भी आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।