राजगढ़: वनकर्मियों पर कार चढ़ाने और गश्ती वाहन को टक्कर मारने का प्रयास, लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त; आरोपी फरार

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में वन विभाग की टीम पर जानलेवा हमले का एक गंभीर मामला सामने आया है। माचलपुर-गोघटपुर मार्ग पर गुरुवार देर रात अवैध रूप से लकड़ी परिवहन कर रहे तस्करों ने वनकर्मियों को कुचलने और उनके सरकारी गश्ती वाहन को टक्कर मारने का प्रयास किया। इस घटना का वीडियो शुक्रवार सुबह सामने आने के बाद वन महकमे और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वन टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर कार और लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर लिया है, जबकि हमलावर आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहे। इस संबंध में वन अपराध दर्ज कर लिया गया है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
वन विभाग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह पूरी घटना गुरुवार रात लगभग 11:30 बजे की है। जिला वन अधिकारी (डीएफओ) वैणी प्रसाद दोतानीय के निर्देश पर वन विभाग की एक चार सदस्यीय टीम क्षेत्र में नियमित रात्रि गश्त पर थी। टीम में वनपाल राजू गुर्जर, वनरक्षक भानु प्रताप सिंह, वनरक्षक हेमराज कुशवाहा और वाहन चालक रामबाबू गुर्जर शामिल थे। माचलपुर-गोघटपुर मार्ग पर गश्त के दौरान टीम को संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। वहां एक ट्रैक्टर-ट्रॉली लकड़ी से भरी हुई थी और उसके साथ एक कार भी चल रही थी। शक होने पर वनकर्मियों ने दोनों वाहनों को रोकने का इशारा किया और जांच के लिए रुकने को कहा, लेकिन वाहन चालकों ने रुकने के बजाय तेज रफ्तार से राजस्थान की सीमा की ओर भागना शुरू कर दिया।
जब वन टीम ने संदिग्ध वाहनों का पीछा किया, तो कार चालक ने अत्यंत खतरनाक तरीके से अपनी गाड़ी को वनकर्मियों की दिशा में दौड़ा दिया। यह हमला इतना अचानक और तीव्र था कि टीम के सदस्यों को अपनी जान बचाने के लिए सड़क से हटना पड़ा। इसके बाद भी आरोपी नहीं रुका। उसने कार को दोबारा मोड़ा और इस बार सीधे वन विभाग के गश्ती वाहन को टक्कर मारने का प्रयास किया। इस दूसरे हमले में भी सौभाग्य से कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह स्पष्ट रूप से सरकारी कर्मचारियों पर जानलेवा हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का प्रयास था। वन टीम ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए राजस्थान सीमा में प्रवेश करने से पहले ही ट्रैक्टर-ट्रॉली और कार को रोककर जब्त कर लिया।
जब्त किए गए दोनों वाहनों को सुरक्षा कारणों से माचलपुर थाना परिसर में खड़ा करवाया गया है। वन विभाग ने इस मामले में वन अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत वन अपराध दर्ज किया है। हालांकि, हमला करने वाले कार चालक और ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक सहित सभी आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। विभाग अब जब्त की गई लकड़ी के स्रोत, उसकी मात्रा और इसे ले जाने वालों की पहचान जुटाने में लगा हुआ है।
वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि माचलपुर क्षेत्र भौगोलिक रूप से राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है। पिछले कुछ समय से यह शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं कि राजस्थान के रायपुर क्षेत्र से लोग माचलपुर इलाके में प्रवेश कर पेड़ों की अवैध कटाई करते हैं और लकड़ी को राजस्थान ले जाते हैं। गुरुवार रात की यह घटना इसी अवैध नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होती है, जिसमें तस्करों ने पकड़े जाने के डर से वनकर्मियों पर हमला करने तक की हिम्मत की। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण ऐसे मामलों में निगरानी और कार्रवाई की चुनौतियां बढ़ जाती हैं, क्योंकि आरोपी राज्य की सीमा पार करके छिपने का प्रयास करते हैं।
यह घटना वनकर्मियों की सुरक्षा और अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में आने वाली कठिनाइयों को रेखांकित करती है। डीएफओ वैणी प्रसाद दोतानीय के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में शामिल चारों सदस्यों ने बिना किसी हथियार या भारी सुरक्षा बल के केवल अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पण से इस जब्ती को अंजाम दिया। वर्तमान में वन विभाग और माचलपुर पुलिस संयुक्त रूप से फरार आरोपियों की तलाश कर रहे हैं। जब्त लकड़ी की कीमत और प्रकार की पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह एक संगठित तस्करी का मामला हो सकता है। विभाग ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी मिले तो वे तत्काल वन विभाग या पुलिस को सूचित करें, ताकि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।




