Thursday, April 3, 2025
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राजस्थान के मंदिर में पूजन के लिए 16-साल की वेटिंग: शारदीय नवरात्र के लिए 27 साल बाद नंबर आएगा; दावा- पहाड़ चीरकर निकली थीं महिषासुर मर्दिनी – Jodhpur News


जोधपुर का 3 हजार साल पुराना सच्चियाय माता मंदिर। यहां मां महिषासुर मर्दिनी के रूप में स्थापित हैं। एक कन्या के हठ (जिद) पर मां पहाड़ी चीरकर भयंकर गर्जना के साथ प्रकट हुई थीं। ग्रामीण डरे तो मां यथा स्वरूप में यही बस गईं। नवरात्र में यहां राजस्थान से ह

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मंदिर के पुजारी बताते हैं कि चैत्र नवरात्र में यहां पूजन करने के लिए यजमान बनने के लिए 16 साल की वेटिंग चल रही है। वहीं शारदीय नवरात्र में पूजन के लिए 27 साल की वेटिंग चल रही है।

दैनिक भास्कर में पढ़िए सच्चियाय माता के मंदिर से जुड़ी मान्यता और इतिहास

शहर से लगभग 78 किमी दूर स्थित इस मंदिर में हर साल मेला भरता है। मंदिर के वरिष्ठ पुजारी विमल शर्मा बताते हैं- चैत्र नवरात्र की पूजा के लिए यजमान बनने के लिए अभी बुकिंग कराने वालों का नंबर 16 साल बाद आएगा। ऐसे में, आसोज (शारदीय) नवरात्र के लिए 27 साल तक की बुकिंग पहले ही हो चुकी है।

ट्रस्ट में जमा कराने होते हैं साढ़े 6 लाख

पुजारी विवेक शर्मा के अनुसार, बुकिंग के लिए इच्छुक यजमान को ट्रस्ट में 6 लाख 50 हजार रुपए जमा करवाकर इसकी रसीद लेनी होती है। उसी दिन प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) देखकर उन्हें उनके नंबर के लिए आने वाले साल और तारीख के बारे में बता दिया जाता है। आने वाले वर्ष व तारीखों के बारे में बता दिया जाता है। जिस श्रद्धालु का नंबर होता है, वही नवरात्र के दौरान नियमित पूजा-अभिषेक से लेकर अष्टमी के यज्ञ तक के मुख्य यजमान के रूप में पूजा इत्यादि करते हैं। यह सूची लगातार बढ़ती जा रही है।

तस्वीरों में देखिए नवरात्र का माहौल…

सच्चियाय माता मंदिर में पूजन के लिए यजमान बनने के लिए लंबी वेटिंग चल रही है।

जोधपुर के सच्चियाय माता मंदिर में श्रद्धालु देश-विदेश से मन्नत लेकर आते हैं। खासकर नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं।

जोधपुर के सच्चियाय माता मंदिर में श्रद्धालु देश-विदेश से मन्नत लेकर आते हैं। खासकर नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं।

3 हजार साल पुराना सच्चियाय माता मंदिर नागर शैली में बना है।

3 हजार साल पुराना सच्चियाय माता मंदिर नागर शैली में बना है।

3 हजार साल पहले राजा ने करवाया था निर्माण मान्यता है कि तकरीबन 3 हजार साल पुराने नागर शैली में बने इस मंदिर का निर्माण तत्कालीन राजा उप्पलदेव ने 8वीं सदी में कराया था। इसके लिए ओसियां के दक्षिण में स्थित नवलखा तालाब की खुदाई में मिली लाखों स्वर्ण मुद्दाएं खर्च की गई थी। 151 सीढ़ियों वाले इस मंदिर परिसर में चारों ओर नौ देवियों के मंदिर हैं। जिनकी नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना व अभिषेक किया जाता है। बताया जाता है कि सच्चियाय माता के सामने अखंड ज्योत सदियों से प्रज्ज्वलित है।

मां के छठे स्वरूप का होता है पूजन मंदिर के पुजारी विमल शर्मा ने बताया- सच्चियाय माता नवदुर्गा के छठे कात्यायनी का स्वरूप हैं। यहां की पूजा पद्धति दुर्गा सप्तशती के अनुसार की जाती है। इसमें सभी रीति रिवाज भी हिंदू धर्म की परंपराओं पर आधारित हैं। यहां 6 महीने तक सुबह 8:30 बजे और अगले 6 महीने सुबह 9 बजे आरती की जाती है। इससे पहले सुबह 6 बजे यजमान या पुजारी अभिषेक करते हैं। इसमें 2 घंटे का समय लगता है।

आरती के बाद 56 भोग या नियमित खीर-पूरी का भोग लगाया जाता है। सायंकालीन आरती सूर्यास्त के 20 मिनट बाद आरती और मंदिर मंगल का समय सूर्यास्त से एक घंटे बाद का रहता है। यहां पूजा के लिए सेवग ब्राह्मण पुजारियों के 80 परिवार हैं, जिनका 15-15 दिन के लिए नंबर आता है।

जोधपुर से करीब 78KM दूर स्थित ओसियां में स्थित यह मंदिर लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।

जोधपुर से करीब 78KM दूर स्थित ओसियां में स्थित यह मंदिर लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।

मां को बिजनेस में हिस्सेदार बनाते हैं व्यापारी ट्रस्टी राजू शर्मा ने बताया- सच्चियाय माता हिंदू समाज की कई जातियों की कुलदेवी हैं। साथ ही साथ जैन (ओसवाल) समाज की कुलदेवी भी हैं। ओसवाल समाज के तकरीबन 1500 गौत्र में से एक हजार की कुलदेवी मानकर अपने परिवार के बच्चों के झड़ूला, विवाह के बाद परिक्रमा करने, व्यापार में एक निश्चित हिस्सा सच्चियाय माता के नाम रखने सहित अन्य कार्यक्रम भी यहीं करने आते हैं।

नवरात्र शुरू हो चुका है। सुबह से शाम तक मां के दर्शनों के लिए भक्त पहुंच रहे हैं।

नवरात्र शुरू हो चुका है। सुबह से शाम तक मां के दर्शनों के लिए भक्त पहुंच रहे हैं।

पहाड़ी को चीरकर गर्जना के साथ निकली थी मां ट्रस्टी राजू शर्मा मंदिर के इतिहास के बारे में बताते हुए कहते हैं- मान्यता है कि महिषासुर मर्दिनी स्वरूप सच्चियाय माता की प्रतिमा यहां पहाड़ी पर प्रकट हुई थीं। श्याम रंग की प्रतिमा के चार हाथ हैं, जिनमें तलवार, त्रिशूल, ढाल और मां, महिषासुर के बाल पकड़े हुए हैं। इस मंदिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि जैसलमेर की एक बालिका, जिसका देवी के दर्शन करने के बाद ही अन्न ग्रहण करने का नियम था। बालिका का विवाह ओसियां में हो गया ,अब यहां मां के दर्शनों का संकट खड़ा हुआ। उस समय यहां कोई देवी का मंदिर नहीं था। इस दौरान उस कन्या ने प्रण लिया कि देवी दर्शन देंगी, अब तभी अन्न-जल ग्रहण करुंगी।

राजू शर्मा बताते हैं- उसी रात देवी उस कन्या के स्वप्न में आई और कहा- ओसियां की पूर्व दिशा में पहाड़ी पर 15 दिन बाद पहुंच जाना, वहां दर्शन दूंगी। देवी के बताए अनुसार वो बालिका वहां पहुंची। इसी दौरान भयंकर गर्जना के साथ पहाड़ी को चीरकर देवी प्रकट हुई। इससे अनजान गांव के दूसरे लोग इस भयंकर गर्जना को सुनकर भागने लगे। ऐसे में देवी उसी स्थिति में ठहर गईं और यहां स्थापित हो गईं।

500 कमरों का गेस्ट हाउस और भोजनालय भी ट्रस्ट के सचिव गिरधारी लाल डागा के अनुसार – मंदिर की तमाम व्यवस्थाएं श्री सच्चियाय माता मंदिर ट्रस्ट द्वारा की जाती है। 1976 में पुजारी जुगराज शर्मा के मार्गदर्शन में गठित इस ट्रस्ट में 130 आजीवन सदस्य और 12 सदस्यीय कार्यकारी (ट्रस्ट) मंडल है।

नवरात्र में आते हैं लाखों श्रद्धालु मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा के अनुसार सामान्य दिनों में यहां रोजाना औसतन डेढ़ से दो हजार श्रद्धालु दर्शनार्थ आते हैं। लेकिन, नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या 12-15 हजार से शुरू होकर अष्टमी और नवमी तक प्रतिदिन 1 से डेढ़ लाख तक पहुंच जाती है। पूरे परिसर में स्थायी लाइन के इंतजाम हैं। उन्होंने कहा- यह इकलौता मंदिर है, जहां वीवीआईपी के लिए भी न तो कोई अलग से व्यवस्था है, न ही प्रवेश का ही कोई अलग द्वार है।



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