छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में राजस्व विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। गुरूर ब्लॉक के ग्राम पलारी और भीराई के साल 2015-16 से राजस्व रिकॉर्ड गायब है। रिकॉर्ड नहीं मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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इससे नामांतरण पंजी न होने से जमीन संबंधी दस्तावेजों में बदलाव और स्वामित्व के प्रमाण में दिक्कतें आ रही हैं। सूचना के अधिकार के तहत जब किसानों ने इन रिकॉर्ड के अवलोकन की मांग की गई, तो तहसीलदार हनुमंत श्याम ने कहा कि जो रिकॉर्ड उनके पास नहीं है, उसका अवलोकन वे कैसे करा सकते हैं।
किसानों का कहना है कि इस गंभीर मामले में अपराध दर्ज होना चाहिए था। लेकिन राजस्व विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। कलेक्टर ने मामले को संज्ञान में लेते हुए अपर कलेक्टर को जांच का जिम्मा सौंपा है।
ये है पूरा मामला
बता दें कि जिले के गुरूर ब्लॉक के पटवारी हल्का नंबर 4 के दो गांव जिसमें ग्राम पलारी और भिराई शामिल हैं, यहां 10 सालों से नामांतरण की पंजी गायब हो चुकी है और उसे तत्कालीन समय के पटवारी ने बिना पणजी के ही अपना चार्ज छोड़ दिया था। वहीं अब नए पटवारी वहां पहुंचे हैं उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यदि किसानों को उसे समय के राजस्व रिकॉर्ड निकालने हैं जमीन दुरुस्त करना है तो वह इस काम को नहीं कर पाएंगे और इसका नाम ऑन को लेकर राजस्व विभाग में उदासीनता स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है।

रिकॉर्ड दुरुस्त करने होगी दिक्कत
पटवारी लीलाधर साहू ने बताया कि साल 2015-16 के रिकॉर्ड हमारे पास उपलब्ध नहीं है। कई किसान इस विषय को लेकर काफी परेशान है। जिसके कारण मुझे भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जब तक राजस्व के उसे रिकॉर्ड को ऑनलाइन नहीं चढ़ाया जाएगा तब तक कोई जमीन दुरुस्त नहीं किया जा सकता और ना ही कोई रिकॉर्ड सर्च किया जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग के लिए रिकॉर्ड काफी आवश्यकता होती है और मुझे नहीं पता कि यहां रिकॉर्ड कब से गायब है। तत्कालीन पटवारी का मामलायह मामला तत्कालीन पटवारी दिलीप सिन्हा के समय का मामला है।
ज्वॉइनिंग लेने वाले पटवारी शांतिलाल साहू ने बताया कि उसने मुझे पंजी नहीं दिया था और पणजी दिलीप सिन्हा के पास ही था। वहीं दिलीप सिन्हा ने कहा कि मैने तहसीलदार को नामांतरण पंजी के संदर्भ में पूरी जानकारी दे दी है।