Friday, March 28, 2025
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रेल्वे ने तोड़े अवैध मकान, बेघर हुए 30-40 परिवार: मुंह में गमछा-पट्टी बांधकर कब्जा करने पहुंचे, अधिकारियों ने समझाया तो वापस लौटे – Korba News


कोरबा शहर के घंटाघर स्थित हेलीपैड नर्सरी में अवैध कब्जे का मामला सामने आया है।

कोरबा शहर के घंटाघर स्थित हेलीपैड नर्सरी के पास अवैध रूप से रह रहे 30-40 मकानों को रेल्वे ने तोड़ दिया है। जिसके बाद प्रभावित परिवार के लोग मुंह में गमछा पट्टी बांधकर कब्जा करने पहुंचे।

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यह क्षेत्र ऑक्सीजन जोन के रूप में जाना जाता है। कब्जाधारियों का कहना था कि वे के निवासी हैं। रेलवे ने उनके मकान तोड़ दिए हैं। उन्हें कोई पुनर्वास या रहने की व्यवस्था नहीं दी गई है। इसलिए वे यहां कब्जा करने आए हैं।

नगर निगम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अवैध कब्जाधारियों को समझाया और कार्रवाई की बात कही जिसके बाद वे वापस लौट गए।

घंटाघर स्थित हेलीपैड नर्सरी में कुछ लोग कब्जा करने पहुंच गए

सूचना के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारी

वार्ड पार्षद की पति शैलेंद्र सिंह पपी को जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत नगर निगम और SECL प्रबंधन को सूचित किया। शुक्रवार (21 मार्च) को मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि

कुछ लोग यहां कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।

समझाने के बाद वापस लौटे कब्जाधारी

नगर निगम के अधिकारियों ने कब्जाधारियों को बताया कि यह ऑक्सीजन जोन है। अगर उन्हें मकान चाहिए तो दादर में बनी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में फॉर्म भरकर आवास प्राप्त कर सकते हैं। कार्रवाई की बात सुनकर सभी लोग वहां से चले गए।

कोरबा शहर के घंटाघर स्थित हेलीपैड नर्सरी में अवैध मकान बनाए गए

कोरबा शहर के घंटाघर स्थित हेलीपैड नर्सरी में अवैध मकान बनाए गए

रेल्वे ने जमीन अधिग्रहण की

जानकारी के मुताबिक, कुछ साल पहले रेल्वे ने फूट ओवर ब्रिज बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण किया। जिससे अवैध रूप से रह रहे 30-40 परिवारों का घर तोड़ा गया था। रेल्वे में जमीन देने का कोई नियम नहीं है, जिससे उन्हें पूर्ण रूप से हटा दिया गया।

बेघर हुए लोगों ने कुछ माह पहले उसी जगह पर कब्जा कर घर बना लिया था लेकिन बाद में उसे भी हटा दिया गया। 21 मार्च को एक बार फिर वे कब्जा करने पहुंच गए। वर्तमान में कब्जाधारी संजय नगर फाटक के पास रह रहे है।

खतरे में ऑक्सीजन जोन

शैलेंद्र सिंह ने बताया कि वे पहले भी पार्षद थे और अब उनकी पत्नी पार्षद चुनी गई हैं। इस नर्सरी और जंगल को बचाने के लिए उन्होंने पहले भी आंदोलन किया था।

तब भी अवैध कब्जाधारियों को हटाया गया था। अगर यहां कब्जा होता है तो सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों के साथ पूरा ऑक्सीजन जोन खतरे में पड़ जाएगा।



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