छत्तीसगढ़ सरकार ने साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पद पर शशांक शर्मा की नियुक्ति कर दी है। पहले जारी आदेश में उन्हें छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन अब उस आदेश को संशोधित कर उन्हें साहित्य अकादमी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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बता दें कि शशांक शर्मा हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक भी रह चुके हैं। हाल ही में सरकार ने 36 निगम-मंडलों के अध्यक्षों की सूची जारी की थी, जिसमें शशांक शर्मा का नाम छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के अध्यक्ष के रूप में शामिल था।
लेकिन परिषद के अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री होते हैं, और इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है, इसलिए अब उनका आदेश संशोधित कर साहित्य अकादमी का अध्यक्ष बनाया गया है।
संस्कृति परिषद के अध्यक्ष तो मुख्यमंत्री हैं।
शर्मा को संस्कृति परिषद का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार विनोद वर्मा ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा—
संस्कृति परिषद के अध्यक्ष तो मुख्यमंत्री हैं। वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के अध्यक्ष के रूप में शशांक शर्मा की नियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं थी। परिषद की अधिसूचना के मुताबिक, इसके पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री और पदेन उपाध्यक्ष संस्कृति मंत्री होते हैं। ऐसे में अगर शशांक शर्मा को अध्यक्ष नियुक्त करना था, तो पहले परिषद का पुनर्गठन कर अधिसूचना में संशोधन करना जरूरी होता।

वर्मा ने सोशल मीडिया पोस्ट किया था।
उन्होंने इसे एक प्रशासनिक चूक बताया जिसे तत्काल सुधारने की जरूरत थी।
वर्मा ने यह भी कहा कि परिषद के तहत साहित्य अकादमी, आदिवासी लोककला अकादमी और कला अकादमी जैसी तीन प्रमुख संस्थाएं गठित की गई थीं। इन अकादमियों में अध्यक्ष या निदेशक नियुक्त किए जाने हैं। साथ ही परिषद में कुल 9 सदस्य होने चाहिए, जिनमें प्रतिष्ठित विद्वजनों को नामित किया जाना है। इसके अलावा परिषद में बख्शी पीठ और श्रीकांत वर्मा पीठ जैसी संस्थाएं भी शामिल हैं।
विनोद वर्मा ने सुझाव दिया कि पहले परिषद के सदस्यों का चयन किया जाना चाहिए, फिर अकादमियों और पीठों में नियुक्तियाँ की जानी चाहिए।