सड़क दुर्घटना के एक मामले में इंदौर जिला न्यायालय ने लकवाग्रस्त किसान जितेंद्र मीणा (36) निवासी भीकनगांव को 50 लाख रुपए क्लेम और ब्याज सहित 60 लाख रुपए देने के आदेश ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को दिए हैं। कोर्ट ने माना है कि किसान को अब ताउम्र एक अटेंडर
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घटना 3 नवंबर 2022 की है। जितेंद्र मीणा अपने रिश्तेदारों के साथ तूफान वाहन से खाटू श्याम के दर्शन करने राजस्थान जा रहे थे। तभी पीछे से तेज रफ्तार से आ रहे ट्रक ने जावरा चौपाटी के पास उनके वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। इसमें पीछे बैठे जितेंद्र के सिर, सीने, पीठ, कमर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल जावरा के अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें इंदौर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में रेफर किया गया।
इंदौर में उनकी कई जांचें हुईं। जिनसे पता चला कि उनकी गर्दन से कूल्हे तक की स्पाइनल कार्ट (रीढ़ की हड्डी) में मल्टीपल फैक्चर्स हैं। उनके कमर के नीचे का पूरा हिस्सा संवेदनहीन हो गया है। इस कारण उस हिस्से में कोई मूवमेंट नहीं रहा। उन्हें चलने-फिरने, उठने-बैठने, करवट लेने, सोने सहित कई प्रकार की परेशानियां हो गईं। इसके साथ ही वे पूरी तरह बेड पर ही हो गए। उन्हें हर काम के लिए अटेंडर पर निर्भर होना पड़ा। जितेंद्र पर आश्रित परिवार में पत्नी पुष्पा, दो बच्चे और बुजुर्ग मां हैं। पति की ऐसी हालत के चलते उनकी पत्नी पुष्पा ने 21 दिसंबर 2022 को अपने एडवोकेट गोविंद आर. मीणा के माध्यम से जिला कोर्ट में क्लेम केस लगाया। इसमें ट्रक ड्राइवर श्यामलाल बंजारा, ट्रक मालिक गोपाल तेली निवासी चित्तौड़गढ़ और ट्रक की इंश्योरेंस कंपनी से 2 करोड़ रुपए क्लेम दिलवाने की अपील की गई। इसमें पति की हालत को लेकर तर्क दिए गए। कोर्ट में दो साल तक सुनवाई चली। जिसमें ट्रक चालक की लापरवाही प्रमाणित हुई।
व्हील चेयर पर भी अटेंडर के भरोसे हैं जितेंद्र।
कोर्ट में दिए गए तर्क
- पति मिर्च और कपास की खेती से हर साल 5 लाख और नौकरी के माध्यम से 2 लाख रुपए की आय प्राप्त करते थे जिससे परिवार का गुजारा होता था।
- दुर्घटना में उनके शरीर का आधा हिस्सा लकवाग्रस्त तो हुआ ही, ब्रेन में क्लॉट जमने से उनकी याददाश्त काफी कम हो गई है।
- उनके लिए 9 हजार रुपए प्रतिमाह पर अटेंडर रखना पड़ा। अब उन्हें जिंदगीभर एक अटेंडर की जरूरत रहेगी।
- करीब एक माह तक वे अस्पताल में एडमिट रहे जिसमें 10 लाख रुपए खर्च हो गए।
सुनवाई के मजबूत तथ्य
- यह भी प्रमाणित हुआ कि शरीर पर आई घातक चोटें दुर्घटना के कारण ही आई हैं।
- इलाज करने वाले डॉक्टर और मेडिकल बोर्ड ने प्रमाणित किया कि जितेंद्र 80% स्थाई रूप से अपाहिज हो चुके हैं।
- यह भी साबित हुआ कि जितेंद्र खाटू श्याम के दर्शन करने राजस्थान जा रहे थे।
- इश्योरेंस कंपनी की आपत्ति यह थी कि दुर्घटना 3 नवंबर 2022 को हुई थी लेकिन रिपोर्ट 4 नवंबर 2022 को दर्ज कराई ताकि मुआवजे के लिए केस मजबूत बनाया जा सके। इस पर जितेंद्र के एडवोकेट की ओर से तर्क दिया गया कि घायल को पहले इलाज कराना जरूरी था। साथ ही न्याय दृष्टांत अन्य केसों का जिक्र किया गया। इस पर कोर्ट ने इसे सही माना।
- जितेंद्र की आय के संबंध में कोई प्रमाणपत्र पेश नहीं करने पर बीमा कंपनी ने आपत्ति ली। ऐसे केस में जितेंद्र की ओर से एडवोकेट कलेक्टर की गाइड लाइन का आधार लिया गया। इसमें जितेंद्र को अकुशल श्रमिक मानते हुए उनकी आय 9325 रुपए प्रति माह मान्य की गई।
कोर्ट ने अलग-अलग मदों में ऐसे मंजूर किए 50 लाख रु.
- सुनवाई के बाद कोर्ट ने जितेंद्र की प्रति माह की आय 9325 रुपए मानी। इसके साथ ही भविष्य में उनकी कुल आय 18.79 लाख रुपए मंजूर की।
- साथ ही उन्हें पौष्टिक आहार के लिए 25 हजार रुपए मंजूर किए।
- चूंकि जितेंद्र नियमित काम करने में अक्षम हैं इसलिए उन्हें अटेंडर (सहायक) के लिए 12.64 लाख रुपए देने का आदेश दिया।
- ऐसे ही दर्द और पीड़ा सहन करने के मामले में 8 लाख रुपए मंजूर किए।
- इसके साथ ही आवागमन के लिए 10 हजार रुपए देने को कहा।
- इस तरह कोर्ट ने 49.83 लाख रुपए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को देने का आदेश दिया। यह राशि 6% ब्याज सहित 60 लाख रुपए होती है,जो देने का आदेश दिया।
मेरे और परिवार के लिए जिंदगीभर की पीड़ा सुनवाई के दौरान परिवार के लोग तीन बार जितेंद्र को व्हील चेयर पर कोर्ट में लाए। स्वयं कोर्ट ने उनकी हालत देखी। जितेंद्र ने बयान दिए कि वह अब पूरी तरह बेड पर है। अटेंडर के सहारे ही उन्हें व्हील चेयर पर बैठाया जाता है। जितेंद्र ने बताया कि कोर्ट का फैसला राहतभरा है। इससे परिवार को मदद मिलेगी। मेरे दोनों बच्चे अभी पढ़ रहे हैं। पत्नी, बच्चे और मां मेरी हालत देखकर दुखी हैं। मेरे और परिवार की हंसती-खेलती जिंदगी में ताउम्र अपाहिज होने का गम जरूर सालता रहेगा। ज्यादा राशि के लिए हाई कोर्ट में करेंगे अपील

गोविंद आर. मीणा, सीनियर एडवोकेट
एडवोकेट गोविंद आर. मीणा ने बताया कि केस में इलाज करने वाले और मेडिकल बोर्ड के डॉक्टर, एक प्रत्यक्षदर्शी, दो अटेंडर और खुद पीड़ित जितेंद्र के बयान ठोस आधार रहे। केस में जितेंद्र को और ज्यादा मुआवजा दिलवाने के लिए अब हाईकोर्ट में अपील करेंगे।