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सतना: 18 महीने बाद भी 30 करोड़ का अमृत प्रोजेक्ट अधूरा, जियो मिलर कंपनी का अनुबंध निरस्त; ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव शासन को भेजा

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मध्य प्रदेश के सतना शहर में पेयजल व्यवस्था और नगर निगम की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में बरती गई गंभीर लापरवाही के मामले में सतना नगर निगम ने दो ठेकेदार कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम कमिश्नर डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा ने शहरवासियों को अशुद्ध पानी की आपूर्ति करने के आरोप में कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही, अमृत परियोजना के तहत लगभग 30 करोड़ रुपये का काम अधूरा छोड़ने वाली जियो मिलर एंड कंपनी का अनुबंध भी रद्द कर दिया गया है। निगम प्रशासन ने जियो मिलर एंड कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का औपचारिक प्रस्ताव राज्य शासन को भेज दिया है। इन दोनों कंपनियों के अनुबंध समाप्त होने के बाद अब शहर के फिल्टर प्लांटों के संचालन की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम स्वयं अपने स्तर पर संभालेगा। यह निर्णय शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी पर कार्रवाई का विवरण

नगर निगम के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी को अक्टूबर 2025 में शहर के 18 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) और 40 एमएलडी क्षमता वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कंपनी ने 1 अक्टूबर 2025 से आधिकारिक तौर पर इन प्लांटों का संचालन शुरू किया था। हालांकि, संचालन शुरू होने के कुछ ही समय बाद शहर के विभिन्न इलाकों से निगम के पास लगातार शिकायतें पहुंचनी शुरू हो गईं कि नलों के माध्यम से गंदा और बदबूदार पानी की आपूर्ति की जा रही है।

निगम प्रशासन ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कंपनी को कई बार निर्देश दिए और पानी की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए कहा। लेकिन निगम द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ। निगम की ओर से कराई गई जांच में यह बात सामने आई कि कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के उचित संचालन के लिए पर्याप्त अनुभवी कर्मचारी मौजूद नहीं थे। इसके अलावा, पानी को शुद्ध करने के लिए आवश्यक रसायन भी कंपनी द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए थे। जांच में यह भी पाया गया कि प्लांट की मशीनरी में खराबी थी, जिसके कारण जलापूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। जनहित को ध्यान में रखते हुए और इन गंभीर लापरवाहियों के चलते नगर निगम ने 1 अक्टूबर को ही कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया।

अमृत परियोजना में 18 महीने की देरी और अनियमितताएं

सतना नगर निगम ने दूसरी बड़ी कार्रवाई जियो मिलर एंड कंपनी के खिलाफ की है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत परियोजना के तहत सतना शहर में पेयजल पाइपलाइन विस्तार और चार उच्चस्तरीय जल टंकियों के निर्माण का कार्य इस कंपनी को सौंपा गया था। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 30 करोड़ रुपये थी।

निगम के दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी के साथ हुए अनुबंध की शर्तों के मुताबिक यह काम 21 दिसंबर 2023 तक पूर्ण किया जाना था। हालांकि, जियो मिलर एंड कंपनी के अनुरोध पर निगम ने समय सीमा में तीन महीने की वृद्धि करते हुए काम पूरा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2024 निर्धारित कर दी थी। लेकिन विस्तारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी करीब 18 महीने बीत चुके हैं और यह परियोजना अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।

निगम प्रशासन ने कंपनी द्वारा किए गए काम में कई गंभीर कमियां दर्ज की हैं। निगम के अनुसार, शहर में पाइपलाइन बिछाने के बाद कई स्थानों पर सड़कों का ठीक से रेस्टोरेशन (पुनर्निर्माण) नहीं किया गया, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, बिछाई गई पाइपलाइनों की मानक परीक्षण (टेस्टिंग) प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। परियोजना के तहत जो मोटर-पंप लगाए गए थे, उन्हें भी अभी तक शुरू नहीं किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रोजेक्ट के तहत बनने वाली चारों उच्चस्तरीय टंकियों का निर्माण कार्य भी अधूरा ही छोड़ दिया गया है।

कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं, ब्लैकलिस्ट का प्रस्ताव

इन सभी अनियमितताओं और देरी को देखते हुए सतना नगर निगम प्रशासन ने 25 सितंबर को जियो मिलर एंड कंपनी को एक औपचारिक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। निगम ने कंपनी से तय समय सीमा के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। लेकिन निगम के अनुसार, निर्धारित समय सीमा समाप्त होने तक कंपनी की ओर से नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया।

निगम ने बताया कि मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कंपनी ने सक्षम अधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना ही इस काम का कुछ हिस्सा किसी दूसरी फर्म को सौंप दिया था, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इन सभी तथ्यों, अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन और कंपनी की ओर से जवाब न देने की स्थिति को देखते हुए गुरुवार को नगर निगम ने जियो मिलर एंड कंपनी का अनुबंध पूरी तरह से समाप्त कर दिया। साथ ही, भविष्य में सरकारी कार्यों में इस कंपनी की भागीदारी रोकने के लिए इसे ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेज दिया गया है। अब निगम शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को खुद संभालेगा ताकि नागरिकों को शुद्ध पेयजल मिल सके।