मुमताज ने पिछले दो महीने से लगातार काम करके करीब 400 महावीरी पताका तैयार किया है।
जमशेदपुर के साकची में सांप्रदायिक एकता की अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। मुमताज आलम पिछले 18 वर्षों से रामनवमी पर महावीरी पताका तैयार कर रहे हैं। मुमताज ने यह कला अपने पिता से सीखी है। उनके पिता भी रामनवमी पर महावीरी पताका बनाया करते थे।
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साकची मार्केट में सभी धर्मों के लोग मिलजुल कर रहते हैं। रामनवमी के दौरान जब पूरा शहर भगवा रंग में रंग जाता है, तब मुमताज भी त्योहार की तैयारियों में जुट जाते हैं। मुमताज के बनाए झंडों में हनुमान जी की तस्वीर और जय श्रीराम के नारे होते हैं। इनमें रंग-बिरंगे डिजाइन और पारंपरिक धार्मिक प्रतीक भी शामिल रहते हैं।
चाईबासा की पूजा समिति के लिए 85 मीटर लंबा झंडा बनाया
इस बार मुमताज ने पिछले दो महीने से लगातार काम करके करीब 400 झंडे तैयार किए हैं। चाईबासा की पूजा समिति के लिए उन्होंने 85 मीटर लंबा झंडा बनाया है। 18 साल में पहली बार मुमताज ने इतना लंबा झंडा तैयार किया है। विभिन्न पूजा अखाड़ों से उन्हें झंडा तैयार करने के ऑर्डर मिलते हैं। साकची के साथ-साथ आसपास के कई इलाकों में भी उनके बनाए झंडे भेजे जाते हैं।
सेवा भाव और भाईचारे से बड़ा कोई धर्म नहीं: मुमताज
मुमताज कहते हैं कि यह उनके लिए सिर्फ काम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। वे इसे पूरे दिल से करते हैं। उनका मानना है कि सभी एक ही देश के लोग हैं और त्योहार की खुशियां सबकी होती हैं। उनके अनुसार सेवा भाव और भाईचारे से बड़ा कोई धर्म नहीं है।