सीहोर: मंडी ग्राउंड बना ‘योग की पाठशाला’, 84 वर्षीय चरण सिंह समेत वरिष्ठ नागरिक निशुल्क सीख रहे योग-प्राणायाम

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में बढ़ती उम्र के बावजूद स्वास्थ्य और शारीरिक सक्रियता को लेकर एक अनुकरणीय पहल सामने आई है। शहर के मंडी स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड अब ‘योग की पाठशाला’ के रूप में तब्दील हो चुका है, जहां प्रतिदिन प्रातः काल बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक, युवा और बच्चे एकत्रित होकर योग और प्राणायाम का अभ्यास करते हैं। यह स्थान न केवल शारीरिक स्वास्थ्य का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी जाना जाता है। विशेष बात यह है कि यहां योगाचार्य दिनेश शर्मा द्वारा सभी आयु वर्ग के लोगों को निशुल्क रूप से योग और प्राणायाम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे समाज के हर वर्ग को स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।
सीहोर के इस अनूठे समूह ‘योग की पाठशाला’ के सदस्य कपिल सूर्यवंशी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि योगाचार्य दिनेश शर्मा, जिनकी स्वयं की आयु 62 वर्ष है, बिना किसी शुल्क के लोगों को योग सिखा रहे हैं। उनका यह निस्वार्थ सेवाभाव स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ा आधार बना हुआ है। सुबह के समय जब ग्राउंड पर लोग पहुंचते हैं, तो वहां विभिन्न पीढ़ियों के लोग एक साथ योग मुद्राओं में लीन दिखाई देते हैं। यह दृश्य सीहोर शहर में स्वास्थ्य चेतना और अंतरपीढ़ीय सामंजस्य का एक सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है। ग्रुप के सदस्यों का स्पष्ट कहना है कि नियमित योग अभ्यास से उनकी दिनचर्या की शुरुआत ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ होती है, जो उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर सबल बनाए रखती है।
इस समूह में सबसे अधिक उम्र के सदस्य 84 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक चरण सिंह राजपूत हैं, जो अन्य सभी सदस्यों के लिए एक जीवंत मिसाल बने हुए हैं। अपनी चौथी दशक की आयु में भी वे प्रतिदिन नियमित रूप से योग करते हैं और पूरी ऊर्जा के साथ अभ्यास में शामिल होते हैं। उनकी सक्रियता यह संदेश देती है कि उम्र केवल एक संख्या है और यदि व्यक्ति दृढ़निश्चयी हो, तो वह किसी भी अवस्था में स्वस्थ रह सकता है। चरण सिंह राजपूत के अलावा, 70 वर्षीय मांगीलाल मालवीय, 64 वर्षीय राजेश खंडेलवाल और 62 वर्षीय राजकुमार राठौर सहित कई अन्य वरिष्ठ नागरिक भी इस समूह का अभिन्न अंग हैं। ये सभी बुजुर्ग नियमित योग के माध्यम से अपनी दिनचर्या में शारीरिक सक्रियता को बनाए हुए हैं और साबित कर रहे हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन भी उत्साह और स्वास्थ्य से परिपूर्ण हो सकता है।
‘योग की पाठशाला’ समूह की कार्यप्रणाली केवल शारीरिक व्यायाम और आसनों तक ही सीमित नहीं है। इस समूह से जुड़े सदस्य सामाजिक दायित्वों के प्रति भी सजग हैं और पर्यावरण संरक्षण तथा जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। सुबह योग के माध्यम से व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ-साथ, ये लोग सामुदायिक कल्याण और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए भी कार्य करते हैं। यह दोहरा दृष्टिकोण—स्वस्थ शरीर और स्वस्थ समाज—इस समूह की पहचान बन गया है। सदस्यों का मानना है कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि एक समग्र जीवन शैली है जिसमें व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सामाजिक उत्तरदायित्व दोनों का समावेश होता है।
सीहोर के मंडी ग्राउंड पर चल रही यह गतिविधि उस आम धारणा को चुनौती देती है कि वृद्धावस्था में शारीरिक गतिविधियां कम हो जानी चाहिए या असंभव हो जाती हैं। इसके विपरीत, यहाँ के वरिष्ठ नागरिक यह दर्शा रहे हैं कि अनुशासन और नियमितता से किसी भी उम्र में फिट रहा जा सकता है। योगाचार्य दिनेश शर्मा का निशुल्क प्रशिक्षण और चरण सिंह राजपूत जैसे बुजुर्गों का उत्साह, स्थानीय युवाओं और अन्य नागरिकों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। यह पहल न केवल प्रतिभागियों के स्वास्थ्य में सुधार ला रही है, बल्कि सीहोर शहर में एक स्वस्थ और जागरूक सामाजिक वातावरण के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ‘योग की पाठशाला’ का यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक व्यावहारिक और प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे सामुदायिक सहभागिता और निस्वार्थ सेवा के माध्यम से जनस्वास्थ्य और सामाजिक चेतना को एक साथ बढ़ाया जा सकता है।




