हिमाचल हाईकोर्ट में आज राज्यसभा चुनाव को चुनौती देने वाली अभिषेक मनु सिंघवी की याचिका पर सुनवाई होगी। इस केस में प्रतिवादी बनाए गए BJP के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन आज अदालत में अपना जवाब देंगे।
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बता दें कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने मुकाबला बराबरी पर छूटने के बाद पर्ची सिस्टम से विजय घोषित करने के नियम को हिमाचल हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है। आज इस केस में सुनवाई होनी है।
वहीं हर्ष महाजन ने कोर्ट में एक एप्लिकेशन डालकर इस केस को खत्म करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट अस्वीकार कर चुका है।
सिंघवी ने दायर की थी याचिका
अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्यसभा चुनाव में बराबर वोट मिलने पर पर्ची से एक को विजय घोषित करने के नियम को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि दो प्रत्याशी को बराबर-बराबर वोट मिलते हैं, उस सूरत में लॉटरी निकालने का जो फॉर्मूला है, वह गलत है।
पर्ची सिस्टम से चुनाव हारे थे सिंघवी
अभिषेक मनु सिंघवी के अनुसार, नियम की एक धारणा को उन्होंने याचिका में चुनौती दे रखी है। जब मुकाबला बराबरी पर होता है, उसके बाद पर्ची निकाली जाती है। जिसकी पर्ची निकलती है, उसे विनर डिक्लेयर होना चाहिए। मगर, अभी जिसकी पर्ची निकलती है, उसे हारा हुआ डिक्लेयर किया गया है। यह धारणा कानूनी रूप से गलत है। इसे सिंघवी ने चुनौती दी है।

एडवोकेट एवं हिमाचल से कांग्रेस के राज्यसभा प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी
राज्यसभा चुनाव में सिंघवी व महाजन को मिले थे बराबर वोट
बकौल सिंघवी पर्ची में जिसका नाम निकलता है, उसकी जीत होनी चाहिए। नियम में जिसने भी यह धारणा दी है, वो गलत है। कहा, एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है, लेकिन नियम में यह धारणा है। उसे चुनौती दी गई है।
यदि यह धारणा गलत है तो जो चुनाव हुए हैं, उसमे जो परिणाम घोषित हुआ है, वो भी गलत है। सिंघवी ने इलेक्शन को लीगल ग्राउंड पर चैलेंज किया है।
सिंघवी और महाजन को मिले थे 34-34 वोट
दरअसल, प्रदेश में बीते 27 फरवरी को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा के हर्ष महाजन को 34-34 वोट मिले थे। मुकाबला बराबर होने के बाद लॉटरी से हर्ष महाजन चुनाव जीत गए थे, क्योंकि पर्ची अभिषेक मनु सिंघवी की निकली थी।
इन चुनावों के बाद प्रदेश में सियासी उथल पुथल मची थी और कांग्रेस के 6 विधायकों समेत 3 निर्दलीय ने भी बीजेपी का दामन थामा था। इसके बाद स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए विधायकों को अयोग्य घोषित किया था और उनकी सीट पर उप चुनाव करवाए गए।