नवजात बच्चे को लेकर जिला अस्पताल में भर्ती हुई शबाना।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में प्रसव के बाद हिंदू और मुस्लिम मां का बच्चा बदल गया। 13 दिन बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। अब मुस्लिम मां शबाना ने जिला अस्पताल को बच्चा सौंप दिया है। उन्होंने बच्चे को अपने पास रखने से इनकार कर दिया है।
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शबाना के परिवार का कहना है कि अगर बच्चे को कुछ हो गया, तो जिम्मेदार कौन होगा। वो डीएनए टेस्ट के लिए भी तैयार हैं। साथ ही शबाना भी अस्पताल में भर्ती हो गई है। उनका कहना है कि जब तक उसे सही बच्चा नहीं मिल जाता है। वह अस्पताल में ही रहेंगी। वहीं हिंदू मां कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
परिजनों ने शबाना को बच्चे के साथ जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया है।
अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं
शबाना के परिजनों का कहना है कि, जिला प्रशासन मामले में लापरवाही बरत रहा है। घटना को इतने दिन हो गए हैं। अभी तक लापरवाह अधिकारी और कर्मचारी पर कार्रवाई तक नहीं हुई। ना ही उस महिला पर दबाव बनाया जा रहा है, जो बच्चा देने के लिए तैयार नहीं है।
शबाना के भाई आमिर खान और पिता ने कहा कि, वो लोग डीएनए टेस्ट के लिए तैयार हैं। पुलिस दोनों बच्चे के साथ परिवार को जिला अस्पताल बुलाए। दोनों बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया जाए। इसके बाद ही बच्चा उन्हें दिया जाए।

दुर्ग जिला अस्पताल का यह पूरा मामला है। यहीं से हिंदू और मुस्लिम परिवार का बच्चा बदल गया है।
अब जानिए क्या है पूरा मामला
दरअसल, 23 जनवरी 2024 को जिला अस्पताल के मदर चाइल्ड वार्ड में दोनों बच्चों का जन्म हुआ था। सिविल सर्जन डॉ. हेमंत साहू के मुताबिक, शबाना कुरैशी पति अल्ताफ कुरैशी ने दोपहर 1.25 बजे बेटे को जन्म दिया।
इसके बाद साधना सिंह ने भी दोपहर 1:32 बजे बेटे को जन्म दिया। दोनों बच्चे का जन्म 7 मिनट के अंतर में हुआ। जिला अस्पताल में नवजात शिशुओं की पहचान के लिए जन्म के तुरंत बाद उनके हाथ में मां के नाम का टैग पहनाया गया। दोनों प्रसूताओं की बच्चे के साथ फोटो खींची गई।
बताया जा रहा है कि बच्चों को नहलाने के बाद शबाना का बच्चा साधना और साधना का बच्चा शबाना के पास पहुंच गया। इसके करीब 3 दिन बाद दोनों प्रसूताओं को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

जिला अस्पताल में प्रसव के बाद शबाना कुरैशी के साथ उसका बच्चा।
जानिए कैसे पता चला बच्चा बदल जाने का ?
मुस्लिम परिवार के मुताबिक घर जाने के बाद शबाना कुरैशी बच्चे को नहला रही थी, तभी उसने देखा कि बच्चे के हाथ में लगे टैग में बेबी ऑफ साधना लिखा हुआ है, जिससे उसे बच्चा बदलने का शक हुआ। इसकी जानकारी शबाना ने अपने परिवार को दी।
उसने बताया कि, जन्म के समय खींची गई तस्वीर से उसके बच्चे का मिलान नहीं हो रहा है। फोटो में साधना के बच्चे के शरीर में बर्थ मार्क था। वहीं, बर्थ मार्क शबाना को दिए गए बच्चे में दिखा। इसके बाद परिजनों ने जिला अस्पताल पहुंचकर मामले की शिकायत की।

जिला अस्पताल में प्रसव के बाद शबाना कुरैशी के साथ उसका बच्चा।
बच्चे के चेहरे पर तिल का निशान नहीं
शबाना कुरैशी के भाई आमिर खान का कहना है कि, जन्म के समय अस्पताल की ओर से मां के साथ बच्चे की फोटो ली जाती है। वो फोटो बाद में परिजनों को दी जाती है, जो फोटो शबाना को दी गई है, उसमें बच्चे के चेहरे पर कहीं भी तिल का निशान नहीं है, जबकि उसके पास जो बच्चा है, उसके चेहरे पर तिल का निशान है।
मामला उलझा तो होगा DNA टेस्ट
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. हेमंत साहू ने मामले की सूचना कोतवाली थाने में दी है। वहीं, शबाना के परिजनों ने भी थाने में शिकायत की है। पुलिस का कहना है कि, अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर जांच चल रही है। दोनों पक्षों को समझाया जाएगा। अगर मामला नहीं सुलझा तो DNA टेस्ट कराया जाएगा।
कलेक्टर से शिकायत, बनी जांच समिति
मुस्लिम परिवार ने कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने डिप्टी कलेक्टर एम भार्गव के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की है, जिन्होंने रविवार को अस्पताल के मदर चाइल्ड यूनिट का रिकॉर्ड खंगाला। जिम्मेदार स्टाफ से पूछताछ की, लेकिन अभी तक मामले का हल नहीं निकला है।
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