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10 साल से झोपड़ी में गुजर-बसर कर रहा परिवार, सरकारी आवास का इंतजार; पूर्व प्रधान पर ₹7 हजार लेने का आरोप

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रायबरेली। जिले के खीरों विकास क्षेत्र की सगुनी ग्राम पंचायत के मजरे शंकर बख्श खेड़ा से एक गरीब परिवार की स्थिति सामने आई है, जो कथित तौर पर पिछले करीब 10 वर्षों से सरकारी आवास की उम्मीद लगाए बैठा है। परिवार का कहना है कि बरसात के दौरान उनका कच्चा मकान गिर गया था, जिसके बाद उन्होंने सरकारी आवास योजना का लाभ पाने के लिए कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक उन्हें पक्का मकान नहीं मिल सका है।

बताया जा रहा है कि करीब एक दशक पहले कांति पत्नी राजू लोधी का कच्चा मकान बारिश के दौरान गिर गया था। मकान गिरने के बाद परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई। परिवार को उम्मीद थी कि सरकारी आवास योजना के तहत उन्हें पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन वर्षों बीतने के बावजूद आवास का लाभ नहीं मिलने का दावा किया जा रहा है।

झोपड़ी में रहने को मजबूर परिवार

मकान गिरने के बाद से कांति पत्नी राजू लोधी अपने परिवार के साथ झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। परिवार के अनुसार बारिश, सर्दी और गर्मी के मौसम में झोपड़ी में रहना बेहद मुश्किल होता है।

परिवार के मुखिया राजू लोधी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। सीमित आमदनी के कारण परिवार के लिए स्वयं पक्का मकान बनवा पाना भी मुश्किल बताया जा रहा है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि सरकारी आवास योजना ही उनके लिए पक्के घर का सहारा है, लेकिन लंबे समय से आवेदन और शिकायत के बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाया।

पूर्व ग्राम प्रधान पर ₹7 हजार लेने का आरोप

पीड़िता कांति ने पूर्व ग्राम प्रधान पर आवास दिलाने के नाम पर करीब 7 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पूर्व प्रधान का पक्ष भी सामने नहीं आया है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि राशि दिए जाने के बावजूद उन्हें सरकारी आवास नहीं मिला। परिवार ने मामले की जांच कराए जाने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आवास योजना के लाभ के नाम पर वास्तव में किसी प्रकार की धनराशि ली गई थी या नहीं।

कई बार लगाई गुहार, फिर भी नहीं हुआ समाधान

परिवार के अनुसार सरकारी आवास के लिए उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित जिम्मेदार लोगों से संपर्क किया। परिवार का दावा है कि मामले में जांच भी कराई गई, लेकिन इसके बावजूद उनकी आवास संबंधी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

पीड़ित परिवार अब संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पात्रता के आधार पर सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग कर रहा है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति

इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि परिवार वास्तव में सरकारी आवास योजना की पात्रता पूरी करता है या नहीं और यदि पात्र है तो अब तक उसे योजना का लाभ क्यों नहीं मिला। इसके साथ ही पूर्व प्रधान पर लगाए गए धनराशि लेने के आरोप की भी आधिकारिक जांच आवश्यक है।

अब देखना होगा कि संबंधित विभाग के अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच करते हैं या नहीं और पात्र पाए जाने पर परिवार को सरकारी आवास योजना का लाभ कब तक मिलता है।

यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी आवास योजनाओं का लाभ पहुंचने और योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी से जुड़े सवाल भी सामने लाता है।