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Wed, Oct 7, 2026Updated 9:28 AM IST
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2026 केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार: भारतीय मूल के ब्रिटिश वैज्ञानिक शंकर बालासुब्रमण्यम का नाम चर्चा में, डीएनए सीक्वेंसिंग में योगदान के लिए मिल चुका है वुल्फ पुरस्कार

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स्टॉकहोल्म। वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कारों की घोषणा का सिलसिला जारी है और आज रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) के क्षेत्र में इस वर्ष के नोबेल पुरस्कार विजेता के नाम का ऐलान किया जाना है। वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय और मीडिया रिपोर्ट्स में इस बार भारतीय मूल के ब्रिटिश वैज्ञानिक प्रोफेसर शंकर बालासुब्रमण्यम का नाम प्रमुखता से चर्चा में बना हुआ है। उन्हें डीएनए सीक्वेंसिंग तकनीक में उनके क्रांतिकारी और मौलिक योगदान के लिए इस वर्ष के संभावित दावेदारों में से एक माना जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और उनका नाम वर्तमान में केवल चर्चाओं और अनुमानों का हिस्सा है।

प्रोफेसर शंकर बालासुब्रमण्यम को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा चुका है। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि उन्हें इसी वर्ष 2026 में डीएनए सीक्वेंसिंग के क्षेत्र में किए गए शोध के लिए प्रतिष्ठित ‘वुल्फ प्राइज इन केमिस्ट्री’ (Wolf Prize in Chemistry) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें दो अन्य विश्वविख्यात वैज्ञानिकों, डेविड क्लेनरमैन और पास्कल मेयर के साथ संयुक्त रूप से प्रदान किया गया था। वुल्फ पुरस्कार को अक्सर नोबेल पुरस्कार का पूर्वसंकेत या ‘प्री-नोबेल’ अवार्ड माना जाता है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से कई वुल्फ पुरस्कार विजेताओं को बाद में नोबेल पुरस्कार से भी नवाजा गया है। यही कारण है कि आज होने वाली घोषणा से पहले शंकर बालासुब्रमण्यम की दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

डीएनए सीक्वेंसिंग वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा डीएनए अणु में न्यूक्लियोटाइड्स के क्रम का निर्धारण किया जाता है। यह तकनीक आधुनिक जीव विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान और जेनेटिक्स की नींव है। प्रोफेसर बालासुब्रमण्यम और उनके सहयोगियों ने इस तकनीक को अधिक सटीक, तीव्र और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके शोध ने न केवल बुनियादी विज्ञान को गहराई प्रदान की है, बल्कि इसने व्यक्तिगत चिकित्सा (पर्सनलाइज्ड मेडिसिन), कैंसर अनुसंधान और दुर्लभ आनुवंशिक विकारों की पहचान जैसे व्यावहारिक अनुप्रयोगों को भी संभव बनाया है। वुल्फ फाउंडेशन ने उन्हें यह पुरस्कार देते समय विशेष रूप से डीएनए सीक्वेंसिंग की विधियों के विकास में उनके योगदान का उल्लेख किया था, जिसने जीनोमिक्स के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की है।

भारतीय मूल के वैज्ञानिकों का नोबेल पुरस्कार की चर्चा में आना भारत के लिए गर्व का विषय होता है। शंकर बालासुब्रमण्यम का जन्म भारत में हुआ था और वे वर्तमान में ब्रिटिश नागरिक हैं तथा यूनाइटेड किंगडम में अपनी शोध गतिविधियां संचालित करते हैं। उनकी उपलब्धियां भारतीय वैज्ञानिक प्रतिभा की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण हैं। यदि आज उन्हें नोबेल पुरस्कार की घोषणा होती है, तो वे रसायन विज्ञान के क्षेत्र में यह सर्वोच्च सम्मान पाने वाले भारतीय मूल के चुनिंदा वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हो जाएंगे। तथापि, समाचार एजेंसियों और स्रोत सामग्री में यह स्पष्ट रूप से दर्ज है कि उनका नाम फिलहाल ‘चर्चा में’ है और इसे अंतिम या पुष्टि प्राप्त जानकारी नहीं माना जाना चाहिए।

नोबेल पुरस्कार समिति की चयन प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय होती है और अंतिम क्षण तक विजेताओं के नामों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी बाहर नहीं आती है। इसलिए, किसी भी पूर्वानुमान या चर्चा को तथ्यात्मक पुष्टि नहीं माना जा सकता। आज की घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या प्रोफेसर बालासुब्रमण्यम को वास्तव में इस वर्ष का केमिस्ट्री नोबेल मिलता है या समिति ने किसी अन्य वैज्ञानिक या शोध क्षेत्र को चुना है। वुल्फ पुरस्कार जीतना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और यह उनके कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र पुष्टि करता है, लेकिन नोबेल पुरस्कार का फैसला पूरी तरह से स्टॉकहोल्म स्थित रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के विवेकाधीन है।

आज होने वाली घोषणा पर वैश्विक स्तर पर नजरें टिकी हुई हैं। यदि शंकर बालासुब्रमण्यम का चयन होता है, तो यह डीएनए सीक्वेंसिंग और जीनोमिक्स के क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा। वहीं, यदि उनका चयन नहीं भी होता है, तो वुल्फ पुरस्कार के माध्यम से मिली मान्यता यह सुनिश्चित करती है कि उनका कार्य वैज्ञानिक इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज हो चुका है। पाठकों और समाचार उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि वे आज की आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा करें और किसी भी अनपुष्ट अटकल को तथ्य न समझें। वैंदे भारत न्यूज़ की ओर से दी जा रही यह जानकारी स्रोत सामग्री में उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है और इसमें किसी प्रकार की कल्पना या राय शामिल नहीं की गई है।