हादसे के कारण एक दर्जन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
खंडवा जिले के कोंडावत गांव में गणगौर विसर्जन के दौरान कुएं में उतरे 8 लोगों की जहरीली गैस से हुई मौत ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। मरने वाले सभी लोग घरों के मुखिया थे। हादसे के बाद से गांव में मातम पसरा है और कई घरों में दो दिनों से चूल्हा
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मृतक अर्जुन पटेल ने अपनी बेटी आरुषि की लंबी उम्र के लिए गणगौर माता को पाट बैठाया था और मन्नत पूरी होने पर 200 लोगों को भोजन कराया था। लेकिन अगले ही दिन हादसे में जान चली गई।
बेटी आरुषि इतनी सदमे में है कि दो बार उसी कुएं के पास गई जहां से पिता की लाश निकली थी। परिवार में मातम है, पत्नी अस्पताल में भर्ती है और बेटियों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है।
हादसे में जान गंवाने वाले 8 पुरुषों में से कई की पत्नियां गर्भवती हैं। एक दर्जन से ज्यादा छोटे बच्चों का बचपन बिना पिता के शुरू होने वाला है। अनिल पटेल की डेढ़ साल की बेटी है और पत्नी को 4 महीने का गर्भ है। गांव में हर तरफ़ मातम, सन्नाटा और टूटे हुए परिवार हैं।
भास्कर की टीम गांव पहुंची और पीड़ित परिवारों से बातचीत की…
खेती या मजदूरी से अपने परिवारों का पेट पालते थे भास्कर की टीम ने जैसे ही गांव में प्रवेश किया को देखा कि हर ओर सिर्फ हादसे की बातचीत हो रही थी। एक ग्रामीण ने बेहद भावुकता के साथ कहा कि गणगौर उत्सव की तैयारियां चल रही थीं। जिन घरों से रथ निकलने थे, वहां अब अर्थियां निकलीं हैं।

अर्जुन, अनिल समेत सभी लोग मामूली खेती या मजदूरी से अपने परिवारों का पेट पालते थे। अब उनके बच्चे, गर्भवती पत्नियां और बूढ़े माता-पिता असहाय हो गए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जितना दर्दनाक यह हादसा है, उतनी ही दर्दनाक कहानी उन परिवारों की है, जिनके घर से गणगौर के रथ उठने की बजाय अर्थियां उठी हैं। हादसे में जान गंवाने वाले आठ में से सात लोग शादीशुदा थे, जिनके पीछे कुल मिलाकर 20 बच्चे छूट गए हैं। इनमें 16 बेटियां शामिल हैं।
मृतक राकेश अविवाहित था, हालांकि उसका रिश्ता तय हो चुका था। अर्जुन की छह बेटियां हैं, जिनमें बड़ी बेटी की उम्र 16 साल है, जबकि वासुदेव की पांच बेटियां हैं और उसकी सबसे बड़ी बेटी 12 साल की है। मोहन के दो बेटे हैं, जिनमें से एक शादीशुदा है। अजय की एक डेढ़ साल की बेटी है और उसकी पत्नी नौ माह की गर्भवती है।
इसी तरह, अनिल की भी डेढ़ साल की एक बेटी है और उसकी पत्नी चार माह की गर्भवती है। मृतक गजानंद के दो बच्चे हैं- एक बेटी जो छठवीं कक्षा में पढ़ती है और एक बेटा जो सातवीं कक्षा का छात्र है।
वहीं शरण के तीन बच्चे, जिनमें एक बेटा और दो बेटियां शामिल हैं। इन परिवारों पर अब गहरा संकट छा गया है और मासूम बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इसी कुएं की सफाई के लिए 8 लोग अंदर उतरे थे। एक-दूसरे को बचाने में सभी की जान चली गई।
अर्जुन ने कहा था- बेटा हुआ तो पूरे गांव को खाना खिलाऊंगा जान गंवाने वाले अर्जुन पटेल (35) ने पहली बार गणगौर माता को पाट बैठाया था। उसने बड़ी बेटी आरुषि की मन्नत ली हुई थी। हादसे के एक दिन पहले यानी बुधवार के दिन मन्नत के रूप में बेटी का तुलादान किया और पूरे समाज समेत 200 रिश्तेदारों को भोजन कराया।
अर्जुन ने रिश्तेदारों से यह भी कहा कि बेटे ने जन्म लिया तो अगली बार रथ बौडाऊंगा और पूरे गांव को खाना खिलाउंगा। महज डेढ़ एकड़ जमीन के काश्तकार और परिवार में इकलौते अर्जुन के ऊपर में पत्नी सुनीता और 6 बेटियों के पालन-पोषण का जिम्मा था।
खेती से पूर्ति ना होने पर वह थ्रेसर मशीन पर मजदूरी करने जाता था। यहां तक कि गाड़ियों के पंचर तक बनाता था। पुश्तैनी मकान जर्जर हो गया तो उसने आधा एकड़ बेचकर कच्चा घर बनाया। ताकि परिवार को छत मिल जाए।

हादसे में जान गंवाने वाले सभी 8 लोगों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली गई।
दो बार कुएं तक गई बेटी अर्जुन की मौत से परिवार बेहद सदमें में है, पत्नी ने हिम्मत छोड़ दी तो बेटियां भी टूट गईं। अंतिम संस्कार से पहले पति की डेडबॉडी देखकर पत्नी घबरा गई। बेहोशी की हालत में उसे एम्बुलेंस की मदद से जिला अस्पताल भेजा गया। वहीं 6 बेटियों में बड़ी बेटी आरुषि ने पिता को मुखाग्नि दी। वह कहती है, मेरी और बहनों की हर पल चिंता करने वाले पापा नहीं रहे तो अब मैं जीकर क्या करूंगी।
आरुषि इतने सदमें में थी कि वह दो बार उसी कुएं तरफ गई, जिस कुएं से उसके पिता की लाश निकली थी। रात के एक बजे पिता की डेडबॉडी खंडवा के जिला अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए रखी थी, उसी दौरान आरुषि कुएं के पास चली गई। वहां खड़े लोगों ने उसे रोका और घर भेजा। सुबह 8 बजे फिर वह कुएं के पास आ गई। वह सीएम राइज स्कूल छैगांवमाखन में 10वीं की स्टूडेंट है।
हादसे में अर्जुन के चचेरे भाई गजानंद (35) की भी मौत हुई है। गांव में दोनों के घर सटे हैं। गजानंद के भी दो बच्चे है, बेटा युवराज चौथी और बेटी सानिया छठवीं क्लास में पढ़ती है। गजानंद भी खेती के साथ परिवार पालने के लिए इलेक्ट्रीशियन का काम करता था।

अर्जुन ने जमीन बेचकर मकान बनाया था।
अनिल की डेढ़ साल की बेटी, पत्नी को 4 माह का गर्भ मृतक अनिल पटेल (28) के परिवार की कहानी भी दर्द भरी है। पिता आत्माराम का रो-रोकर बुरा हाल है, बेटे के अंतिम संस्कार के दौरान वह पूरी तरह टूट गए। उन्होंने बताया कि 3 साल पहले 12 मई को अनिल की शादी हुई थी। परिवार में पत्नी और डेढ़ साल की एक बेटी है। पत्नी को चार माह का गर्भ है। अनिल पहले छैगांवमाखन की सूत मील में काम करता था। शादी के बाद वह घर ही रहने लगा। पिता और भाई के साथ खेती में ही हाथ बंटाता था।
मृतक वासुदेव की पांच बेटियां, भतीजे ने भी जान गंवाई मृतक वासुदेव (40) की पांच बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी की उम्र 12 साल है। वासुदेव भी खेती और मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता था। हादसे वाले दिन से पत्नी बेसुध है। मां को देखकर बेटियां के आंसू भी नहीं थम रहे। हादसे में वासुदेव के साथ उसी के भाई हरि के बेटे राकेश ने भी जान गंवाई है। राकेश की इसी साल शादी होने वाली थी, सगाई हो चुकी थी।
मैया का विसर्जन गंदगी में नहीं करेंगे, इसलिए सफाई करने उतरे मृतक अर्जुन के काका कैलाश तिरोले का कहना है कि गांव में एकमात्र प्राचीन कुआं है, जो 150 साल पुराना है। इसी कुएं में हर साल गणगौर के जवारों का विसर्जन करते आए हैं। गांव के लोग इस कुएं में पूजा-पाठ की सामग्री को भी फेंक देते हैं। इसलिए इस बार विसर्जन से पहले युवाओं ने सोचा कि मैया का विसर्जन गंदगी में नहीं करेंगे। कुएं से कचरा निकालने के लिए वह उतरे थे, हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतना बुरा हो जाएगा।

प्रत्यक्षदर्शी बोला- दो को बचाने तीन उतरे, फिर 3 कूदे घटना के प्रत्यक्षदर्शी मुन्ना पटेल ने बताया कि गुरुवार को शाम के 4 बज रहे थे, उस समय वह मोहल्ले में एक चबूतरे पर बैठा था। इसी बीच गांव में हंगामा हो गया, लोग दौड़ रहे थे, पता चला कि कुएं में तीन लोग डूब गए हैं। मैं कुएं तक पहुंचा तब तक पांच लोग कुएं में उतर चुके थे।
मेरे सामने शरण भाई, मोहन सेठ और अजय रस्सी पकड़कर कुएं में उतरने लगे। थोड़ी देर बाद मैं भी उतरने लगा और एक सीढ़ी पर पैर रखा। देखा कि कोई आवाज नहीं आ रही है। मैं कुएं से बाहर आया और बाकी लोगों को भी कुएं के भीतर जाने से रोका।
आश्रित ज्यादा, बढ़ाई जाए आर्थिक सहायता की राशि कोंडावत गांव में एक ब्राह्मण परिवार को छोड़ दिया जाए तो पूरी आबादी कुनबी पटेल समाज की है। समाज के 200 परिवार हैं। कुनबी पटेल समाज के नेता संजीव पटेल ने कहा कि समाज के आठों युवा धर्म से जुड़े काम के लिए कुएं में उतरे थे। एक-दूसरे को बचाने में उन्होंने अपनी जान गंवाई है। उनके परिवार की स्थिति काफी दयनीय है।
एक-एक परिवार में आश्रितों की संख्या 10 से 12 है। खासकर अर्जुन की 6 बेटियां और वासुदेव की 5 बेटियां हैं। प्रशासन ने आर्थिक सहायता के तौर पर 4-4 लाख रूपए देने की घोषणा की है। हमारी मांग है कि इस राशि को बढ़ाकर 50 लाख रूपए करना चाहिए।

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खंडवा में गुरुवार को कुएं में उतरे 8 लोगों की दम घुटने से मौत हो गई। एक युवक गणगौर विसर्जन के लिए कुएं की सफाई करने उतरा और जहरीली गैस से उसका दम घुटने लगा। लोग उसे बचाते इससे पहले ही वह कुएं में गिरा और दलदल में समा गया। उसे बाहर निकालने के लिए 7 और लोग नीचे उतरे और जहरीली गैस के कारण बेसुध होने से दलदल में धंस गए। पूरी खबर पढ़िए…
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शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे सभी शवों को अलग-अलग वाहनों से गांव लाया गया। यहां अंतिम श्रद्धांजलि के बाद मुक्तिधाम ले जाया गया। अंतिम संस्कार में आसपास के गांवों के लोग भी शामिल हुए। पूरी खबर पढ़िए…