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Tue, Oct 6, 2026Updated 7:42 AM IST
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80 वर्ष की आयु में दिग्विजय सिंह करेंगे 930 किमी पैदल यात्रा: उज्जैन से अयोध्या तक ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का ऐलान, राम मंदिर निधि पर उठाए सवाल

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उज्जैन। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 80 वर्ष की आयु में एक बार फिर अपनी शारीरिक क्षमता और राजनीतिक सक्रियता का प्रदर्शन करने की तैयारी कर ली है। उन्होंने घोषणा की है कि वे आगामी 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक एक विशाल पदयात्रा निकालेंगे। इस यात्रा को ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ नाम दिया गया है और यह कुल 930 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। दिग्विजय सिंह ने इस संबंध में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि यद्यपि उनकी आयु 80 वर्ष हो चुकी है, लेकिन वे आज भी स्वयं को 50 वर्ष का महसूस करते हैं और इस चुनौतीपूर्ण पैदल यात्रा को पूर्ण करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।

इस यात्रा की शुरुआत धार्मिक नगरी उज्जैन से होगी, जो हिंदू मान्यताओं में अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है। उज्जैन से प्रारंभ होकर यह यात्रा सीधे अयोध्या पहुंचेगी, जहां भगवान राम का भव्य मंदिर निर्मित हुआ है। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सनातन धर्म के वास्तविक स्वरूप और उससे जुड़े सामाजिक-धार्मिक मुद्दों को जनता के समक्ष रखना है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में सनातन धर्म की चर्चा तो व्यापक स्तर पर हो रही है, लेकिन इसके मूल सिद्धांतों और व्यवहारिक पक्षों पर स्पष्टता की आवश्यकता है। उनके अनुसार, इस यात्रा के माध्यम से वे सत्य और स्वाभिमान के साथ सनातन संस्कृति की रक्षा का संदेश देना चाहते हैं।

दिग्विजय सिंह द्वारा इस यात्रा की घोषणा ऐसे समय में की गई है जब राम मंदिर निर्माण निधि के उपयोग को लेकर विवाद चल रहा है। स्रोत सामग्री में उल्लेखित जानकारी के अनुसार, दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निधि के उपयोग के संबंध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की प्रकृति और उनके विशिष्ट विवरण उपलब्ध स्रोत सामग्री में सीमित हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस पदयात्रा का एक प्रमुख संदर्भ राम मंदिर से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं पर सवाल उठाना भी है। दिग्विजय सिंह ने इसे सत्य की खोज और जवाबदेही तय करने के अभियान के रूप में रेखांकित किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी शारीरिक फिटनेस को लेकर भी खुलकर बात की है। 80 वर्ष की उम्र में 930 किलोमीटर की पैदल यात्रा करना किसी भी व्यक्ति के लिए असाधारण उपलब्धि मानी जाती है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे आज भी 50 वर्ष की आयु वाले व्यक्ति की तरह ऊर्जावान महसूस करते हैं। यह बयान न केवल उनकी व्यक्तिगत दृढ़ता को दर्शाता है, बल्कि यह उनके राजनीतिक संदेश को भी बल देता है कि उम्र कोई बाधा नहीं है यदि इरादे मजबूत हों। कांग्रेस नेता के इस बयान को उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायी संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है, जो इस यात्रा में उनके साथ कदमताल कर सकते हैं।

‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का नामकरण भी महत्वपूर्ण है। इसमें ‘सत्य’, ‘सनातन’ और ‘स्वाभिमान’ तीन शब्दों का प्रयोग किया गया है, जो यात्रा के वैचारिक आधार को स्पष्ट करते हैं। दिग्विजय सिंह का मानना है कि वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में सनातन धर्म की व्याख्या को लेकर भ्रम की स्थिति है और इसे दूर करने के लिए सत्य को सामने लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोग आज सनातन धर्म की बात तो कर रहे हैं, लेकिन क्या वे उसके वास्तविक अर्थ को समझ रहे हैं, यह प्रश्न विचारणीय है। इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न स्थानों पर लोगों से संवाद स्थापित करेंगे और अपने विचार साझा करेंगे।

उज्जैन से अयोध्या तक की यह यात्रा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से होकर गुजरेगी। 930 किलोमीटर की यह दूरी तय करने में कई सप्ताह का समय लगने की संभावना है। यात्रा के मार्ग और कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा अभी पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन 20 अक्टूबर को उज्जैन से प्रस्थान की तिथि निश्चित कर दी गई है। दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को अपनी व्यक्तिगत आस्था और राजनीतिक जिम्मेदारी दोनों से जोड़ा है। राम मंदिर निधि को लेकर आरएसएस और बीजेपी पर लगाए गए आरोपों के संदर्भ में, यह यात्रा एक प्रकार से जन-जागरूकता अभियान के रूप में भी देखी जा सकती है, जिसमें वे आम लोगों के बीच जाकर इन मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि उपलब्ध स्रोत सामग्री में राम मंदिर निधि से जुड़े आरोपों के विशिष्ट दस्तावेजी प्रमाण या विस्तृत विवरण शामिल नहीं हैं। इसलिए, इस रिपोर्ट में केवल उन्हीं तथ्यों को स्थान दिया गया है जो स्रोत में स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं। दिग्विजय सिंह के बयानों और यात्रा की घोषणा को यथावत प्रस्तुत किया गया है, बिना किसी बाहरी अनुमान या टिप्पणी के। इस यात्रा का राजनीतिक और धार्मिक महत्व इस तथ्य से और बढ़ जाता है कि यह दो प्रमुख धार्मिक केंद्रों—उज्जैन और अयोध्या—को जोड़ती है और एक वरिष्ठ नेता द्वारा इतनी लंबी पैदल यात्रा का आयोजन भारतीय राजनीति में दुर्लभ घटना है।

दिग्विजय सिंह की इस पहल पर कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया और यात्रा के सुरक्षा एवं लॉजिस्टिक प्रबंधों के बारे में अभी अतिरिक्त जानकारी की प्रतीक्षा है। तथापि, पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वयं इस यात्रा को लेकर अपनी दृढ़ता स्पष्ट कर दी है। 80 वर्ष की आयु में 930 किलोमीटर चलने का संकल्प और सनातन धर्म के नाम पर सत्य व स्वाभिमान की बात करना, इस यात्रा को सामान्य राजनीतिक पदयात्राओं से भिन्न बनाता है। 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू होने वाली यह यात्रा आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकती है, विशेषकर राम मंदिर निधि विवाद और सनातन धर्म की राजनीतिक व्याख्या के संदर्भ में।