जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश बने, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ — 15 महीने का होगा कार्यकाल

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नई दिल्ली।भारत को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को देश के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा, यानी करीब 15 महीने तक वे देश की सर्वोच्च न्यायिक जिम्मेदारी संभालेंगे।

दो दशक से अधिक का न्यायिक अनुभवजस्टिस सूर्यकांत दो दशक से अधिक समय तक न्यायपालिका में उल्लेखनीय योगदान देते रहे हैं। हाई कोर्ट में जज के रूप में अपनी सेवा देने के बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। अपने करियर में उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसलों की पीठ का नेतृत्व किया—अनुच्छेद 370अभिव्यक्ति की स्वतंत्रतापर्यावरण संरक्षणभ्रष्टाचार निरोधलोकतांत्रिक अधिकारलैंगिक समानताइन फैसलों ने भारतीय न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलावों की आधारशिला रखी।

विश्व के कई देशों के चीफ जस्टिस रहे उपस्थितशपथ ग्रहण समारोह में कई देशों के मुख्य न्यायाधीश और शीर्ष न्यायाधीश भी शामिल हुए, जिनमें—भूटान के CJI ल्योंपो नॉर्बू शेरिंगब्राज़ील के CJI एडसन फाचिनकेन्या की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मार्था कूममॉरीशस की CJI बीबी रेहाना मुंगली-गुलबुलनेपाल के CJI प्रकाश मान सिंह राउतश्रीलंका के CJI पी. पद्मन सुरेसनइनकी उपस्थिति ने समारोह को अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्रदान की।

गरीब ग्रामीण परिवेश से सर्वोच्च न्यायपालिका तक का सफरजस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेटवार गांव में एक शिक्षक परिवार में हुआ। उनका बचपन शहरों की चकाचौंध से दूर ग्रामीण वातावरण में बीता।गांव के साधारण स्कूल से आठवीं तक की शिक्षास्कूल में बेंच तक नहीं थींपहली बार शहर तब देखा, जब 10वीं बोर्ड परीक्षा देने हांसी गएसाधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचना उनके संघर्ष, प्रतिभा और समर्पण का प्रमाण है।जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट से देश को न्याय और संवैधानिक दिशानिर्देशों के नए आयाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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