Sun, 04 Oct 20263:51 PM
Sun, Oct 4, 2026Updated 3:51 PM IST
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बुधनी में यात्री बस के सामने आया बाघ: सड़क पर टहलने के बाद झाड़ियों में गायब, खटपुरा और धामनखेड़ा में ग्रामीणों में दहशत

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वंदे भारत न्यूज़। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शाहगंज के पास स्थित ग्राम खटपुरा में बीती रात एक जंगली बाघ अचानक एक चलती यात्री बस के सामने आ गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि बाघ सड़क पर मौजूद है। बस में सवार यात्रियों ने जब अपने ठीक सामने विशालकाय बाघ को देखा तो उनके बीच हड़कंप मच गया। हालांकि, कुछ समय तक सड़क पर टहलने के बाद यह बाघ पास की झाड़ियों में गायब हो गया, लेकिन इस घटना ने खटपुरा और आसपास के धामनखेड़ा सहित अन्य गांवों के ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना बीती रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है। उस समय एक यात्री बस अपने निर्धारित मार्ग पर चल रही थी। जैसे ही बस शाहगंज के समीप ग्राम खटपुरा के इलाके से गुजर रही थी, तभी अचानक एक बाघ सड़क पर आ गया। बस चालक ने बाघ को देखते ही बस की गति धीमी कर दी। बस के हेडलाइट की रोशनी में बाघ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। सड़क पर बाघ को अचानक सामने पाकर बस में बैठे यात्रियों में भारी हलचल मच गई। यात्री अपनी जान बचाने को लेकर भयभीत हो गए। बस के अंदर बैठे कुछ यात्रियों ने अपने मोबाइल फोन से इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो अब इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि बाघ बस के सामने सड़क पर कुछ देर तक रुका रहा और फिर धीरे-धीरे सड़क पर टहलने लगा। किसी भी तरह की जल्दबाजी या आक्रामकता दिखाए बिना, बाघ ने सड़क पर अपना चक्कर लगाया। इसके बाद वह सड़क किनारे मौजूद घनी झाड़ियों की तरफ बढ़ गया और अंधेरे में ओझल हो गया। बाघ के झाड़ियों में जाने के बाद बस चालक ने राहत की सांस ली और बस को आगे बढ़ाया। बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। हालांकि, यात्रियों ने बताया कि बाघ को इतने करीब से देखना उनके लिए एक डरावना अनुभव था।

इस घटना के बाद से खटपुरा और उसके आसपास के गांवों, विशेषकर धामनखेड़ा में ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। रात के समय बाघ के रिहायशी इलाके और मुख्य सड़क तक आ जाने से ग्रामीण सहमे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलने के बाद वे अपने घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं। किसानों और मजदूरों को भी खेतों तक जाने में भय सता रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि बाघ को पकड़कर वापस जंगल में छोड़ने की व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

सीहोर जिला मुख्यालय से बुधनी और शाहगंज का इलाका नर्मदा नदी के किनारे और सतपुड़ा की पहाड़ियों के निकटवर्ती क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इन इलाकों में घने जंगल मौजूद हैं, जो वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में जंगलों के निकट मानवीय गतिविधियों और सड़क मार्गों के विस्तार के कारण वन्यजीवों और इंसानों के आमने-सामने आने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिकार की तलाश या अपने इलाके की गश्त के दौरान बाघ कभी-कभी रिहायशी क्षेत्रों और हाईवे तक आ जाते हैं। रात का समय बाघों के सक्रिय होने का मुख्य वक्त होता है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं अधिकतर अंधेरा होने के बाद ही सामने आती हैं।

वन विभाग के अधिकारियों द्वारा इस संबंध में क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी अभी तक विस्तृत पुष्टि नहीं हो पाई है। हालांकि, इस तरह की घटनाओं के बाद वन विभाग की टीमों को अलर्ट किया जाता है और संभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी जाती है। सूत्रों के अनुसार, वन विभाग की टीमें खटपुरा और धामनखेड़ा के आसपास के जंगलों में बाघ के पदचिह्नों और उसकी मौजूदगी की जांच कर सकती हैं। यदि बाघ बार-बार रिहायशी इलाकों में आता है, तो उसे ट्रैंकुलाइज करके सुरक्षित जंगल में स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जा सकती है।

स्थानीय प्रशासन से भी ग्रामीणों ने राहत और सुरक्षा की गुहार लगाई है। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की जा रही है। फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस बात पर हैरानी जता रहे हैं कि एक व्यस्त मार्ग पर यात्री बस के ठीक सामने बाघ कैसे आ गया। वन विभाग और स्थानीय पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय अकेले जंगल या सुनसान सड़कों पर जाने से बचें और किसी भी वन्यजीव की सूचना तुरंत विभाग को दें। जब तक बाघ की सटीक लोकेशन और उसकी गतिविधियों की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक खटपुरा और धामनखेड़ा के ग्रामीणों में यह दहशत बरकरार रहने की संभावना है।