ब्लैकबोर्ड-सुहागरात पर ड्रग्स लेने गया, रातभर नहीं लौटा:हर हफ्ते लड़कियां बदलता, सड़क पर अंडरवियर में मिला; नशे के लिए 25 लाख की नौकरी छोड़ी

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‘जुलाई 2022 की वो रात… जिस रात के लिए ज्यादातर लोग सपने बुनते हैं। उस दिन मेरी सुहागरात थी। कमरा सज चुका था। रिश्तेदार थककर सो गए थे। दुल्हन मेरे कमरे में इंतजार कर रही थी। मैं उसके कमरे में गया और उससे बात किए बिना बगल में लेट गया। रात के करीब 3 बजे, चुपचाप उठा और घर से बाहर निकल गया। न पत्नी को कुछ बताया, न घरवालों को। एक सुनसान नुक्कड़ पर जाकर बैठा। जेब से शराब निकाली और पी… फिर गांजा पिया और दूसरे कई ड्रग्स लिया। एक के बाद एक… इतना नशा कर लिया कि वहां से उठ नहीं पाया। मुझे याद ही नहीं रहा कि उस रात मेरी सुहागरात थी’, 39 साल के मनोजीत चौधरी यह बताते हुए काफी अफसोस से भर जाते हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज ऐसे लोगों की कहानी, जो काफी पढ़े-लिखे होने के बावजूद नशे की लत में तबाह हो गए। शादी टूट गई। घर छूटा और नौकरी चली गई। अब रिहैबिलिटेशन सेंटर यानी पुनर्वास केंद्र में भर्ती हैं। मैं गुजरात के नाडियाड में हूं। यहां ‘लाइफ लाइव’ नाम के एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में 39 साल के मनोजित चौधरी पिछले चार महीनों से भर्ती हैं। मनोजित सुहागरात की बात आगे बताते हुए कहते हैं, ‘सुबह जब पत्नी की आंख खुली, तो मैं कमरे में नहीं था। नई-नवेली दुल्हन घबरा गई। उसने घरवालों को बताया। कुछ ही देर में पूरे घर में हलचल मच गई। मां लगातार मुझे फोन करती रहीं, लेकिन मैंने एक भी कॉल नहीं उठाया। कई घंटे बाद घर लौटा। मुझे देखते ही सब समझ गए कि बुरी तरह नशे में हूं। घर का माहौल, जो कुछ घंटे पहले तक शादी की खुशियों से भरा था, अब चीख-पुकार में बदल चुका था। पत्नी ने मुझसे सवाल पूछे, लेकिन जवाब देने के बजाय उससे झगड़ा शुरू कर दिया। बात इतनी बढ़ गई कि उसे थप्पड़ मार दिया। हमारे रिश्ते में दरार सुहागरात के दिन ही पड़ गई। मेरी पत्नी उस वक्त सॉफ्टवेयर डेवलपर थी। फिलहाल, मामला किसी तरह शांत हुआ। उसके बाद भी अक्सर पत्नी से मारपीट करता। नशे में उससे अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड्स की बातें करता। कहता- मुझे उस गर्लफ्रेंड के साथ ज्यादा मजा आता था… तुम वैसी नहीं हो। भला कौन पत्नी ये सब बर्दाश्त करेगी? एक वक्त ऐसा भी आया, जब मैंने पत्नी के गहने बेचकर शराब और ड्रग्स में उड़ा दिए। करीब दो साल तक हम साथ रहे, लेकिन रिश्ते में रोज दरार बढ़ती गई। एक दिन पत्नी ने साफ कह दिया- मनोजित , तुम्हें मुझसे नहीं… ड्रग्स से प्यार है। अब तुम ड्रग्स के साथ ही रहो। इतना कहकर वह मायके चली गई। वहीं से उसने तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। तलाक के वक्त एक रुपया भी नहीं मांगा। आखिरकार 2024 में आपसी सहमति से हमारा रिश्ता खत्म हो गया। अब पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है- मैंने सिर्फ अपनी ही नहीं, पत्नी की भी जिंदगी बर्बाद कर दी। आखिर कौन पति अपनी सुहागरात पर पत्नी को सोता छोड़कर ड्रग्स लेने जाएगा? परिवार, शादी, नौकरी सब खत्म हो गया। मेरी आखिरी नौकरी 25 लाख रुपए के पैकेज की थी। मनोजित दिखने में बिल्कुल हट्टे-कट्टे हैं, किसी बाउंसर से कम नहीं। बात करते-करते अचानक कहते हैं- रुकिए… आपको अपनी पुरानी तस्वीरें दिखाता हूं। फैमिली की फोटो भी है। वह मोबाइल उठाते हैं। स्क्रीन ऑन करते हैं। पासवर्ड डालने की कोशिश करते हैं, फिर रुक जाते हैं। कुछ सेकेंड तक स्क्रीन को देखते रहते हैं। फिर दूसरा पासवर्ड डालते हैं। वह भी गलत निकलता है। तीसरी बार कोशिश करते हैं… और फिर हल्की-सी मुस्कान के साथ बेहद टूटे हुए अंदाज में कहते हैं- ‘याद ही नहीं आ रहा…’ इस दौरान रिहैबिलिटेशन सेंटर में आस-पास बैठे बाकी लोग हंसने लगते हैं। मनोजित कुछ पल के लिए चुप हो जाते हैं। सिर झुकाकर धीमी आवाज में कहते हैं- ये लोग मुझे ऐसे देखते हैं, जैसे मैं कोई जाहिल हूं। इन्हें नहीं पता कि पढ़ा-लिखा हूं। एमटेक किया है… उसके बाद एमबीए भी। अच्छी नौकरी थी, लेकिन ड्रग्स की लत मुझे यहां तक ले आई। सच कहूं तो ये रिहैबिलिटेशन सेंटर मुझे जेल लगता है। इतना कहकर वह कमरे की दीवारों की तरफ देखने लगते हैं… जैसे उन दीवारों में अपनी बिखरी हुई जिंदगी तलाश रहे हों। इस दौरान कमरे में लोगों का तंज और हंसी जारी रहती है। परेशान होकर मनोजित अचानक उठते हैं और कहते हैं- आइए… यहां नहीं, दूसरे कमरे में बात करते हैं। वह मुझे सेंटर के भीतर बने दूसरे कमरे में लेकर जाते हैं। दरवाजा बंद करते हैं। फिर बोलना शुरू करते हैं- मैं असम के डिब्रूगढ़ का रहने वाला हूं। मम्मी-पापा दोनों रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में बड़े पद पर थे। अब रिटायर हो चुके हैं। असम में शराब पीना आम बात है। मेरे पापा हर रविवार को शराब पीते थे। मैं तब करीब 10-12 साल का था। एक दिन देखा कि वह एक बोतल से गिलास में कुछ डाल रहे थे। फिर उसमें बर्फ डाली… और एक ही सांस में पी गए। मैंने पूछा- पापा, ये क्या पी रहे हो? मुझे भी पिलाओ। उन्होंने जोर से डांटते हुए कहा- ये बच्चों की चीज नहीं है… भूलकर भी इसे मत छूना। एक दिन पापा घर पर नहीं थे। मैं चुपके से उस अलमारी तक पहुंचा, जहां शराब रखी थी। बोतल निकाली… गिलास में डाली… और पी लिया। पहला घूंट बहुत कड़वा लगा। बोतल वापस अलमारी में रख दी, लेकिन कहानी वहीं खत्म नहीं हुई। थोड़ी देर बाद जब नशा चढ़ा… तो अच्छा लग रहा था। अगले दिन फिर उस बोतल को निकाला। इस बार पहले से ज्यादा पी। शाम को जब पापा घर लौटे, तो उन्हें सब समझ आ गया। उन्होंने मुझे बुलाया और पूछने लगे। डरकर सच बता दिया। इसके बाद उन्होंने मेरी बहुत पिटाई की। कहने लगे- तू मेरा इकलौता बेटा है… शराब पीकर सब बर्बाद करेगा? उसके बाद घर में रखी बोतल को फिर कभी हाथ नहीं लगाया, लेकिन मन बार-बार उसी तरफ खींचता था। उस वक्त मेरे स्कूल के कुछ लड़के चोरी-छिपे नशा करते थे। उनसे दोस्त कर ली। तब 14 साल का हो चुका था। इसके बाद उनके साथ इतना पीने लगा कि अकेले दो-दो बोतल शराब खत्म कर देता था। दोस्त भी नए-नए ‘जुगाड़’ सिखाते थे। कहते- शराब पीने के बाद गुटखा खा लिया करो, फिर घरवालों को पता नहीं चलेगा। रोज दोस्तों के साथ पीता और गुटखा खाकर घर पहुंचता। सोचता था कि राज छिप जाएगा, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता था। पापा अक्सर समझ जाते कि नशे में हूं और पिटाई शुरू कर देते थे। हालांकि, पढ़ाई में बहुत तेज था। स्कूल में हमेशा नंबर अच्छे आते थे। फिर आया साल 2007। 12वीं अच्छे अंकों से पास की। रिजल्ट देखकर पापा बेहद खुश हुए। उन्हें लगा- शायद बेटा अब संभल रहा है। इसी उम्मीद में उन्होंने मुझे गुवाहाटी में बीटेक करने भेज दिया। अब नया शहर… घर से दूरी… और आजादी। गुवाहाटी में और ज्यादा शराब पीने लगा… लेकिन पढ़ाई भी अच्छे से करता रहा। इंजीनियरिंग पूरी हुई… और फिर 2011 में बेंगलुरु की एक कंपनी में नौकरी मिल गई। करियर की शुरुआत शानदार थी, लेकिन नहीं पता था कि असली बर्बादी अभी बाकी है। पहली बार हाथ में अच्छी सैलरी आई… और वहीं से मेरी जिंदगी ने खतरनाक मोड़ ले लिया। पहले सिर्फ शराब पीता था … अब गांजा भी जुड़ गया… और धीरे-धीरे दूसरे ड्रग्स भी लेने लगा। जिस कंपनी में काम करता था, वहां हर महीने कारोबार का नया टारगेट दिया जाता था। नए टारगेट के साथ शुरू होता मेरा नया तनाव। मैं टारगेट तो पूरा कर लेता था… लेकिन उसके लिए खुद को नशे में धकेलता जाता था। दिन में ऑफिस… रात में नशा। सैलरी अच्छी थी… लेकिन टिकती नहीं थी। जितना कमाता था, सब नशे में उड़ा देता था। महीने के करीब 80 हजार रुपए सिर्फ ड्रग्स और शराब में चले जाते थे। पैसे कम पड़ते, तो घर पर फोन करता। मां को अलग-अलग बहाने बताता- कभी घूमने जाने का, तो कभी तबीयत खराब होने का। अक्सर उनसे 50 हजार मंगवा लेता। इकलौता बेटा था, इसलिए भेज भी देती थीं। उन पैसों को बार-पब में उड़ाता। वहां ड्रग्स लेता और लड़कियों के साथ नाचता। कई बार तो वहीं बेहोश पड़ा रह जाता। मनोजित एक कड़वी हंसी के साथ कहते हैं- तब लगता था कि वाह, क्या जिंदगी जी रहा हूं… लेकिन धीरे-धीरे खुद को खत्म कर रहा था। हालात इतने बिगड़ गए कि ऑफिस भी नशा करके जाने लगा। मेरा परफॉर्मेंस अच्छा था, इसलिए कंपनी शुरू में बर्दाश्त करती रही, लेकिन बाद में चेतावनी देकर तीन बार नौकरी से निकाल दिया। एचआर वाले कहते- मनोजित, आपका काम अच्छा है, लेकिन हम कंपनी पॉलिसी से समझौता नहीं कर सकते। आप इस तरह नशा करके ऑफिस नहीं आ सकते। अब तक साल 2012 खत्म होने वाला था और यहीं से मेरी जिंदगी एक और लत की गिरफ्त में आ चुकी थी। अब नशे के साथ मुझे जिस्म की भी आदत लग गई थी। अच्छी सैलरी पाता था, हैंडसम था ही और बिंदास लाइफस्टाइल थी। नई-नई लड़कियों से मिलता, उन पर पैसे खर्च करता और जल्दी-जल्दी रिश्ते बदलता। हफ्तेभर में किसी नई लड़की से जुड़ जाता था और फिर आगे बढ़ जाता। यह सिलसिला एक-दो महीने नहीं, करीब आठ साल तक चला। सच कहूं तो मैं प्लेबॉय बन चुका था। एक रिश्ते में टिकता ही नहीं था। उधर मेरा करियर भी बिखरता गया। कई नई नौकरियां मिलीं, लेकिन कुछ दिन ही ऑफिस जाता… फिर नशा हावी हो जाता और नौकरी छोड़ देता था। एक समय तो ऐसा आया कि मेरी जिंदगी का पूरा रूटीन ही उल्टा हो गया। सुबह सोकर उठता और नाश्ते में खाना नहीं, शराब और ड्रग्स लेता। फिर घंटों सोता रहता। फिर उठता… तो वही नशा करता। दिन-रात यही जिंदगी बन गई थी। उस दौरान घर पर लड़कियां भी आतीं। मेरी जिंदगी 24 घंटे सिर्फ दो चीजों के आसपास घूम रही थी- नशा और लड़कियां। इसी हालत में करीब 12 साल नौकरी किया। फिर आया साल 2022। परिवार को मेरी हालत का पता चल चुका था। उन्हें लगा- शायद शादी मेरी जिंदगी को बदल दे। इसी उम्मीद में उन्होंने घर से करीब 40 किलोमीटर दूर एक लड़की से मेरा रिश्ता तय कर दिया। शादी तय होने के बाद होने वाली पत्नी से रोज बातें करता था। वह एक नई जिंदगी के सपने देख रही थी, लेकिन मैं दिनभर शराब, गांजा और ड्रग्स में डूबा रहता था। मैं उससे ज्यादातर चैट पर ही बात करता था, ताकि उसे मेरी हालत का पता न चले। रोज उससे वादा करता- रात 10 बजे के बाद वीडियो कॉल करूंगा, लेकिन रात होते-होते बहाना तैयार रहता। जैसे ही वीडियो कॉल की बात आती, कह देता- कल सुबह ऑफिस जाना है… बहुत नींद आ रही है। उसे लगता था कि वाकई काम में व्यस्त हूं… और मान जाती थी। लेकिन असलियत कुछ और थी। उससे बात खत्म होते ही शराब, गांजा और ड्रग्स लेने बैठ जाता। फिर पूरी रात नशा चलता था। कभी-कभी उसे शक भी होता। वह पूछती- ‘तुम कुछ छिपा तो नहीं रहे?’ हर बार बात टाल देता- अरे नहीं… बस कभी-कभार शराब पी लेता हूं। असम में तो ये सब आम बात है न। लेकिन झूठ ज्यादा दिन नहीं चला। शादी हुई… वह घर आई… और फिर वो सुहागरात आई, जिसकी बात मैंने ऊपर की है। सुहागरात वाले दिन घर से गायब रहा था… और दो साल बाद रिश्ता टूट गया था। आप गुजरात के नाडियाड कैसे पहुंचे? मनोजित बताते हैं- घर वालों ने मुझे करीब 4 महीने पहले इस रिहैबिलिटेशन सेंटर में भर्ती कराया है। दिसंबर 2025 की बात है। अहमदाबाद की एक कंपनी में 25 लाख रुपए सालाना पैकेज पर नौकरी लगी। बहुत खुश था। तय किया था कि अब नशा नहीं करूंगा। करीब 10-15 दिनों तक कोई नशा नहीं किया। एक दिन अचानक मन हुआ- एक पेग पी लेता हूं… क्या ही हो जाएगा। गुजरात में शराब पर बैन है, इसलिए आसानी से मिलती नहीं थी। ऑटो किया और एक एजेंट के पास पहुंच गया। उसने मुझे अवैध शराब पिलाई और काफी पैसे ले लिए। अगले दिन फिर उसी एजेंट के पास पहुंचा। इस बार उसने शराब के अलावा दूसरे कई ड्रग्स भी दिए। मैं एक सड़क किनारे गया और वहां बैठकर शराब पी… फिर गांजा और अलग-अलग तरह के ड्रग्स लिया। फिर क्या हुआ… मुझे कुछ पता नहीं। रातभर वहीं बेहोश पड़ा रहा। सुबह आंख खुली, तो देखा कि ऑफिस का लैपटॉप, मोबाइल, मेरा सूट-बूट… सब गायब था। यहां तक कि किसी ने मेरे कपड़े तक उतार लिए थे। सिर्फ अंडरवियर में पड़ा था। उस घटना के बाद फिर वही पुराना सिलसिला शुरू हो गया। रोज शराब पीने लगा। ऑफिस से निकलते ही सीधे ड्रग्स खोजने निकल जाता। मम्मी-पापा को शक हुआ। एक दिन वे अहमदाबाद आए और मुझे इस रिहैबिलिटेशन सेंटर में डाल दिया। तब से यहीं पड़ा हूं। मनोजित कमरे की दीवारों को देखते हुए कहते हैं- सब कहते हैं ये इलाज की जगह है… लेकिन मुझे ये जेल लगती है। मनोजित के साथ ही इस रिहैबलिशेन सेंटर में विनेश भी पिछले ढाई महीने से भर्ती हैं। वह वडोदरा के रहने वाले हैं। विनेश बताते हैं- पापा डॉक्टर हैं और मां बिजनेसमैन और मैंने बीबीए की पढ़ाई की है। पहली शादी टूटने के बाद पापा ने दूसरी शादी कर ली थी। पढ़ाई के दौरान ही दिल्ली के एक दोस्त के साथ पहले शराब पीना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे ड्रग्स लेने की आदत लगी। जब शराब पीकर घर आता, तब पापा मम्मी से कहते- देखो अपने संस्कारी बेटे को। तुमने शराबी बेटा पैदा किया है। जब मुझे लगने लगा कि मेरी वजह से मम्मी-पापा के बीच लड़ाई हो रही है, तब मैंने घर जाना बंद कर दिया। एक बार तो 23 दिन तक अपने दोस्त के फ्लैट पर रहा। वहां शराब, गांजा, नशे के लिए तमाम तरह के ड्रग्स ले रहा था। फ्लैट पर लड़कियां भी आती थीं। वे भी नशा करती थीं। उन्हीं में से एक लड़की से प्यार हो गया था। मेरा एक दोस्त पहले से उसे पसंद करता था। मैं लड़की को एक ग्राम ड्रग्स देता, तो मेरा दोस्त उसे 5 ग्राम ड्रग्स देता। आखिर में वह मुझे छोड़कर उस लड़के के साथ रहने लगी। उसके बाद और ज्यादा नशा करने लगा था। ड्रग्स लेकर पूरे दिन कमरे में बंद रहता। एक दिन घर वालों को पता चल गया। मम्मी मुझसे मिलने आईं। मेरी हालत देखर बहुत नाराज हुईं। उसके बाद यहां रिहैबिलेशन सेंटर लेकर आईं और भर्ती कर दिया। तब से यहीं हूं। सोचता हूं आखिरकार मेरे साथ के लड़के कनाडा, अमेरिका में अच्छी नौकरी कर रहे हैं और मैं ड्रग्स की वजह से इस जेलखाने में पड़ा हूं। खुद को बर्बाद कर लिया। विनेश के साथ ही सूरत के रहने वाले 22 साल के हिमांशु भी बैठे हैं। कहते हैं- दोस्तों ने पहले शराब पिलाना सिखाया, फिर ड्रग्स की लत लगाई। हालात इतनी खराब हो गई कि मेरे मौसा को पता चल गया। वह मुझे बहुत मानते हैं। उन्होंने इस रिहैबिलेशन सेंटर में लाकर भर्ती कर दिया। सोचता हूं, अच्छा हुआ कि समय रहते यहां आ गया, नहीं तो बाकी लोगों की तरह और ज्यादा बर्बाद हो जाता। ‘लाइफ लाइव’ रिहैबिलिटेशन सेंटर के फाउंडर हरिश केनी कहते हैं- ‘ये हाल गुजरात का है, जहां शराब पर बैन है। हमारे पास इस समय 100 से ज्यादा पेशेंट हैं। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, डिफेंस समेत कई बड़े पेशे के लड़के शामिल हैं। ये नशे के आदी हो चुके हैं। सभी गांजा, चरस, अफीम और तरह-तरह के ड्रग्स लेते थे। अगर सरकार इसे कंट्रोल नहीं करती, तो कुछ ही सालों में गुजरात नशे के मामले में पंजाब को पीछे छोड़ देगा। नोट- पहचान छिपाने के लिए सभी नाम बदल दिए गए हैं। ———————————————- 1- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-जान बचानी थी, तो सिर पर बांध ली भगवा पट्टी:दंगे की तस्वीर ने मेरी जिंदगी बर्बाद की- हिंदुत्व का चेहरा बना, लेकिन मिला कुछ नहीं 2002 गुजरात दंगे के दो पोस्टर बॉय की कहानी, जिनमें हिंदुत्व का चेहरा बने मोची अशोक परमार आज दो वक्त की रोटी को मोहताज हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात सड़क पर सोते हैं। वे उस वक्त 27 साल के थे। आज 51 साल के हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें



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