UN Warns of Further Price Hikes as Supply Chains Disrupt

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नई दिल्ली5 घंटे पहले

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दुनियाभर में खाद्य पदार्थों की कीमतें पिछले तीन साल में सबसे ऊपर पहुंच गई हैं। यूनाइटेड नेशंस (UN) से जुड़े फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) के मुताबिक, अप्रैल में फूड कमोडिटी प्राइस इंडेक्स में 1.6% की बढ़ोत्तरी हुई है।

यह पिछले साल से 2.5% ज्यादा है। इस उछाल की मुख्य वजह अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध है। UN ने आगे और दाम बढ़ने की चेतावनी भी जारी की है।

हॉर्मुज रूट बंद होने से मुश्किलें बढ़ीं

ईरान युद्ध को 10 हफ्ते पूरे हो गए हैं। इसके चलते हॉर्मुज रूट बंद है। इस रास्ते से डीजल और फर्टिलाइजर (खाद) जैसे खेती के लिए जरूरी सामान की आवाजाही रुक गई है।

खाद और ईंधन महंगा होने से किसानों के लिए खेती करना मुश्किल हो रहा है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा।

वेजिटेबल ऑयल और मीट की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ीं

रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर वेजिटेबल ऑयल पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बायो-फ्यूल की मांग बढ़ी है, जिससे वेजिटेबल ऑयल के प्राइज मार्च के मुकाबले 5.9% बढ़े हैं। यह जुलाई 2022 के बाद का सबसे ज्यादा है।

वहीं, मीट की कीमत में 1.2% की बढ़त हुई है, जो अब तक का ऑल-टाइम रिकॉर्ड है। अनाज की कीमतों में भी 0.8% की तेजी देखी गई है।

अभी कंपनियां स्टॉक बेच रहीं, आगे और बढ़ेगी महंगाई

FAO के चीफ इकोनॉमिस्ट मैक्सिमो टोरेरो ने एक इंटरव्यू में बताया कि एग्री-फूड इंडस्ट्री फिलहाल इसलिए बची हुई है, क्योंकि कंपनियां पुराना स्टॉक बेच रही हैं।

उन्होंने कहा, “जैसे ही कच्चे माल और एनर्जी की बढ़ी हुई लागत कंपनियों के खातों में पहुंचेगी, उपभोक्ता (Consumer) के तौर पर हमें महंगाई का तगड़ा झटका लगेगा।”

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह तनाव 90 दिनों से ऊपर खिंचता है, तो 2026 के अंत और 2027 में ‘ग्लोबल फूड क्राइसिस’ (खाद्य संकट) की संभावना काफी बढ़ जाएगी।

अनाज की पैदावार कम होने की आशंका

खराब मौसम और 2026 में गेहूं की बुआई कम होने की खबरों ने भी अनाज के दाम बढ़ा दिए हैं। खाद की बढ़ती कीमतों की वजह से किसान अब ऐसी फसलें उगाने पर विचार कर रहे हैं, जिनमें फर्टिलाइजर का इस्तेमाल कम होता हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि कमोडिटी मार्केट में आई इस तेजी का असर रिटेल मार्केट तक पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन खाने की महंगाई बढ़ना अब तय है।

20 जरूरी चीजों में से 16 के दाम 36% तक बढ़े

बैंक ऑफ बड़ौदा के ‘एसेंशियल कमोडिटी इंडेक्स’ के मुताबिक, भारत में अप्रैल महीने में महंगाई सूचकांक सालाना 1.1% और मासिक आधार पर 0.3% बढ़ा। यह अगस्त, 2025 के बाद सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी है। बीते महीने आम जरूरत की 20 में से 16 वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं हैं।

खाने के तेल, टमाटर और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों में 36% तक बढ़ोतरी ने अप्रैल में रिटेल महंगाई 4% तक पहुंचा दी है। आगामी महीनों में महंगाई और बढ़ने का जोखिम बना हुआ है क्योंकि मई में भी कीमतें बढ़ रही हैं।

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