शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में महिला सुरक्षा पर किया समाज से आत्ममंथन का आह्वान, कहा- बेटियों की सुरक्षा पूरे समाज की जिम्मेदारी

भोपाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए समाज से आत्ममंथन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बेटियों का मान-सम्मान और उनकी सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। शिवराज सिंह चौहान भोपाल में आयोजित ‘नवगति’ एजुकेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उनके सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने समाज में व्याप्त विडंबनाओं पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि ऐसी नौबत क्यों आई कि आज बेटियों को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आम जीवन के उदाहरण देते हुए कहा कि क्या किसी बेटी को ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ खाने के लिए भी सोचना पड़े, ऐसी स्थिति समाज के लिए शर्मनाक है। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि आज की परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं जहां बेटियों को छोटी-छोटी चीजों के लिए भी असुरक्षित महसूस करना पड़ता है या उन्हें हिचकिचाहट होती है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि यदि बेटियां पुरुषों पर भरोसा नहीं करेंगी तो समाज कैसे आगे बढ़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राष्ट्र या समाज की प्रगति तभी संभव है जब उसकी आधी आबादी यानी महिलाएं और बेटियां निर्भय होकर अपने जीवन का निर्वाह कर सकें। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विश्वास का संकट समाज के पतन का कारण बनता है। अगर बेटियां घर से बाहर निकलने में डरेंगी या पुरुषों पर भरोसा करने में संकोच करेंगी, तो समाज की नींव ही कमजोर हो जाएगी। इसलिए हर वर्ग, हर समुदाय और हर व्यक्ति को इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा।
‘नवगति’ एजुकेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम के मंच से शिवराज सिंह चौहान ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने-अपने स्तर पर आत्ममंथन करें। उन्होंने कहा कि कानून और सरकारें अपनी जगह काम कर रही हैं, लेकिन जब तक समाज की सोच नहीं बदलेगी, बेटियों की सुरक्षा और उनका सम्मान पूरी तरह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हमें खुद से पूछना होगा कि हम किस दिशा में जा रहे हैं और हमारे व्यवहार में क्या बदलाव की आवश्यकता है। आत्ममंथन के बिना कोई स्थायी बदलाव संभव नहीं है।
शिवराज सिंह चौहान ने शिक्षा को बेटियों के सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि ‘नवगति’ जैसे स्कॉलरशिप कार्यक्रम बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं। शिक्षित बेटी न केवल अपना भविष्य संवारती है, बल्कि पूरे परिवार और समाज को दिशा देने में सक्षम होती है। उन्होंने छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली बेटियों को बधाई दी और कहा कि वे अपनी मेहनत और लगन से समाज में एक नई मिसाल कायम करें। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार बेटियों की शिक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके साथ ही समाज को भी अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को समझना होगा।
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों, शिक्षकों और समाजसेवियों से भी अनुरोध किया कि वे बेटियों के प्रति संवेदनशील वातावरण बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा केवल किसी एक दिन या किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे हमारे दैनिक जीवन और आचरण का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस समाज में बेटियां सुरक्षित और सम्मानित होती हैं, वही समाज वास्तव में विकसित और सभ्य कहलाता है।
भोपाल में आयोजित इस ‘नवगति’ एजुकेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करके उनके सपनों को साकार करना था। इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन के माध्यम से शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक चेतना और महिला सुरक्षा के मुद्दे को भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि यह बेटियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का एक जरिया है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में पुनः इस बात पर बल दिया कि बेटियों का मान-सम्मान और सुरक्षा पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जहां हर बेटी बिना किसी भय के अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर हो सके। शिवराज सिंह चौहान का यह संबोधन समाज में महिला सुरक्षा और बेटियों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंतन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

