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5 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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गर्मियों में डाइजेस्टिव सिस्टम स्लो होने से अपच और एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है। ज्यादातर लोग सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट में भारीपन या गले में जलन सामान्य समझकर एसिडिटी के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर ये समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
साइंस जर्नल ‘नेचर’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, ज्यादा गर्मी, डिहाइड्रेशन और तापमान में बदलाव एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
हालांकि खानपान और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव व कुछ घरेलू उपायों से एसिडिटी से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज जानेंगे कि-
- गर्मियों में एसिडिटी क्यों बढ़ती है?
- क्या एसिडिटी किसी बीमारी का संकेत भी हो सकती है?
- एसिडिटी का घरेलू इलाज क्या है?
एक्सपर्ट: डॉ. साद अनवर, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रो सर्जरी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर
सवाल- एसिडिटी क्या है?
जवाब- एसिडिटी एक कॉमन डाइजेस्टिव इश्यू है।
इसके कारण डाइजेस्टिव एंजाइम (एक तरह का एसिड) जरूरत से ज्यादा बनने लगता है। यह भोजन नली (फूड पाइप) में भी आ सकता है। यही खट्टी डकार है।
इससे पेट में भारीपन, सीने और गले में जलन महसूस हो सकती है।
सवाल- एसिडिटी क्यों होती है?
जवाब- पेट में एसिड प्रोडक्शन बढ़ने पर या ये एसिड भोजन नली में आने पर एसिडिटी की समस्या होती है। इसके सभी कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन लोगों को एसिडिटी की समस्या ज्यादा होती है?
जवाब- कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। जैसेकि-
- जिनकी लाइफस्टाइल अनहेल्दी है।
- जो डिनर देर से करते हैं।
- जो ज्यादा कैफीन लेते हैं।
- जो जंक फूड खाते हैं।
- जो ओवरवेट हैं।
- जो स्मोकिंग करते हैं।
- जो शराब पीते हैं।
सवाल- गर्मियों में एसिडिटी की समस्या क्यों बढ़ती है?
जवाब- गर्मियों में शरीर का ब्लड फ्लो स्किन की ओर बढ़ जाता है। इससे पाचन तंत्र को जरूरत से कम ब्लड मिलता है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
इसके अलावा कम पानी पीने, लंबे समय तक खाली पेट रहने और अनियमित खानपान से भी पेट में एसिड का संतुलन बिगड़ सकता है।
सवाल- क्या एसिडिटी किसी बीमारी का संकेत भी हो सकती है?
जवाब- कभी-कभार होने वाली एसिडिटी खानपान और लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है। अगर ये अक्सर हो तो किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकती है। जैसेकि-
- गैस्ट्रोईसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD)
- पेट का अल्सर
- गैस्ट्राइटिस (पेट में सूजन)
- पाचन तंत्र से जुड़ी अन्य समस्याएं
- इसलिए अगर-
- एसिडिटी बार-बार हो।
- दवाओं से राहत न मिले।
- निगलने में परेशानी हो।
- लगातार सीने में जलन हो।
तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सवाल- एसिडिटी के मुख्य लक्षण क्या हैं?
जवाब- एसिडिटी होने पर शरीर कुछ संकेत देता है। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- एसिडिटी का घरेलू इलाज क्या है?
जवाब- हल्की-फुल्की एसिडिटी को कुछ आसान उपायों से मैनेज किया जा सकता है। ये उपाय पेट को ठंडक देते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं। ग्राफिक में घरेलू इलाज देखिए-

आइए, अब इन घरेलू उपायों के बारे में बताते हैं
ठंडा दूध
ठंडे दूध में मौजूद कैल्शियम एसिड को न्यूट्रल करता है और सीने की जलन कम करता है। हालांकि जिन्हें दूध से एलर्जी होती है, उन्हें इससे बचना चाहिए।
सौंफ
सौंफ पाचन के लिए बेहद फायदेमंद होती है। इसमें मौजूद ‘एनेथोल’ कंपाउंड गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी को कम करता है। खाने के बाद सौंफ चबाना या इसकी चाय पीना फायदेमंद है।
छाछ
छाछ पेट को ठंडक देता है और पाचन सुधारता है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड एसिडिटी को कम करने में मदद करता है। हल्का नमक और भुना जीरा मिलाकर पीना फायदेमंद है।
नारियल पानी
नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है और पेट का pH बैलेंस बनाए रखता है। इससे एसिडिटी और जलन दोनों में राहत मिलती है।
केला
केला नेचुरल एंटासिड की तरह काम करता है। यह पेट के एसिड को बैलेंस करता है। रोज एक पका हुआ केला खाने से एसिडिटी में राहत मिल सकती है।
अदरक
अदरक एसिडिटी और गैस की समस्या में फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद ‘जिंजरोल’ कंपाउंड पाचन को बेहतर बनाता है और पेट में बन रहे अतिरिक्त एसिड को कम करने में मदद करता है।
अजवाइन
अजवाइन में मौजूद ‘थाइमोल’ नामक एक्टिव कंपाउंड पाचन को तेज और एसिडिटी को कम करता है। इसे पानी में उबालकर लेने से तुरंत राहत मिल सकती है।
सवाल- एसिडिटी से बचने के लिए क्या करें?
जवाब- एसिडिटी से बचाव के लिए रोजमर्रा की आदतों में थोड़ा बदलाव करना बहुत असरदार साबित होता है। ग्राफिक में एसिडिटी से बचने के आसान टिप्स देखिए-

सवाल- एसिडिटी हो तो खानपान और लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?
जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि-
- सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत डालें।
- खाना हमेशा अच्छी तरह चबाकर खाएं।
- बहुत गर्म या बहुत ठंडा फूड एक साथ लेने से बचें।
- बहुत ज्यादा तेल और मसालेदार फूड न खाएं।
- डाइट में हल्की व सुपाच्य चीजें शामिल करें।
- खाली पेट चाय/कॉफी पीने से बचें।
- दो मील्स के बीच लंबा गैप न रखें, समय-समय पर हल्का स्नैक लें।
- डाइट में ट्रिगर फूड्स पहचानकर उन्हें अवॉइड करें।
- हमेशा सोने से 2-3 घंटे पहले ही डिनर करें।
- खाने के बाद कुछ देर तक सीधे बैठें या टहलें।
- सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा रखें और बाईं करवट सोएं।
- वजन कंट्रोल में रखें।
- रोज कम-से-कम आधे घंटे एक्सरसाइज करें।
- ज्यादा टाइट कपड़े/बेल्ट ने पहनें (पेट पर दबाव बढ़ता है)।
- पर्याप्त नींद लें, नींद की कमी भी एसिडिटी ट्रिगर करती है।
सवाल- कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
जवाब- अगर एसिडिटी कभी-कभी हो तो घरेलू उपाय और लाइफस्टाइल बदलाव से ठीक हो सकती है। लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। जैसेकि-
- हफ्ते में कई बार या रोज एसिडिटी हो।
- दवाइयों या घरेलू उपायों से आराम न मिल रहा हो।
- सीने में तेज दर्द या दबाव महसूस हो।
- निगलने में दिक्कत या गले में जलन बनी रहे।
- बार-बार उल्टी, खून की उल्टी या काला मल दिखे।
- बिना कारण वजन कम होने लगे।
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