सांकेतिक भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि मूक-बधिरों के आत्मसम्मान का माध्यम: पूर्व विधायक रवि जोशी


विश्व सांकेतिक भाषा दिवस पर खरगोन में जागरूकता रैली और सभा का आयोजन
खरगोन, मध्य प्रदेश। विश्व सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर खरगोन में बधिरजनों के अधिकार, सम्मान, समानता और सामाजिक सहभागिता को लेकर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। बधिर कल्याण और सामुदायिक विकास निमाड़ बधिर संघ के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बधिरजन शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत शहर के किला मैदान से जागरूकता रैली के साथ हुई। रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए गौरीधाम स्थित दिव्यानी विश्राम भवन पहुंची, जहां रैली सभा में परिवर्तित हो गई। रैली के दौरान सांकेतिक भाषा के महत्व और बधिरजनों के अधिकारों को लेकर लोगों को जागरूक किया गया।
सांकेतिक भाषा में हुई अधिकारों पर चर्चा
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सभा में बधिरजनों के मानवाधिकार, समानता, सम्मान और समाज में उनकी भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सांकेतिक भाषा के माध्यम से ही चर्चा की गई।
संघ के सचिव प्रमोद पंवार एवं अनुवादक प्रीति लालवानी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के बीच सांकेतिक भाषा के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना था। उन्होंने कहा कि बधिरजनों को भी समाज में समान अवसर, सम्मान और अधिकार मिलना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि आयोजन के माध्यम से बधिर समुदाय के प्रति समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने तथा समावेशी दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया।
पूर्व विधायक रवि जोशी ने की कार्यक्रम की सराहना
कार्यक्रम में पूर्व विधायक रवि जोशी भी शामिल हुए। उन्होंने बधिरजनों द्वारा सांकेतिक भाषा में की जा रही चर्चा की सराहना की।
उन्होंने कहा कि सांकेतिक भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बधिरजनों के आत्मसम्मान और अपनी बात रखने के अधिकार का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि बधिरजनों के लिए आयोजित इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम समाज में उनके अधिकारों और सम्मान को लेकर सकारात्मक संदेश देते हैं।
रवि जोशी ने कहा कि बधिर कल्याण संघ द्वारा आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम मूक-बधिर एवं अन्य दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान, सहभागिता और समाज की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सहयोग करने की अपील की।
समानता और समावेशी समाज का दिया संदेश
विश्व सांकेतिक भाषा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से बधिर समुदाय के लोगों ने समाज को यह संदेश दिया कि संवाद के अलग-अलग माध्यम हो सकते हैं, लेकिन अधिकार और सम्मान सभी के लिए समान होने चाहिए।
आयोजकों ने कहा कि सांकेतिक भाषा को लेकर आम लोगों में जागरूकता बढ़ने से बधिरजनों के साथ संवाद आसान होगा और शिक्षा, रोजगार तथा सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में बधिर समुदाय के सदस्यों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता एवं अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। आयोजन के दौरान सांकेतिक भाषा के महत्व और बधिरजनों के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

