इंदौर उद्योग समागम: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने युवाओं से कहा- सेना में जाना ही देश सेवा नहीं, डिफेंस स्टार्टअप बनाकर भी जुड़ें

इंदौर। वंदे भारत न्यूज़। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में आयोजित उद्योग समागम कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवाओं को रक्षा क्षेत्र में उद्यमिता अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश सेवा केवल सेना में भर्ती होकर ही नहीं की जा सकती। यदि कोई युवा सेना में जाने की इच्छा रखता है लेकिन किसी कारणवश वह भर्ती प्रक्रिया में चयनित नहीं हो पाता है, तो उसके लिए उद्यमिता एक बेहतरीन और व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकता है। युवा अपने स्टार्टअप या छोटे उद्योग के माध्यम से सेना और रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक उपकरण, पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, सॉफ्टवेयर और आधुनिक तकनीक विकसित कर सकते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इंदौर में आयोजित इस उद्योग समागम के दौरान युवाओं, छात्रों और उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में रक्षा क्षेत्र पूरी तरह से बदल रहा है। पहले रक्षा उपकरणों का निर्माण केवल बड़ी सरकारी कंपनियों या विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर करता था, लेकिन अब सरकार ने इस नीति में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने बताया कि ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में युवा अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स को भारतीय सेना और रक्षा प्रतिष्ठानों द्वारा सीधे तौर पर अपनाया जा रहा है।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में मौजूद अवसरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध और सुरक्षा चुनौतियां अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई हैं। साइबर स्पेस में होने वाले खतरों से निपटने के लिए अत्यधिक कुशल तकनीकी समाधानों की आवश्यकता है। ऐसे में जो युवा साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में दक्षता रखते हैं, वे रक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप शुरू करके देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम योगदान दे सकते हैं। यह देश सेवा का एक ऐसा माध्यम है जिसमें युवाओं को न केवल सम्मान मिलता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत होने का अवसर प्राप्त होता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें बड़े सपने देखने चाहिए और उन सपनों को पूरा करने के लिए तकनीक का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक भी लगातार नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं और वे घरेलू स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। सरकार का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है, और यह लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है जब देश के युवा इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि छोटे स्तर पर शुरू किया गया कोई भी तकनीकी उद्योग भविष्य में रक्षा क्षेत्र की बड़ी जरूरतों को पूरा करने वाला संस्थान बन सकता है।
इंदौर में आयोजित इस उद्योग समागम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं और उद्यमियों को रक्षा क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराना था। कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे एक छोटा स्टार्टअप सेना के लिए जरूरी पार्ट्स या सॉफ्टवेयर विकसित कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षा क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां लागू की हैं। इन नीतियों के तहत युवाओं को फंडिंग, मेंटरशिप और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है ताकि वे अपने विचारों को वास्तविक उत्पादों में बदल सकें।
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर भी जोर दिया कि उद्यमिता केवल मुनाफा कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का एक अभिन्न अंग है। जब कोई युवा रक्षा क्षेत्र के लिए कोई नई तकनीक या उपकरण बनाता है, तो वह सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान दे रहा होता है। उन्होंने कहा कि सेना में भर्ती होना निश्चित रूप से गर्व की बात है, लेकिन हर कोई सेना में नहीं जा सकता। ऐसे में उन युवाओं के पास निराश होने का कोई कारण नहीं है। उनके पास अपनी प्रतिभा और तकनीकी ज्ञान का उपयोग करके देश की सेवा करने का एक और बहुत प्रभावी रास्ता खुला हुआ है।
उद्योग समागम के दौरान यह भी बताया गया कि इंदौर जैसे शहर, जो पहले से ही शिक्षा और तकनीक के हब के रूप में पहचाने जाते हैं, रक्षा स्टार्टअप्स के लिए एक आदर्श स्थान बन सकते हैं। यहां मौजूद इंजीनियरिंग कॉलेज, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों से निकलने वाले छात्रों के पास वह तकनीकी क्षमता है जो रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा कर सकती है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इन संस्थानों के छात्रों से अपील की कि वे पढ़ाई पूरी करने के बाद केवल नौकरी की तलाश में न रहें, बल्कि खुद का कुछ नया बनाने की सोचें।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अभियान अब तेज हो चुका है और इसमें युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्युनिकेशन सिस्टम और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स को सरकार और सेना दोनों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। इंदौर का यह उद्योग समागम युवाओं के लिए एक नई दिशा और प्रेरणा का स्रोत साबित हुआ है, जिससे आने वाले समय में शहर और राज्य से कई नए रक्षा स्टार्टअप सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

