26 मई को गृहमंत्री अमित शाह ने एक पोस्ट लिखी- ‘अवैध घुसपैठ से हो रहा अन-नैचुरल डेमोग्राफिक चेंज, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।’
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बस इतने से शब्दों ने पूरे देश में बहस छेड़ दी कि कुछ बड़ा होने वाला है। लेकिन ये पोस्ट अकेली नहीं थी। इसी महीने 3 फैसले आए, जिनका निशाना एक है- अवैध घुसपैठ।
क्या हैं ये फैसले, क्या सरकार कुछ बड़ा करने वाली है और क्या इससे देश के मुसलमानों को चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: अवैध घुसपैठ से जुड़े कौन से 3 बड़े फैसले हुए हैं?
जवाबः ये 3 फैसले हैं…
1. बंगाल में 600 एकड़ सीमाई जमीन BSF को देना
- 9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के सीएम पद की शपथ ली। 11 मई को कैबिनेट की पहली ही बैठक में घोषणा कर दी- BSF को बांग्लादेश से लगी सीमा के इलाके की 600 एकड़ जमीन दी जाएगी। BSF इसमें बाड़ लगाएगी। जिससे अवैध घुसपैठ से निजात मिलेगी।
- दरअसल, भारत के 5 राज्य- पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और असम से बांग्लादेश की कुल 4,097 किमी की सीमा लगी है। इसमें करीब 2,217 किमी की सीमा पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच है।
- केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, कुल 4,097 किमी में से 3,240 किमी की सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी है। करीब 850 किमी की सीमा पर बाड़ेबंदी बाकी है।
- वहीं पश्चिम बंगाल में 2,217 किमी सीमा में से 1,648 किमी में बाड़ है और 569 किमी में बाड़ेबंदी बाकी है।

11 मई 2026 को हावड़ा के नाबन्ना में CM शुभेंदु ने पहली कैबिनेट बैठक की, जिसमें उन्होंने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए BSF को जमीन देने का ऐलान किया।
2. भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट
- 22 मई 2026 को गृह मंत्री अमित शाह ने BSF के कार्यक्रम में ऐलान किया कि सरकार अगले साल ‘स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ लॉन्च करेगी। इसके दायरे में पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी कुल करीब 6,000 किमी लंबी सीमा आएगी।
- इस बॉर्डर को तकनीकी मदद से अभेद्य बनाया जाएगा। इसके लिए AI-पावर्ड सर्विलांस, ड्रोन, रडार, स्मार्ट कैमरे, थर्मल इमेजिंग सिस्टम, अंडरग्राउंड सेंसर्स और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगेंगे।
- इसका मकसद सीमा पार से घुसपैठ और ड्रग्स, हथियार वगैरह भेजने के लिए ड्रोन एक्टिविटी को रोकना है। ड्रोन एक्टिविटी रोकने के लिए 24×7 का ऑटोमेटेड सर्विलांस ग्रिड बनाया जाएगा।
3. अन-नैचुरल डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी
- 26 मई को अमित शाह ने एक हाई लेवल कमेटी का ऐलान किया। पूरे भारत में हो रहे अन-नैचुरल डेमोग्राफिक चेंज का इवैल्यूएशन करेगी। फिर इसका सुनियोजित समाधान देगी।
- मोटे तौर पर डेमोग्राफी का मतलब है- किसी इलाके या देश की जनसंख्या से जुड़े खास आंकड़े या स्टैटिस्टिक्स। यानी साइंटिफिक तरीके से ये बताना कि किसी इलाके में उम्र, लिंग, जाति, समुदाय वगैरह के आधार पर कितनी आबादी है।
- जब किसी जगह की आबादी सामान्य तरीके जैसे- जन्म और मृत्यु दर के बजाय बाहरी फैक्टर्स जैसे- नए लोग या घुसपैठियों के बसने की वजह से बदलने लगे और इससे वहां का सामाजिक, धार्मिक ताना-बाना बदल जाए, तो इसे अन-नैचुरल डेमोग्राफिक चेंज कहते हैं।
- इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर होंगे। कमेटी में एक जनगणना आयुक्त के साथ रिटायर्ड दुर्गा शंकर मिश्रा, रिटायर्ड IPS बालाजी श्रीवास्तव, अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि और गृह मंत्रालय में विदेशी नागरिकों और प्रवास के मामलों के संयुक्त सचिव होंगे।

26 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने X पर अन-नैचुरल डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी बनाने का ऐलान किया।
सवाल-2: डेमोग्राफिक चेंज के लिए बनी हाई लेवल कमेटी क्या करेगी?
जवाबः गृह मंत्रालय के मुताबिक, कमेटी 6 काम करेगी…
- डेमोग्राफिक चेंज से जो चुनौतियां पैदा हुईं, उन पर विचार करना।
- डेमोग्राफिक चेंज की वजहें- जैसे सीमापार से अवैध घुसपैठ, आर्थिक वजहें और दूसरे सोशियो-इनवायरमेंटल फैक्टर्स की स्टडी करना।
- डेमोग्राफिक चेंज के पीछे कुछ और अंडरलाइंग फैक्टर- जैसे बस्तियां बसाने के असामान्य पैटर्न, माइग्रेशन वगैरह की पहचान करना।
- धार्मिक या सामाजिक कम्युनिटीज में पॉपुलेशन चेंज की एनालिसिस करना। खास तौर पर वहां, जहां पॉपुलेशन नॉर्मल ट्रेंड से काफी अलग तरीके से बदल रही है।
- देश में मौजूद घुसपैठियों को कानूनी तरीके से पहचानने, हिरासत में लेने और डिपोर्ट करने की स्थायी मैकेनिज्म बनाना।
- बॉर्डर मैनेजमेंट, आबादी कंट्रोल करने और इससे जुड़ी चीजों को मॉनिटर करने के लिए एक मैकेनिज्म सुझाना।
इनके अलावा कमेटी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अवैध घुसपैठ, डेमोग्राफिक चेंज के मामले में बेहतर को-ऑर्डिनेशन के लिए पॉलिसी बनाने का भी सुझाव देगी।
सवाल-3: तो क्या वाकई भारत में डेमोग्राफी अप्राकृतिक रूप से बदल रही है?
जवाबः कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि असामान्य वजहों से देश के कुछ इलाकों में डेमोग्राफिक बैलेंस बिगड़ रहा है…
1. बांग्लादेश से घुसपैठ के चलते मूल-निवासी घट रहे
- 1998 में असम के पूर्व राज्यपाल एस.के. सिन्हा ने राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट दी थी। इसमें कहा गया…
- बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ के चलते असम के कई सीमाई जिलों में आबादी का संतुलन बदल चुका है। यहां के मूल निवासी अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं।
- ये घुसपैठ असम के बड़े हिस्से को देश से राजनीतिक और सामाजिक तौर पर काटने का लॉन्गटर्म खतरा बन सकती है।
2. बंगाल, बिहार के सीमाई इलाकों में मुस्लिम आबादी बढ़ी
- ‘सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज के रिसर्चर डॉ. जेके बजाज और डॉ. एमडी श्रीनिवास ने धार्मिक जनसांख्यिकी पर रिसर्च की है। उनके मुताबिक…
- 1951 में प. बंगाल की आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 19.5% थी, जो 2011 में 27% हो गई।
- पश्चिमी जिले- बांकुड़ा, पुरुलिया में मुस्लिम आबादी स्थिर या थोड़ी बढ़ी, जबकि बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में औसत से 2 से 3 गुनी तक रही।
- बिहार के किशनगंज में 1951 में मुस्लिम आबादी 40% थी, जो 2011 में 68% हो गई। कटिहार, पूर्णिया, अररिया में भी 11-12% तक बढ़ी।
3. सुप्रीम कोर्ट ने घुसपैठ को ‘अघोषित बाहरी आक्रमण’ कहा
- सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में असम में अवैध प्रवासियों की पहचान से जुड़े एक पुराने कानून को रद्द किया। साथ ही बेहद सख्त टिप्पणियां कीं।
- सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक डेटा के आधार पर कहा कि बांग्लादेश से असम में हो रही भारी घुसपैठ ने राज्य के नागरिकों के जीवन पर असर डाला है। ये स्थिति ‘अघोषित बाहरी आक्रमण’ जैसी है। घुसपैठ से असम के कई जिलों की आबादी बढ़ने की दर औसत से बहुत ज्यादा है।
4. हिंदू 7.8% तक घटे व मुस्लिम 4.25% तक बढ़ गए
- मई 2024 में ‘पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद’ ने एक रिसर्च पेपर जारी किया। इसका टाइटल था- ‘शेयर ऑफ रिलीजियस माइनॉरिटीज: एक्रॉस कंट्री-एनालिसिस (1950-2015)’।
- इसे तैयार करने वालों में इकोनॉमिस्ट डॉ. शर्मिका राव भी थीं, जो अब बनी हाई लेवल कमेटी में भी शामिल हैं।
- इसमें कहा गया, ‘1950 से 2015 के बीच कुल आबादी में हिंदू आबादी 7.82% कम हुई। इसी दौरान मुस्लिम आबादी 9.84% से बढ़कर 14.09% हो गई। जबकि ईसाई 0.12% व सिख 0.61% बढ़े।’

सवाल-4: कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार क्या कर सकती है?
जवाबः अवैध घुसपैठ से डेमोग्राफिक चेंज पर लगाम लगाने की इस कोशिश को ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ की पॉलिसी कहा जाता है। कमेटी के सुझाव के आधार पर सरकार 3 बड़े कदम उठा सकती है-
1. अवैध घुसपैठियों की सटीक संख्या तय करना
- गृह मंत्रालय की 1991 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में करीब 7 लाख अवैध बांग्लादेशी चिन्हित किए गए थे।
- पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने 2004 में संसद में बताया था, ‘देश में 1 करोड़ 20 लाख बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं।’
- 16 नवंबर 2016 को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में कहा कि ये संख्या 2 करोड़ के आसपास है।
- कहा जाता है कि अभी देश में 5 करोड़ से ज्यादा अवैध घुसपैठिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद सरकार अवैध घुसपैठ पर पुख्ता आंकड़ा बता सकती है।
- सीनियर जर्नलिस्ट हर्षवर्धन के मुताबिक, ‘ये पता करना चाहिए कि इनकी संख्या एकदम से इतनी कैसे बढ़ गई कि कई राज्यों की डेमोग्राफी बदलने लगी?’
2. होल्डिंग सेंटर्स में रख सकती है
- सरकार होल्डिंग सेंटर्स बनाकर घुसपैठियों को वहां रख सकती है। गृह मंत्रालय ने 2025 में सभी राज्यों को हर जिले में होल्डिंग सेंटर्स बनाने के निर्देश दिए थे। शुभेंदु अधिकारी ने भी बंगाल में ऐसा ही निर्देश जारी किया है।
- फिलहाल देश में 10 होल्डिंग सेंटर्स हैं। इनमें से 6 असम में और अन्य 4 दिल्ली, अलवर, अमृतसर और गोवा में हैं। असम के गोलपारा में मौजूद देश के सबसे बड़े होल्डिंग सेंटर में 3 हजार लोगों को रखा जा सकता है।

असम के गोलपारा जिले के मतिया में मौजूद देश का सबसे बड़ा होल्डिंग सेंटर। इसमें 3 हजार से ज्यादा लोगों को ठहराया जा सकता है।
3. वापस बांग्लादेश डिपोर्ट कर सकती है
- कमेटी की रिपोर्ट तय करेगी कि किन जिलों में, कितनी संख्या में लोग अवैध रूप से रह रहे हैं।
- इसके बाद राज्य सरकारें इन्हें होल्डिंग सेंटर्स में भेज सकती हैं। अवैध घुसपैठियों को चिन्हित करके BSF या कोस्ट गार्ड्स को सौंपकर वापस बांग्लादेश डिपोर्ट किया जा सकता है।
हर्षवर्धन त्रिपाठी ये भी कहते हैं कि कमेटी की सिफारिशों के आधार पर बॉर्डर और नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े कानून सख्त हो सकते हैं। नागरिकता से जुड़े कानून भी कड़े किए जा सकते हैं।
हालांकि, सरकार के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं-
- भारत-बांग्लादेश के बीच डिपोर्टेशन को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं है। ऐसे में डिपोर्टेशन तभी हो पाता है, जब बांग्लादेश अपने नागरिक की पहचान करके उन्हें वापस आने दे।
- मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच 2,479 लोगों ने भारत से बांग्लादेश जाने की कोशिश की, जिनमें से कुछ को छोड़ ज्यादातर को बांग्लादेश के अधिकारियों ने सीमा पर रोक दिया। ये भी दावा किया कि इनमें से 120 नागरिक भारतीय हैं।
- हर्षवर्धन त्रिपाठी के मुताबिक, ‘हर जिले में होल्डिंग सेंटर बनाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं होगा। बॉर्डर से सटे इलाकों में सेंटर्स बनें, तो BSF और सेना के सहयोग से इन्हें मैनेज करना आसान होगा।’
- हर्षवर्धन बताते हैं, ‘अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशियों को ये एहसास दिलाना होगा कि यहां रहना उनके लिए आसान नहीं है। इसके लिए सरकारी फायदे जैसे- आधार के जरिए आइडेंटिटी और राशन आदि बंद करने होंगे। ऐसा नहीं हुआ, तो वे बांग्लादेश से अपने बाकी लोगों को भी बुलाएंगे। इससे समस्या और बढ़ेगी।’

पश्चिम बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी के बयान के बाद 26 मई को 100 से ज्यादा विदेशी नागरिक नॉर्थ 24 परगना जिले में मौजूद हकीमपुर चेक पोस्ट पर पहुंचने लगे।
सवाल-5: क्या भारतीय मुसलमानों को इससे चिंता करनी चाहिए?
जवाबः सरकार के कदमों से भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के पूर्व उप-कुलपति और संविधान के एक्सपर्ट फैजान मुस्तफा कहते हैं, ‘डेमोग्राफिक चेंज को समझने के लिए बनाई जा रही ये कमेटी महज एक स्टडी करेगी, जिससे भारतीय मुसलमानों को कोई चिंता नहीं होनी चाहिए।’
फैजान मुस्तफा जोर देते हैं कि घुसपैठ जैसी वजहों से डेमोग्राफी नहीं बदली है। वो इस मुद्दे को हेडलाइन मैनेजमेंट मानते हैं।
फैजान के मुताबिक, ‘सरकार इकॉनमी के मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ये कदम उठा रही है। अगर NDA सरकार मानती है कि देश में अवैध घुसपैठियों की संख्या बढ़ी है, तो उसने अपने 12 साल के कार्यकाल में कितने बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया? चुनाव के पहले पश्चिम बंगाल, असम, बिहार में SIR करवाया गया, फिर भी सरकार नहीं बता पाई कि इन राज्यों में घुसपैठियों की संख्या ज्यादा है।’
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रिसर्च सहयोग – प्रथमेश व्यास ———————————————————–
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