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- Nautapa 2026 Heatwave Risk Factors; Loo Symptoms & Warning Signs | Treatment
14 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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नौतपा में गर्मी अपने चरम पर है। भारत के कई शहरों में टेम्परेचर 45°C के पार चला गया है। तेज धूप के साथ चलने वाली गर्म हवाओं से लू (हीटस्ट्रोक) का रिस्क बढ़ गया है। लू लगने पर ‘बॉडी कूलिंग सिस्टम’ ठीक से काम नहीं कर पाता है। समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।
ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और आउटडोर काम करने वाले लोगों के लिए नौतपा ज्यादा खतरनाक हो सकता है। हालांकि डेली रूटीन में कुछ जरूरी बदलाव करके लू के रिस्क से काफी हद तक बचा जा सकता है।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज नौतपा में लू के रिस्क समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- लू लगने के क्या लक्षण हैं?
- किन लोगों को लू का रिस्क ज्यादा होता है?
- इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
एक्सपर्ट: डॉ. अली शेर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली
सवाल- लू क्या है और नौतपा में ये क्यों बढ़ जाती है?
जवाब- लू (हीटवेव) गर्म और शुष्क हवा होती है, जो गर्मियों में चलती है।
- टेम्परेचर ज्यादा होने के कारण हवा में नमी कम हो जाती है और गर्म हवाएं बढ़ जाती हैं, जिससे लू का रिस्क बढ़ जाता है।
- इस दौरान हवा उत्तर-पश्चिम से पूर्व की बहती है, ये अक्सर गर्म और शुष्क होती है। इससे लू का रिस्क होता है।
सवाल- लू और सामान्य गर्मी में क्या फर्क है?
जवाब- दोनों की गंभीरता और शरीर पर असर थोड़ा अलग होता है।
सामान्य गर्मी
- यह मौसम के अनुसार तापमान बढ़ने की स्थिति है।
- शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करता रहता है।
- अगर हाइड्रेटेड बॉडी को और छांव मिल जाए तो शरीर जल्दी सामान्य हो जाता है।
- आमतौर पर जानलेवा नहीं होती, लेकिन असहज जरूर लगती है।
लू (हीटवेव)
- जब तापमान बहुत ज्यादा (40-45°C या उससे ऊपर) पहुंच जाए और तेज, गर्म, शुष्क हवा चले, तो उसे लू कहते हैं।
- यह शरीर के कूलिंग सिस्टम (पसीना) को फेल कर सकती है।
- लंबे समय तक लू में रहने से हीट एग्जॉशन या हीट स्ट्रोक हो सकता है।
- यह खतरनाक और कभी-कभी जानलेवा भी हो सकती है।
सवाल- क्या सिर्फ धूप में रहने से ही लू लगती है?
जवाब- नहीं, सिर्फ धूप में रहने से ही लू नहीं लगती। लू का कारण शरीर का जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाना है, जो कई परिस्थितियों में हो सकता है। जैसेकि-
- बहुत गर्म और बंद जगह में रहना।
- पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)।
- हैवी वर्क या एक्सरसाइज।
- टाइट या मोटे कपड़े पहनना।
सवाल- लू लगने के क्या संकेत हैं?
जवाब- लू लगने पर शरीर कई संकेत देता है। इन्हें समय रहते पहचानना जरूरी है, क्योंकि हालत तेजी से गंभीर हो सकती है। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन लोगों को लू लगने का रिस्क ज्यादा होता है?
जवाब- कुछ लोगों में लू लगने का रिस्क ज्यादा होता है, इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- दिन के किस समय लू का खतरा सबसे ज्यादा होता है?
जवाब- दिन में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच लू का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
- इस दौरान सूर्य की किरणें सबसे तेज और सीधी पड़ती हैं।
- तापमान अपने चरम (पीक) पर होता है।
- गर्म और शुष्क हवाएं (लू) तेज चलती हैं।
इससे-
- शरीर तेजी से डिहाइड्रेट होता है।
- शरीर का तापमान जल्दी बढ़ जाता है।
- लंबे समय तक बाहर रहने पर हीटस्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है।
इसलिए इस समय बाहर निकलने से बचें। अगर जरूरी हो तो सिर ढककर, पानी साथ लेकर ही निकलें।

सवाल- लू के समय घर से बाहर निकलते समय कौन सी जरूरी चीजें साथ रखें?
जवाब- नौतपा में घर से बाहर निकलते समय कुछ जरूरी चीजें साथ रखने से आप हीट स्ट्रोक के खतरे से बच सकते हैं। जैसे-
- पानी की बोतल
शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए।
- ORS या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक
पसीने से निकले पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति के लिए।
- गमछा/स्कार्फ या टोपी
सिर और चेहरे को तेज धूप से बचाने के लिए।
सूरज की सीधी किरणों से बचने के लिए।
- सनस्क्रीन
स्किन को तेज धूप से बचाने के लिए।
- सनग्लासेस
आंखों को तेज धूप और गर्म हवा से बचाने के लिए।
- हल्का स्नैक
कमजोरी और चक्कर से बचने के लिए।
सवाल- लू से बचने के लिए क्या करें?
जवाब- नौतपा के दौरान लू से बचने के लिए रोजमर्रा की आदतों में थोड़े बदलाव बेहद असरदार साबित होते हैं। लू से बचने के सभी टिप्स ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या लू से बचने के लिए खानपान में बदलाव जरूरी है?
जवाब- हां, सही डाइट शरीर को ठंडा रखने, पानी की कमी से बचाने और एनर्जी बनाए रखने में मदद करती है।
लू से बचाव के लिए क्या खाएं-पिएं?
- पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लें।
(जैसे-पानी, ORS, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी)
- पानी से भरपूर फल खाएं।
(जैसे-तरबूज, खरबूजा, खीरा, संतरा)
- हल्का और ताजा खाना खाएं।
(जैसे-दाल, सब्जी, सलाद)
- नेचुरल कूलिंग ड्रिंक्स लें।
(जैसे-आम पना, सत्तू का घोल, बेल का शरबत)
- नमक और चीनी का संतुलन बनाए रखें।
किन चीजों से बचें?
- बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजें
- मसालेदार खाना
- जंक फूड/अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड
- ज्यादा चाय-कॉफी
- कोल्ड ड्रिंक
- आइसक्रीम
- शराब
सवाल- बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल कैसे रखें?
जवाब- इसके लिए कुछ बाताें का खास ख्याल रखें। जैसेकि-
- दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर न निकलने दें।
- थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, ORS, छाछ या नारियल पानी देते रहें।
- बच्चों को खेलते समय पानी पीने की आदत डालें।
- ताजा, हल्का और पानी से भरपूर चीजें खिलाएं।
- ढीले, हल्के रंग के और सूती कपड़े पहनाएं।
- पंखा, कूलर या एसी का इस्तेमाल करें।
चक्कर, कमजोरी, उल्टी, तेज बुखार, ज्यादा पसीना या सुस्ती जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।
सवाल- हीटस्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत क्या करें?
जवाब- लू लगने पर तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कुछ बाताें का खास ख्याल रखें। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- डॉक्टर को कब दिखाएं?
जवाब- इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं-
- तेज बुखार (104°F या उससे ज्यादा)
- बेहोशी या बार-बार चक्कर आना
- कन्फ्यूजन, बोलने में दिक्कत या अजीब व्यवहार
- लगातार उल्टी या पानी न रुकना
- पसीना न होना
- तेज या इर्रेगुलर हार्ट रेट
- दौरे पड़ना
अगर लक्षण हल्के हों तो घर पर प्राथमिक उपचार दिया जा सकता है। लेकिन ऊपर बताए गए गंभीर संकेत दिखते ही तुरंत डॉक्टर से मिलें या नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
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नौतपा के 9 दिन साल के सबसे गर्म दिन माने जाते हैं। इस दौरान तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस समय घर से बाहर निकलना रिस्की होता है।
बहुत से लोगों को रोजमर्रा के काम, ऑफिस या जरूरी जिम्मेदारियों के कारण बाहर निकलना मजबूरी होती है। लेकिन इस दौरान जरा-सी लापरवाही से डीहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, थकान, कमजोरी और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पूरी खबर पढ़ें…
















