सिंगरौली: सेवा सेतु शिविर में कम हितग्राही देख भड़के विधायक रामनिवास शाह, अधिकारियों को दी छुट्टी लेने की नसीहत

सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में नगर निगम द्वारा संचालित किए जा रहे सेवा सेतु अभियान के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया है। मोरवा स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित सेवा सेतु शिविर में हितग्राहियों की बेहद कम संख्या देखकर सिंगरौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामनिवास शाह अचानक भड़क गए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद अधिकारियों के सामने अपनी तीखी नाराजगी जाहिर करते हुए मंच से ही जिला प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। विधायक ने यहां तक कह दिया कि यदि संबंधित विभाग इस तरह के जनकल्याणकारी शिविरों को ठीक से नहीं चला पा रहे हैं, तो उन्हें छुट्टी पर चले जाना चाहिए। यह पूरा घटनाक्रम रविवार को उस समय हुआ जब विधायक रामनिवास शाह मोरवा सामुदायिक भवन में चल रहे सेवा सेतु शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर निगम सिंगरौली की ओर से आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेवा सेतु अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में मोरवा सामुदायिक भवन में एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में विभिन्न सरकारी विभागों के स्टॉल लगाए गए थे, ताकि लोग अपनी समस्याओं का समाधान करा सकें और सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन कर सकें। हालांकि, जब विधायक रामनिवास शाह इस शिविर का जायजा लेने पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वहां हितग्राहियों की संख्या नाममात्र की थी। शिविर में लगे स्टॉलों पर बैठे अधिकारी और कर्मचारी तो मौजूद थे, लेकिन उनके पास काम करवाने आने वाले आम लोगों का भारी अभाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा था। यही दृश्य देखकर विधायक का पारा चढ़ गया और उन्होंने मंच से ही अपनी नाराजगी व्यक्त करनी शुरू कर दी।
विधायक रामनिवास शाह ने शिविर में मौजूद अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार जनता की सुविधा के लिए ऐसे शिविरों का आयोजन कर रही है, लेकिन विभागों की उदासीनता के कारण इनका उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि अगर विभाग इन शिविरों को ठीक से नहीं चला पा रहे हैं और लोगों को जागरूक करके यहां नहीं ला सकते, तो बेहतर होगा कि वे छुट्टी ले लें। विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना जनभागीदारी के ऐसे आयोजनों का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि शिविर का मतलब सिर्फ कुर्सियां लगाना और फाइलें रखना नहीं है, बल्कि असली काम जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंचना है।
अपने संबोधन के दौरान विधायक रामनिवास शाह ने जिला प्रशासन के मुखिया यानी कलेक्टर और नगर निगम के कमिश्नर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मंच से ही यह पूछा कि क्या कलेक्टर और निगम कमिश्नर को इस बात की जानकारी है कि उनके अधीन काम करने वाले विभाग किस तरह से सेवा सेतु अभियान को संचालित कर रहे हैं? विधायक ने इशारा किया कि शीर्ष अधिकारियों की निगरानी के अभाव में ही निचले स्तर पर इस तरह की लापरवाही देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि जब तक कलेक्टर और कमिश्नर खुद ऐसे शिविरों की मॉनिटरिंग नहीं करेंगे और अधिकारियों को जवाबदेह नहीं बनाएंगे, तब तक जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।
सेवा सेतु अभियान मूल रूप से राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, प्रमाण पत्रों और अन्य आवश्यक सेवाओं का लाभ बिना किसी परेशानी के उपलब्ध कराना है। इसके तहत राजस्व, नगर निगम, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास सहित कई विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर दी जाती हैं। ताकि आम जनता को अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। सिंगरौली जैसे औद्योगिक और जनजातीय बहुल क्षेत्र में ऐसे शिविरों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि यहां दूर-दराज के गांवों से लोग शहर आकर अपने काम करवाने में काफी दिक्कतों का सामना करते हैं। ऐसे में शिविर में हितग्राहियों की कम उपस्थिति विभागों की प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है।
विधायक के इस तेवर से शिविर में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। सूत्रों के मुताबिक, विधायक की नाराजगी के बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया और भविष्य में शिविरों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। हालांकि, विधायक ने स्पष्ट कर दिया कि अब वे ऐसे शिविरों की नियमित रूप से जांच करेंगे और यदि फिर से ऐसी ही स्थिति पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
यह पहली बार नहीं है जब सिंगरौली में किसी सरकारी कार्यक्रम को लेकर विधायक रामनिवास शाह ने अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया हो। वे लगातार जनहित के मुद्दों पर प्रशासन से सवाल करते रहे हैं। मोरवा सामुदायिक भवन में हुई इस घटना के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और नगर निगम सिंगरौली इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देता है और सेवा सेतु अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, विधायक के इस बयान और अधिकारियों को दी गई नसीहत ने सिंगरौली के प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है।

