शिवपुरी: पिछोर-मायापुर रोड पर सड़क हादसे में घायल युवक को एसडीओपी प्रमोद शाक्य ने अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में पुलिस अधिकारियों की संवेदनशीलता और तत्परता का एक बेहद सराहनीय उदाहरण सामने आया है। जिले के पिछोर-मायापुर मार्ग पर रात के समय हुए एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए एक युवक की जान समय पर मिले उपचार के कारण बच गई। यह संभव हो सका पिछोर के पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओपी) प्रमोद शाक्य की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से, जिन्होंने सड़क पर तड़पते घायल युवक को देखकर बिना किसी देरी के अपने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर उसे उठाया और सीधे अपनी सरकारी गाड़ी से पिछोर अस्पताल लेकर गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला शिवपुरी जिले के अंतर्गत आने वाले पिछोर क्षेत्र का है। पिछोर और मायापुर को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर रात के अंधेरे में एक सड़क दुर्घटना घटित हुई। इस हादसे में एक युवक बुरी तरह घायल हो गया था। रात का समय होने और सुनसान सड़क होने के कारण घायल युवक लंबे समय तक सड़क किनारे ही दर्द से कराहता हुआ पड़ा रहा। आसपास से गुजरने वाले लोगों ने या तो उसे नहीं देखा या मदद के लिए कोई आगे नहीं आया, जिससे घायल व्यक्ति की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। ऐसे में समय पर यदि उसे चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती, तो उसकी जान जाने का खतरा बना हुआ था।
इसी दौरान, पिछोर के एसडीओपी प्रमोद शाक्य अपने गश्ती दल के साथ क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे। रात्रि गश्त के दौरान उनकी नजर सड़क पर पड़े एक व्यक्ति पर गई। उन्होंने तुरंत अपना वाहन रुकवाया और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पास जाकर देखने पर पता चला कि वह व्यक्ति एक सड़क हादसे का शिकार हो चुका है और गंभीर रूप से घायल अवस्था में सड़क पर बेसुध पड़ा हुआ है। युवक को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी।
एसडीओपी प्रमोद शाक्य ने बिना किसी औपचारिकता या देरी के तुरंत एक्शन लेने का निर्णय लिया। उन्होंने समझ लिया कि एंबुलेंस बुलाने में जो समय लगेगा, वह घायल युवक की जान के लिए घातक साबित हो सकता है। इसलिए उन्होंने अपने साथ मौजूद पुलिस कर्मियों की मदद से घायल युवक को सड़क से सुरक्षित उठाया और उसे अपनी ही सरकारी गाड़ी में लिटाकर सीधे पिछोर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) की ओर रवाना हो गए।
पुलिस अधिकारी द्वारा अपनी गाड़ी से घायल को अस्पताल ले जाने के इस कदम ने रास्ते में अन्य वाहनों को भी रास्ता देने के लिए मजबूर किया और घायल को अत्यंत कम समय में अस्पताल पहुंचा दिया गया। पिछोर अस्पताल पहुंचने पर वहां मौजूद चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ ने तुरंत घायल युवक का प्राथमिक उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने बताया कि युवक की हालत नाजुक थी और यदि उसे थोड़ी भी देर से लाया जाता, तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती थी। समय रहते अस्पताल पहुंचने और त्वरित इलाज शुरू होने के कारण घायल युवक की जान बच गई। फिलहाल उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है और उसकी स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।
एसडीओपी प्रमोद शाक्य की इस मानवीय पहल और त्वरित कार्रवाई की क्षेत्र में हर तरफ प्रशंसा हो रही है। आम जनता और स्थानीय लोगों ने पुलिस अधिकारी के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि वर्दी का असली सम्मान ऐसे ही कामों से होता है। जब पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था के साथ-साथ जनता की जान बचाने के लिए भी इस तरह आगे आते हैं, तो आम लोगों का पुलिस प्रशासन पर विश्वास और भी मजबूत होता है। कई बार सड़क हादसों में घायलों की मौत इसलिए हो जाती है क्योंकि उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पाता है, लेकिन इस मामले में एसडीओपी की सूझबूझ ने एक परिवार को बड़ा सदमा लगने से बचा लिया।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश पुलिस विभाग द्वारा समय-समय पर अधिकारियों और कर्मियों को जनता के प्रति संवेदनशील रहने और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित मदद करने के निर्देश दिए जाते हैं। पिछोर के एसडीओपी प्रमोद शाक्य ने इन निर्देशों का पालन करते हुए न केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया, बल्कि एक संवेदनशील इंसान के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से भी ऐसे कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रेरणास्रोत माना जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सड़क सुरक्षा और हादसों के बाद त्वरित प्रतिक्रिया (गोल्डन आवर) कितनी महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले व्यक्तियों को यदि पहले एक घंटे के भीतर उचित चिकित्सा सुविधा मिल जाए, तो उनकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। एसडीओपी प्रमोद शाक्य ने इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए बिना समय गंवाए घायल को अस्पताल पहुंचाया।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग के लिए यह घटना एक मिसाल कायम करती है। पिछोर-मायापुर रोड पर रात्रि के समय होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस मार्ग पर रात्रि गश्त और प्रकाश व्यवस्था को और बेहतर किए जाने की आवश्यकता है। फिलहाल, घायल युवक की जान बचने से उसके परिजनों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है और एसडीओपी प्रमोद शाक्य तथा उनके पुलिस बल के प्रति आभार व्यक्त किया है।

