चित्रकूट: मंदाकिनी नदी पर पीपा पुल निर्माण संकट में, 1.80 करोड़ की फाइल रीवा पीडब्ल्यूडी में 10 दिन से अटकी; 29 में से सिर्फ 5 पीपे उपयोग लायक

वन्दे भारत न्यूज़, चित्रकूट। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल चित्रकूट में मंदाकिनी नदी पर अस्थाई पीपा पुल निर्माण का कार्य बजट की कमी और प्रशासनिक देरी के कारण गंभीर संकट में पड़ गया है। दीपावली के त्योहार से पहले इस पुल को तैयार किए जाने की योजना थी, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि, वर्तमान स्थिति यह है कि पुल निर्माण के लिए आवश्यक 1.80 करोड़ रुपये की फाइल पिछले 10 दिनों से रीवा स्थित लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) कार्यालय में रुकी हुई है। इस विलंब के चलते अब दीपावली से पहले पुल बनकर तैयार होने की संभावनाएं बेहद कम दिखाई दे रही हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के दोनों ओर बसे क्षेत्रों को जोड़ने के लिए हर वर्ष मानसून के बाद अस्थाई पीपा पुल का निर्माण किया जाता है। यह पुल स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन और व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। खासकर दीपावली और उसके बाद आने वाले त्योहारों के दौरान यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में नदी पार करने के लिए एक सुरक्षित और सुचारू मार्ग का होना अनिवार्य है। लेकिन इस बार बजट आवंटन में हो रही देरी ने पूरे निर्माण कार्यक्रम को प्रभावित कर दिया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अस्थाई पीपा पुल के निर्माण के लिए कुल 1.80 करोड़ रुपये के बजट की आवश्यकता है। इस संबंध में तैयार की गई फाइल को स्वीकृति के लिए रीवा पीडब्ल्यूडी भेजा गया था, लेकिन पिछले 10 दिनों से यह फाइल वहीं अटकी पड़ी है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जब तक बजट की औपचारिक मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू करना संभव नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर इस फाइल को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस पहल होती नहीं दिख रही है, जिससे स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में असंतोष बढ़ रहा है।
इस संकट को और अधिक गहरा करने वाली बात यह है कि पुल निर्माण के लिए आवश्यक उपकरणों और सामग्रियों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पुल निर्माण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुल 29 पीपों (बैरल/पाइप्स) में से वर्तमान में मात्र 5 पीपे ही उपयोग लायक स्थिति में बचे हैं। बाकी 24 पीपे या तो खराब हो चुके हैं या उनमें मरम्मत की जरूरत है, जिसके लिए अलग से समय और संसाधन लगेंगे। यदि नए पीपों की व्यवस्था नहीं की गई या मौजूदा खराब पीपों को समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया, तो बजट मिलने के बाद भी निर्माण कार्य में और अधिक विलंब हो सकता है।
मंदाकिनी नदी पर अस्थाई पुल न होने का सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ रहा है। जिन ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को नदी पार करके अपने गंतव्य तक पहुंचना होता है, उन्हें अब काफी लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे न केवल उनके समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि परिवहन का खर्च भी बढ़ गया है। बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से कठिन साबित हो रही है। दीपावली जैसे बड़े त्योहार के करीब आते जा रहे समय में अगर पुल का निर्माण नहीं हुआ, तो श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
चित्रकूट धाम अपनी धार्मिक महत्ता के लिए पूरे देश में जाना जाता है। रामायण काल से जुड़े इस पावन स्थल पर साल भर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं। मंदाकिनी नदी यहाँ की भौगोलिक और आध्यात्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समय पर आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण सुनिश्चित करे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून के बाद पुल निर्माण को लेकर इस तरह की प्रशासनिक देरी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार 1.80 करोड़ की फाइल का 10 दिनों तक रीवा पीडब्ल्यूडी में लंबित रहना और 29 में से सिर्फ 5 पीपों का उपयोग लायक होना, स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। लोगों ने मांग की है कि उच्च अधिकारी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और बजट की फाइल को मंजूर कराकर निर्माण कार्य को गति दें।
फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि रीवा पीडब्ल्यूडी से इस फाइल को कब तक मंजूरी मिलेगी और निर्माण कार्य कब शुरू हो पाएगा। विभाग की ओर से भी इस देरी के सटीक कारणों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वन्दे भारत न्यूज़ की ओर से इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब प्राप्त नहीं हो सका है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या दीपावली से पहले यह संकट दूर हो पाएगा या श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को इस बार और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

