ओमान की खाड़ी से गुजर रहे जहाज पर अमेरिकी हमले की ये तस्वीरें देखिए…
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10 जून के हमले का ये वीडियो खुद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जारी किया है।
सेटेबेलो नाम के इस जहाज पर सवार 24 क्रू मेंबर्स भारतीय थे। इनमें से 3 की मौत हो चुकी है। 8 जून और 11 जून को भी अमेरिका ने भारतीय क्रू मेंबर्स वाले जहाजों पर हमले किए हैं।
आखिर भारतीय क्रू वाले जहाजों पर मिसाइल क्यों मार रहा है अमेरिका; इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों को समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: भारतीय चालक दल वाले जहाजों पर अमेरिका ने कैसे हमला किया? जवाबः पहला हमला 8 जून की दोपहर करीब 2:15 बजे हुआ…
- ओमान की खाड़ी में पलाऊ का झंडा लगा M/T मैरिवेक्स नाम का टैंकर गुजर रहा था। इसमें सवार चालक दल के सभी 24 सदस्य भारतीय थे।
- अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी एयरक्राफ्ट USS अब्राहम लिंकन से अमेरिका के ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने उड़ान भरी। विमान ने मैरिवेक्स जहाज के इंजीनियरिंग और स्टीयरिंग कंपार्टमेंट पर सटीक गोलाबारी की।
- जहाज में पानी भरने लगा। डूबते जहाज से एक भारतीय नाविक ने रेडियो पर गुहार लगाई- ‘सर, ये मोटर टैंकर मैरिवेक्स है। जहाज डूब रहा है। अमेरिकी नेवी ने इंजन रूम में मिसाइल से हमला किया है। प्लीज हेल्प… प्लीज हेल्प… प्लीज हेल्प।’
- फिर एक और आवाज आई- ‘सभी 24 क्रू सदस्य भारतीय हैं। प्लीज जल्दी मदद करो।’
- ओमान के मिलिट्री हेलीकॉप्टरों और इंडियन कोस्ट गार्ड्स की मदद से जहाज पर मौजूद सभी 24 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया।

मैरिवेक्स पर हमले की लोकेशन मुंबई के तट से करीब 1350 किमी दूर है। (सोर्स- Indian Coast Guard)

मैरिवेक्स पर हमले के बाद सभी भारतीय क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया। (सोर्स- Indian Coast Guard)
दूसरा हमला 10 जून की सुबह करीब 9 बजे हुआ…
- ओमान की खाड़ी से ‘MT सेटेबेलो’ नाम का जहाज गुजर रहा था। इसमें भी पलाऊ का झंडा लगा था। इसमें सवार 28 में से 24 क्रू मेंबर्स भारतीय थे।
- अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड CENTCOM ने X पर बताया, ‘जहाज के क्रू ने बार-बार अमेरिकी सेना के निर्देशों का उल्लंघन किया। इसके बाद एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने प्रिसीशन म्यूनिशन (मिसाइल वगैरह) से जहाज के इंजन रूम पर सटीक गोलाबारी की।’
- ब्रिटिश मैरीटाइम सिक्योरिटी कंपनी वैनगार्ड टेक ने कहा कि सेटेबेलो से इमरजेंसी मैसेज भेजकर बताया कि उसके इंजन रूम में मिसाइल अटैक किया गया है।
- शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसमें सवार 3 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत की पुष्टि की। बाकी को रेस्क्यू कर लिया गया है।
- नाविकों के अधिकारों पर काम करने वाले फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने बताया, ‘मृतकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है।’
- चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश को पहले लापता बताया जा रहा था, लेकिन उनका शव भी बरामद हो गया है।
तीसरा हमला 11 जून की दोपहर हुआ…
- ओमान तट के पास 20 भारतीय नाविकों वाले एक टैंकर एमटी जलवीर पर हमला हुआ। CENTCOM के मुताबिक, ‘गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर ईरानी तेल ले जाने का आरोप था। अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन वाले हिस्से पर दो हेलफायर मिसाइल दागीं।’
जिस ऑपरेशन में भारतीय नाविकों को निशाना बनाया गया, उसे उपलब्धि बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा- ‘मेरी वजह से 10 करोड़ बैरल तेल होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर दुनिया के बाजार में पहुंचा। क्योंकि उसे हम कंट्रोल कर रहे हैं, ईरान नहीं।’
सवाल-2: भारतीय क्रू वाले जहाजों पर हमले की वजह क्या है? जवाबः 28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था। उसने समुद्र में माइन्स बिछाईं। जहाजों पर हमले किए। इससे दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई ठप पड़ गई।
होर्मुज खुलवाने की सारी कोशिश नाकाम होने के बाद अमेरिका ने 13 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट के बाहर ओमान की खाड़ी में दोहरी नाकेबंदी लगा दी।
अमेरिकी सेना ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोकने लगी। जो जहाज अमेरिकी नाकेबंदी का पालन नहीं करता, उन पर हमले भी किए जाते हैं।
अमेरिका का दावा है कि 13 अप्रैल से अब तक उसने 9 जहाजों पर कार्रवाई की है, 135 जहाजों का रास्ता बदला है। 8 से 11 जून के बीच भारतीय क्रू वाले जहाजों के साथ भी यही हुआ। अमेरिकी सेना के मुताबिक…
- 8 जून को आइलैंड देश पलाऊ के झंडे वाला जहाज ईरान के बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा था। उसे रोकने के लिए हमला किया गया। ‘MT मैरिवेक्स’ नाम के इस जहाज पर अमेरिका ने ईरानी तेल खरीदने के चलते दिसंबर 2025 से प्रतिबंध लगाया हुआ है।
- 10 जून को पलाऊ के झंडे वाले ‘MT सेटेबेलो’ ईरान का तेल ले जाने की कोशिश कर रहा था। इसे रोकने के लिए चेतावनी दी गई लेकिन जहाज नहीं रुका, जिसके बाद हमला किया गया।
- 11 जून को MT जलवीर नाकेबंदी तोड़कर ईरान का तेल ले जाने की कोशिश कर रहा था। इसे अपना रास्ता बदलने के लिए कहा गया था। ऐसा न करने पर अमेरिका ने हमला कर दिया।
एक आशंका ये भी है कि ये तीनों जहाज शैडो फ्लीट का हिस्सा थे। शैडो फ्लीट, यानी ऐसे जहाज जिनकी रजिस्ट्री किसी और देश में हो, लेकिन कंट्रोल कोई और देश करे। इन दोनों जहाजों के ऑपरेशंस पर भी पलाऊ का कंट्रोल न के बराबर है।

ईरान के बंदरगाहों तक जाने-आने वाले जहाजों को रोकने के लिए अमेरिकी नेवी ने ओमान की खाड़ी में नाकाबंदी लगाई हुई है।
सवाल-3: तो क्या भारत ईरान से गुपचुप तरीके से तेल खरीद रहा है? जवाबः पहले ये समझिए कि गुपचुप तरीके से शैडो फ्लीट के जरिए समुद्र में तेल का ट्रांसपोर्ट होता कैसे है…
- प्रतिबंधों के चलते ईरान के बंदरगाहों से कई जहाज तेल लेकर निकलते हैं।
- ये समुद्र के बीच में कहीं एक से दूसरे जहाज में तेल के कंटेनर ट्रांसफर कर देते हैं, ताकि ये न पता चले कि असल में तेल कहां से आया है।
- कुछ टैंकर अपनी लोकेशन में हेरफेर कर देते हैं या फिर सिग्नल बंद कर देते हैं।
- इसके अलावा इराकी, ओमान या किसी और देश के फर्जी शिपिंग डाक्यूमेंट तैयार किए जाते हैं या फिर ईरानी तेल को किसी दूसरे देश के जहाज में अपन तेल मिलाकर शेल कंपनियों या फेक नाम वाले खरीदारों को भेज देते हैं।
कनाडाई थिंक टैंक मैकडोनाल्ड लॉरियर इंस्टीट्यूट के मुताबिक, शैडो फ्लीट अपने सफर का ओरिजिन और डेस्टिनेशन दोनों छिपाते हैं। अक्सर उन देशों के झंडे इस्तेमाल करते हैं, जो इंटरनेशनल मैरीटाइम कानूनों की ज्यादा परवाह नहीं करते।
मरीन ट्रैफिक डेटा के मुताबिक, 8 जून को जिस मैरिवेक्स जहाज पर हमला हुआ, वो अप्रैल में ईरान के बंदर अब्बास से कार्गो लेकर भारत आया था।
जिस वक्त मैविरेक्स पर हमला हुआ, वो खाली था और ओमान की खाड़ी से होते हुए ईरान के बंदरगाह तक पहुंचना चाह रहा था। ओमान की खाड़ी तक पहुंचते ही उसने अपने सिग्नल बंद कर लिए थे। ये जहाज किसी भारतीय मालिक का नहीं था।
वहीं सेटेबेलो टैंकर अप्रैल में चीन गया था। उसने चीन के लियांयुंगांग पोर्ट पर सामान उतारा और फिर 12 मई को सिंगापुर से रवाना हुआ था। ये भी ईरान से तेल लेने जा रहा था।
हालांकि इन जहाजों पर भारतीय क्रू होने का मतलब ये नहीं है कि ये ईरान से तेल लेकर भारत आने वाले थे। इंडियन सीफेयरर के मुताबिक, भारतीय नाविक ग्लोबल मर्चेंट नेवी का हिस्सा है, जो दुनिया के किसी भी मालिक के जहाज पर काम करते हैं। जहाज में क्या सामान है और कहां जाएगा, इसका क्रू के भारतीय होने से कोई लेना-देना नहीं होता।
फिलहाल भारत के ईरान से तेल खरीदने के कोई सबूत नहीं हैं- न आधिकारिक तौर पर और न ही गुपचुप तरीके से।
सवाल-4: भारत ईरान से आधिकारिक तौर पर तेल क्यों नहीं खरीद रहा है? जवाब: भारत पिछले 7 सालों से ईरानी तेल नहीं खरीद रहा है। इसकी वजह अमेरिकी बैन है…
- 2018 तक भारत ईरान से रोजाना करीब 6 लाख बैरल तेल खरीद रहा था। ये तब भारत के कुल ऑयल इंपोर्ट का करीब 9% था।
- 2018 में ट्रम्प ने ईरान पर सख्त व्यापारिक-आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। हालांकि नवंबर 2018 में भारत सहित 8 देशों को 180 दिन के लिए ईरान से तेल खरीदने की छूट यानी वेवर मिला।
- इस दौरान भारत के UCO बैंक में ईरानी तेल कंपनियों के खाते खुलवाए गए। इंडियन ऑयल, BPCL जैसी भारतीय कंपनियां इन खातों में तेल के बदले रुपए में पेमेंट कर रही थीं, क्योंकि यही छूट की शर्त थी, कि ईरान को सीधे पैसा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।
- मई 2019 में वेवर का पीरियड खत्म होने के बाद अगले 7 साल तक भारत ने ईरानी तेल खरीद बंद कर दी। इसकी जगह सऊदी अरब, अमेरिका और रूस जैसे देशों से तेल आयात बढ़ाया गया।
- करीब 7 साल बाद 20 मार्च 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने एक महीने यानी 19 अप्रैल तक के लिए ईरानी तेल खरीदने की छूट दी। हालांकि इसमें कहा गया कि जो तेल पहले से टैंकरों में लोड है, वही बेचा जा सकता है।
- 15 अप्रैल को ट्रेजरी डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा, ‘हम रूसी और ईरानी तेल पर जनरल लाइसेंस नहीं बढ़ाएंगे।’ यानी आगे तेल खरीद पर दोबारा पाबंदी लगा दी गई।
- रिसर्च फर्म केप्लर के शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, इंडियन ऑयल और रिलायंस एनर्जी ने इस एक महीने में ईरान से करीब 40 लाख बैरल तेल खरीदा।
- इस दौरान ईरानी तेल कंपनी ‘नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी’ यानी NITC ने ईरानी झंडे वाला ‘फेलिसिटी’ जहाज 12 अप्रैल को भारत भेजा। इंडियन ऑयल ने भी इससे पहले कुराकाओ के झंडे वाले जहाज ‘जया’ से तेल मंगवाया। इन दोनों में करीब 20-20 लाख बैरल कच्चा तेल लाया जा सकता है।

टैंकर ‘जया’ ओडिशा के पारादीप पोर्ट पहुंचा था।
19 अप्रैल, यानी छूट की मियाद खत्म होने के बाद भारत के ईरानी तेल खरीदने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है।
सवाल-5: भारतीय क्रू सदस्यों वाले जहाज पर अमेरिकी हमले, सरकार क्या कर रही? जवाबः भारत ने 10 जून को सेटेबेलो पर हुए हमले के विरोध में अमेरिका के चार्ज डी’अफेयर्स, यानी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब किया। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नागराज नायडू ने मीक्स को इस हमले को लेकर भारत की चिंताओं के बारे में बताया।
इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने अमेरिका का नाम लिए बिना एक बयान जारी किया।
इसमें कहा गया, ‘हम ओमान के तट पर कमर्शियल जहाज सेटेबेलो पर हुए हमले की निंदा करते हैं। इस इलाके में शिपिंग पर लगातार हमले की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। कमर्शियल जहाजों और सिविलियन इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना अब बंद होना चाहिए और जल्द से जल्द अंतर्राष्ट्रीय समुद्री रास्तों से बिना रुकावट के दोबारा व्यापार शुरू होना चाहिए।’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को बताया कि बताया कि भारत ने अमेरिका को साफ मैसेज दिया है कि समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और जहाजों पर हो रहे हमले तुरंत बंद होने चाहिए।
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रिसर्च सहयोग- श्रेया नाकाड़े
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ओमान के पास भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर अमेरिकी हमलों को लेकर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय क्रू वाले तीसरे जहाज MT जलवीर पर भी हमला किया है। इस पर सवार सभी 20 भारतीय सुरक्षित हैं और उन्हें निकालने का काम जारी है। पूरी खबर पढ़ें…















