Mon, 05 Oct 202610:19 PM
Mon, Oct 5, 2026Updated 10:19 PM IST
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गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे: किशनगंज में 72.5 किलोमीटर हिस्से के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू, ठाकुरगंज और टेढ़ागाछ के गांव दायरे में

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बिहार के किशनगंज जिले में बहुप्रतीक्षित गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत को तेज सड़क संपर्क से जोड़ने वाली इस महत्वकांक्षी परियोजना ने अब जमीनी स्तर पर आगे बढ़ने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए के तहत भूमि अधिग्रहण की मंशा संबंधी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के जारी होने के साथ ही किशनगंज जिले में एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए आवश्यक जमीन अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू हो गई है।

जानकारी के अनुसार, किशनगंज जिले में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे का कुल 72.5 किलोमीटर लंबा हिस्सा गुजरेगा। इस पूरे 72.5 किलोमीटर के रूट पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा आवश्यक बजट भी जारी कर दिया गया है। बजट जारी होने से यह स्पष्ट हो गया है कि केंद्र सरकार इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वित्तीय संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। यह राशि भूमि स्वामियों को मुआवजा देने और अन्य संबंधित प्रशासनिक कार्यों में खर्च की जाएगी।

इस विशाल परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण के दायरे में किशनगंज जिले के कई इलाके आए हैं। विशेष रूप से ठाकुरगंज और टेढ़ागाछ प्रखंड के अंतर्गत आने वाले कई गांवों की जमीन इस एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहित की जाएगी। इन दोनों प्रखंडों के दर्जनों गांव सीधे तौर पर इस परियोजना के दायरे में आ गए हैं, जिससे वहां के किसानों और स्थानीय निवासियों के बीच अपनी जमीन और मुआवजे को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जिन गांवों की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में शामिल है, वहां के लोगों को अब राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है। इसके तहत जब केंद्र सरकार किसी राष्ट्रीय राजमार्ग या एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहित करना चाहती है, तो सबसे पहले वह अपनी मंशा (इंटेंशन) की अधिसूचना जारी करती है। इस अधिसूचना के माध्यम से सरकार उन क्षेत्रों और भूखंडों की जानकारी देती है जिनकी उसे परियोजना के लिए आवश्यकता है। अधिसूचना जारी होने के बाद, प्रभावित होने वाले भूमि स्वामियों, काश्तकारों और अन्य हितधारकों को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का वैधानिक अधिकार प्राप्त होता है। ये आपत्तियां संबंधित जिलाधिकारी या नियुक्त प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं, जो उनकी सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई करते हैं।

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे भारत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है, जो देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्से की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से लेकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक की सड़क यात्रा में काफी समय लगता है। मौजूदा मार्गों पर ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है और सड़क की गुणवत्ता भी कई जगहों पर बेहतर नहीं है। इस नए एक्सप्रेस-वे के बन जाने से न केवल यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा, बल्कि यातायात की सुरक्षा और सुविधा में भी अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यह चार प्रमुख क्षेत्रों—पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत—को एक हाई-स्पीड कॉरिडोर से जोड़ देगा। किशनगंज जिला, जो बिहार के पूर्वी छोर पर स्थित है और पश्चिम बंगाल तथा नेपाल की सीमाओं से लगा हुआ है, उसके लिए यह एक्सप्रेस-वे आर्थिक विकास का एक बड़ा इंजन साबित हो सकता है। बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान और सस्ती होगी, जिससे स्थानीय किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा, व्यापार, वाणिज्य और पर्यटन को भी नई गति मिलने की पूरी संभावना है।

ठाकुरगंज और टेढ़ागाछ जैसे प्रखंडों के ग्रामीण इलाकों के लिए यह परियोजना दोहरी भूमिका निभाएगी। एक तरफ जहां कुछ लोगों की जमीन अधिग्रहित होगी और उन्हें कानून के तहत मुआवजा दिया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ इन गांवों को देश के प्रमुख शहरों से सीधे और तेज सड़क मार्ग से जुड़ने का अवसर मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र का समग्र विकास तेज होगा।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा धारा 3ए के तहत अधिसूचना जारी किए जाने के बाद अब जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है कि वह अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करे। भूमि स्वामियों को उचित और समय पर मुआवजा मिले, इसे सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होगी। किशनगंज में 72.5 किलोमीटर के इस हिस्से के लिए बजट जारी हो जाना यह संकेत देता है कि गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य अब कागजों से निकलकर जल्द ही जमीन पर दिखाई देने लगेगा। वंदे भारत न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना से जुड़े आगामी सभी अपडेट और जमीन अधिग्रहण की प्रगति पर स्थानीय लोगों की नजर टिकी हुई है।