धनबाद–:हिंदू धर्म का अत्यंत पावन पर्व मकर संक्रांति इस वर्ष तिथि को लेकर असमंजस का विषय बना हुआ है। विभिन्न पंचांगों के अनुसार पर्व मनाने की तिथि अलग–अलग बताई जा रही है। मिथिला पंचांग जहां मकर संक्रांति 14 जनवरी को मानता है, वहीं ऋषिकेश पंचांग के अनुसार यह पर्व 15 जनवरी को मनाने की परंपरा है।
ज्योतिषाचार्य पंडित गुणानंद झा ने बताया कि मिथिला पंचांग के अनुसार 14 जनवरी की रात 9 बजकर 27 मिनट पर सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। अनुराधा नक्षत्र में संक्रांति होने के कारण 14 जनवरी को ही पुण्य काल माना गया है, जबकि पुण्य काल 15 जनवरी दोपहर 12 बजे तक रहेगा। इसी के साथ खरमास की समाप्ति होगी और मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाएगी, हालांकि विवाह के शुभ लग्न 4 फरवरी से प्रारंभ होंगे।
वहीं ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज पांडे के अनुसार ऋषिकेश पंचांग में 14 जनवरी की शाम 7 बजकर 28 मिनट से संक्रांति आरंभ होकर 15 जनवरी तक मानी गई है। इस पंचांग के अनुसार पुण्य स्नान, दान एवं धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व 15 जनवरी को रहेगा।मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य देव की उपासना, तिल-गुड़ का दान एवं पुण्य कर्म का विशेष महत्व होता है। यह पर्व शुद्धता, नई ऊर्जा, सकारात्मकता तथा शीत ऋतु के अंत का प्रतीक माना जाता है।
इसी क्रम में सिख समुदाय का प्रमुख पर्व लोहड़ी मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। धनबाद के शक्ति मंदिर में संध्या आरती के पश्चात लोहड़ी जलाई जाएगी। इस अवसर पर तिल, गुड़, चूड़ा एवं बादाम अग्नि को अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। कलाकार शुवी बावेजा की टीम द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे, वहीं भांगड़ा और गिद्दा की धूम रहेगी। पंजाबी मुहल्ला जोड़ाफाटक एवं मटकुरिया में भी लोहड़ी उत्सव की विशेष रौनक देखने को मिलेगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्र ग्रह 3 फरवरी 2026 तक अस्त रहेंगे, जिसके कारण विवाह के शुभ मुहूर्त इसके बाद ही प्रारंभ होंगे। वहीं 23 जनवरी को सरस्वती पूजा है, जिसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन गृह प्रवेश सहित सभी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।















