जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर की बैठक में टैक्स अधिकारियों से छिन सकता है गिरफ्तारी का अधिकार, कानून में बड़े सुधार की तैयारी

नई दिल्ली। देश के अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। जीएसटी काउंसिल अपनी आगामी बैठक में टैक्स अधिकारियों को मिले हुए सीधे गिरफ्तारी के अधिकारों पर रोक लगाने संबंधी प्रस्ताव पर विचार करने वाली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जीएसटी काउंसिल की यह महत्वपूर्ण बैठक 7 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी, जिसमें इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में कई बड़े सुधारों को मंजूरी दी जा सकती है। नए प्रस्तावों के तहत अब कोई भी टैक्स अधिकारी बिना किसी सक्षम अदालत के आदेश के किसी भी कारोबारी या व्यक्ति को सीधे गिरफ्तार नहीं कर पाएगा। इसके साथ ही फर्जीवाड़े से जुड़े आपराधिक मामलों की वित्तीय सीमा को बढ़ाए जाने की भी तैयारी चल रही है, ताकि छोटे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।
जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर को होने वाली इस बैठक को देश के व्यापारिक जगत और कर प्रणाली के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में मुख्य रूप से कर अधिकारियों की शक्तियों को सीमित करने और कारोबारियों को राहत देने वाले प्रावधानों पर चर्चा होगी। वर्तमान में जीएसटी कानून के तहत टैक्स अधिकारियों को संदिग्ध कर चोरी या फर्जीवाड़े के मामलों में सीधे गिरफ्तारी करने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, लंबे समय से व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत की ओर से इस प्रावधान का विरोध किया जा रहा था। व्यापारियों का कहना था कि अधिकारियों द्वारा इस शक्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे कारोबारियों को भारी मानसिक और व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ता है। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए अब सरकार ने कानून में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया है।
प्रस्तावित नए नियमों के लागू होने के बाद जीएसटी अधिकारियों की कार्यप्रणाली में बुनियादी बदलाव आएगा। यदि किसी मामले में गिरफ्तारी की आवश्यकता महसूस होती है, तो अधिकारियों को पहले संबंधित अदालत में अपना पक्ष रखना होगा और अदालत से स्पष्ट आदेश प्राप्त करना होगा। अदालत के आदेश के बिना किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने की अनुमति नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न्यायिक निगरानी को मजबूत करेगा और मनमाने तरीके से की जाने वाली गिरफ्तारियों पर पूरी तरह से रोक लगाएगा। इससे जहां एक तरफ नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी तरफ कर विभाग की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी।
इसके अलावा, जीएसटी काउंसिल की बैठक में फर्जीवाड़े के आपराधिक मामलों की सीमा को बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा जाएगा। वर्तमान में जीएसटी कानून के तहत एक निश्चित वित्तीय सीमा से ऊपर की कर चोरी या फर्जीवाड़े को आपराधिक अपराध माना जाता है, जिसमें गिरफ्तारी जैसे कठोर प्रावधान लागू होते हैं। अब इस सीमा को बढ़ाए जाने की तैयारी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि छोटे और मध्यम दर्जे के कर विवादों को आपराधिक मामलों की श्रेणी से बाहर रखा जाएगा। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कर प्रशासन का पूरा जोर बड़े और संगठित फर्जीवाड़ों पर केंद्रित रहे, जबकि सामान्य स्तर की त्रुटियों या छोटे विवादों को दीवानी प्रक्रियाओं और जुर्माने के माध्यम से सुलझाया जाए।
जीएसटी काउंसिल के इस प्रस्तावित फैसले से देश भर के व्यापारियों, उद्योगपतियों और सेवा प्रदाताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले कुछ वर्षों में जीएसटी अधिकारियों द्वारा की गई गिरफ्तारियों को लेकर कई बार विवाद खड़े हुए थे। कई मामलों में कारोबारियों ने आरोप लगाया था कि बिना ठोस सबूतों के उन्हें प्रताड़ित किया गया। ऐसे में अदालत के आदेश को अनिवार्य बनाने से व्यापारिक समुदाय में भय का माहौल कम होगा और व्यापार करने में आसानी यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। व्यापारिक संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे कारोबार हितैषी और न्यायसंगत निर्णय बताया है।
अब सभी की निगाहें 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक पर टिकी हुई हैं। इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। उम्मीद की जा रही है कि बैठक में इन प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा और मंजूरी प्रदान की जाएगी। यदि काउंसिल इन प्रस्तावों को मंजूरी दे देती है, तो इसके बाद जीएसटी कानून में औपचारिक संशोधन की प्रक्रिया शुरू होगी। यह सुधार देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को अधिक परिपक्व, संतुलित और कारोबारियों के अनुकूल बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। हालांकि, यह देखना बाकी है कि बैठक में इन प्रस्तावों पर सदस्यों की क्या प्रतिक्रिया रहती है और अंतिम मंजूरी किस स्वरूप में दी जाती है।

